The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Pakistan mediate Iran-US talks What is the problem with Saudi Arabia

ईरान-अमेरिका की जंग में पाकिस्तान बुरा फंसा, सिर से हटे 'बवाल', इसलिए करवा रहा डील

Pakistan ने ही कथित तौर पर अमेरिका का पीस प्लान Iran को सौंपा, जिसे तेहरान ने रिजेक्ट कर दिया. पाकिस्तान के लिए यह रास्ता आसान नहीं है. खासकर तब जब ईरान ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है. लेकिन पाकिस्तान ये डील करवाना क्यों चाहता है? इसके पीछे है सऊदी एंगल, जिसमें उसके लिए आगे कुंआ और पीछे खाई जैसी स्थिति बन गई है.

Advertisement
pic
27 मार्च 2026 (अपडेटेड: 27 मार्च 2026, 03:56 PM IST)
Pakistan mediate Iran-US talk
पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने ही कथित तौर पर अमेरिका का पीस प्लान ईरान को सौंपा, जिसे तेहरान ने रिजेक्ट कर दिया. पाकिस्तान के लिए यह रास्ता आसान नहीं है. खासकर तब जब ईरान ने पीछे हटने से इनकार कर दिया है. ऐसे में यह जंग अगर और बढ़ती है तो पाकिस्तान को भी इस लड़ाई में घसीटे जाने का खतरा है. वजह है- सऊदी अरब के साथ उसका रक्षा समझौता.

पाकिस्तान क्या सोचकर चल रहा?

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. पाकिस्तान के इसमें दो हित है. पहला- दुनिया में उसका कद थोड़ा ऊंचा हो जाएगा. ठीक वैसे ही जैसे 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के वक्त हुआ था. उस समय इस्लामाबाद ने वाशिंगटन और बीजिंग के बीच ‘पुल’ की भूमिका निभाई थी. दूसरा- वह युद्ध में घसीटे जाने से बच जाएगा.

ईरान का रुख इन दिनों और भी कड़ा हो गया है. वह भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ गारंटी, नुकसान की भरपाई और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर कंट्रोल की मांग कर रहा है. इसलिए, अगर तेहरान पड़ोसी खाड़ी देश पर हमले जारी रखता है, तो सितंबर 2025 में हुआ सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का आपसी रक्षा समझौता, इस्लामाबाद के लिए मुसीबत बन सकता है. इस समझौते के तहत दोनों देशों के लिए एक-दूसरे की मदद करना जरूरी है.

जैसे ही पश्चिम एशिया में चल रही जंग दूसरे हफ्ते में पहुंची और ईरान ने सऊदी अरब पर हमला किया, पाकिस्तान चौकन्ना हो गया. विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि उन्होंने ईरान को सऊदी अरब के साथ अपने समझौते की याद दिलाई है. यह भी कहा कि वे ईरान के साथ मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं. पाकिस्तान में सुरक्षा सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि इस्लामाबाद इस समझौते से बंधा हुआ है, लेकिन वह ईरान के साथ अपनी गुप्त बातचीत के जरिए इस संघर्ष में शामिल होने से बचने की कोशिश कर रहा है. लेकिन ये कोशिशें कितने दिन काम आएंगी, यह देखने वाली बात होगी.

वीडियो: ईरान के खर्ग आईलैंड पर कब्जे के लिए ट्रंप का प्लान तैयार?

Advertisement

Advertisement

()