पेशावर में आर्मी स्कूल पर आतंकी हमला. दिल दहला दिया था इस अटैक ने. सैकड़ोंमां-बाप के अरमान कुचले गए थे. तबाही का मंज़र था. और पाकिस्तान के लिए सबक लेने कावक्त. फैसले लिए गए. आतंक को ख़त्म करने की कसमें खाई गईं. मगर हालात अब भी वही हैं.धमाके होते हैं. लोग मरते हैं. आतंकी खुलेआम घूमते हैं. पाकिस्तान को नजर नहीं आता.बस सबूत मांगता रहता है. लेकिन आर्मी ने इस हमले के बाद कुछ अदालतें बनाने की बातकी थी. जिसको वहां के सुप्रीम कोर्ट ने इजाज़त दे दी थी. इन अदालतों ने दो साल मेंताबड़तोड़ फैसले लिए. 275 मामलों की सुनवाई इन अदालतों में हुई और 161 को मौत की सजासुना दी गई. लेकिन जो काम खुद कोर्ट को करना चाहिए था उसके लिए आर्मी की अदालतेंबनाने से विवाद हुआ. इसे मानवाधिकार के खिलाफ बताया गया. दो साल बाद अब ये अदालतेंबंद हो गई हैं. 16 दिसंबर 2014 को पेशावर के आर्मी स्कूल पर तालिबानी हमला हुआ. उसहमले में 150 से ज्यादा बच्चे मारे गए. तब पाकिस्तानी आर्मी ने सख्ती से आतंकियोंके सफाए करने की बात की. और आर्मी अदालतें बनाये जाने की मांग हुई, जिसमें आतंकियोंका फैसला फटाक से किया जा सके. अदालतों में पड़ा न रहे. आर्मी अदालतों को बनाने केलिए संविधान में संशोधन करना पड़ा और दो साल के लिए ये अदालतें बना दी गईं. जिनकीमियाद 7 जनवरी को पूरी हो गई.तालिबानी हमले में 16 दिसंबर को पेशावर में 150 से ज्यादा बच्चे मारे गए थे.आर्मी अदालतें बनाये जाने भारी बहस छिड़ गई थी और अदालतों में विभिन्न ह्यूमन राइट्सएक्टिविस्ट ने इसे देश के संविधान और इंटरनेशनल चार्टरों में मौजूद ह्यूमन राइट्सके खिलाफ बताया. लेकिन इन विरोधों के बाद भी इन अदालतों को काम करने दिया गया,क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने संसद की ओर से साल 2015 में लागू किए गए 21वें संवैधानिकसंशोधन और पाकिस्तान सेना (संशोधन) विधेयक, 2015 को वैध करार दिया था. संविधान मेंकिए गए संशोधन में यह स्पष्ट तय कर दिया गया था कि ये अदालतें दो साल बाद खत्म करदी जाएंगी. इस फैसले से आर्मी के पास लोगों पर मुकदमा चलाने की पॉवर आ गई थी. दोसाल के दौरान आर्मी अदालतों को 275 मामले सौंपे गए, जिनमें 161 आतंकियों को मौत कीसजा सुनाई गई. इनमें से अभी तक सिर्फ 12 आतंकियों को मौत मिली है. इन अदालतों ने116 आतंकियों को कैद की सजा सुनाई, जिनमें से ज्यादातर उम्रकैद की सजा काट रहे हैं.जिन आतंकियों को सजाएं सुनाई गर्इं, वे अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान,जमातउल अहरार, तौहीद वल जिहाद ग्रुप, जैश-ए-मुहम्मद, हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी,लश्कर-ए-झंगवी, लश्कर-ए-झंगवी अल-आलमी, लश्कर-ए-इस्लामी और सिपह-ए-सहाबा से जुड़ेथे. अब तक जिन आतंकियों को फांसी पर लटकाया जा चुका है उनमें पेशावर स्कूल पर अटैककराने वाला भी शामिल था. जिन आतंकी मामलों को आर्मी कोर्ट में भेजा जा रहा था अब वोदेश में पहले से मौजूद एंटी टेरर कोर्ट में सुनवाई के लिए जाएंगे.-------------------------------------------------------------------------------- वो तारीख, जिसने पाकिस्तान को भी रुलाया और हिंदुस्तान को भीमासूम बच्चों को मार के कौन सी जन्नत मिलती है?