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पाकिस्तान ईरान युद्ध रुकवाने की बातचीत में कोई 'मध्यस्थ' नहीं था, बड़े पत्रकार ने सच बता दिया

पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर कराने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लिमिटेड डिप्लोमैटिक रिलेशन के चलते मध्यस्थ की भूमिका में नहीं था. उन्होंने सीजफायर कराने का क्रेडिट चीन को भी दिया है.

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8 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 8 अप्रैल 2026, 08:37 PM IST)
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अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुकवाने में पाकिस्तान ने सहायक की भूमिका निभाई है. (इंडिया टुडे)
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डॉनल्ड ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से पहले अमेरिका-इजरायल और ईरान दो हफ्ते के सीजफायर के लिए मान गए हैं. 40 दिनों तक चले युद्ध को रुकवाने का क्रेडिट पाकिस्तान को दिया जा रहा है. अमेरिका और ईरान दोनों ने सीजफायर के लिए पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया है. अब पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने सीजफायर कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर विस्तार से बताया है. साथ ही उन्होंने इसके लिए चीन को भी क्रेडिट दिया है.

इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सीनियर पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने बताया,

 अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने में इस्लामाबाद के योगदान को कई पक्षों ने स्वीकार किया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरानी लीडरशिप शामिल है.

हामिद मीर ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की भूमिका मध्यस्थ की न होकर एक सहायक की थी. उन्होंने मध्यस्थ और सहायक के बीच का अंतर भी बताया. उनके मुताबिक, 

इस युद्ध में दो से तीन पक्ष थे. एक पक्ष अमेरिका और इजरायल थे. दूसरी तरफ ईरान था. फिर कुछ खाड़ी देश भी अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े थे. क्योंकि ईरान जवाबी हमले में इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर रहा था. पाकिस्तान की डिप्लोमैटिक लिमिटेशन है. उसका इजरायल के साथ डिप्लोमैटिक रिलेशन नहीं है. जबकि एक मध्यस्थ की पहुंच सभी पक्षों तक होनी चाहिए. पाकिस्तान की पहुंच सीमित थी. उसकी पहुंच केवल अमेरिका और ईरान तक ही थी. इसलिए मेरा मानना है कि पाकिस्तान एक सहायक की भूमिका निभा रहा था.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था. हामिद मीर ने बताया कि हमला शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान से संपर्क साधना शुरू कर दिया था. उन्होंने बताया, 

यह पहल एक मार्च को शुरू हो गई थी. हमारे उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से संपर्क किया. उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को फोन किया और ट्रंप प्रशासन से भी बात की. उन्होंने सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों से भी संपर्क किया.

मीर ने बताया कि पहले पाकिस्तान केवल ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा था. क्योंकि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ प्रत्यक्ष रक्षा समझौता है, (यानी अगर सऊदी युद्ध में उतरता तो पाकिस्तान को भी मदद के लिए सेना भेजना पड़ती). पाकिस्तानी पत्रकार के मुताबिक, 

पाकिस्तान ने ईरान से कहा कि कृपया सऊदी अरब पर हमला नहीं करिए. क्योंकि हमारा उनके साथ रक्षा सहयोग समझौता है इसलिए ऐसी स्थिति न पैदा करें जिससे हमें ऐसे फैसले लेने पड़ें जो आपको पसंद न हों.

हामिद मीर ने बताया कि जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती गई पाकिस्तान की भूमिका भी बदलती गई. युद्ध की आंच धीरे-धीरे तुर्की तक पहुंच गई. जिसके बाद पाकिस्तान को एक सहायक की भूमिका निभानी पड़ी. पाकिस्तानी पत्रकार से सवाल किया गया कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर में से सीजफायर कराने वाले प्रयासों का नेतृत्व कौन कर रहा था? इसके जवाब में उन्होंने बताया, 

इशाक डार इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे थे. उन्हें सेना और सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त था.

हामिद मीर ने बताया कि इशाक डार ने सीजफायर कराने की कोशिश में चीन का भी दौरा किया. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी वाली रात को चीन ने ही ईरान को बातचीत के लिए राजी करने में पाकिस्तान की मदद की.

वीडियो: ईरान जंग खत्म कराने के लिए चीन-पाकिस्तान के साथ क्या प्लान बना रहा?

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