सिक्योरिटी वाला गायब, कैमरे बंद... पाकिस्तान के गुरुद्वारे में सिख पति-पत्नी की गोली मारकर हत्या
Pakistan के एक गुरुद्वारे में एक सिख दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई. बताया गया कि गुरुद्वारे के अंदर घुसकर घटना को अंजाम दिया गया. अकाल तख़्त ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक गुरुद्वारे में एक बुज़ुर्ग कपल की 17 जून को गोली मारकर हत्या कर दी गई. दंपति मरदान जिले में स्थित एक गुरुद्वारे में सेवा करते थे. हमलावरों ने गुरुद्वारे के अंदर घुसकर उनपर गोली चलाई, जिसके बाद वो फरार हो गए. अब पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. इस घटना पर अकाल तख़्त और भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गुरुद्वारे में एक सिक्योरिटी गार्ड को तैनात किया गया था. लेकिन हमले के वक़्त वो मौजूद नहीं था. पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि गुरुद्वारे में CCTV कैमरे लगे थे लेकिन, जांचकर्ताओं ने कहा कि वीडियो रिकॉर्डर ऑन नहीं था. मृतकों की पहचान 70 साल के जगन्नाथ और उनकी पत्नी आसमा वंती के तौर पर हुई है.
पुलिस ने क्या बताया?मरदान डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर मसूद अहमद बंगश ने बताया कि जांच के लिए जॉइंट इन्वेस्टीगेशन टीम (JIT) बनाई गई थी. इसमें काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट और सीनियर पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया था. पुलिस ने बताया कि अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जो ये साबित करें कि आरोपी का किसी आतंकी संगठन से नाता है. आरोपी की पहचान शेर शाह के रूप में हुई है.
पुलिस के मुताबिक, हत्या का मकसद अभी तक सामने नहीं आया है. लेकिन पुलिस हर एंगल से इस केस की जांच कर रही है.
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अकाल तख़्त और भाजपा का रिएक्शनसिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने इस घटना की निंदा की है. उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मुहम्मद सोहेल खान अफरीदी से मामले में संज्ञान लेने की अपील की. उन्होंने आरोपियों को सख्त सजा दिलवाने की मांग की है.
इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी इस घटना की निंदा की. उन्होंने पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. उन्होंने 1950 नेहरू-लियाकत पैक्ट का ज़िक्र किया और कहा कि पाकिस्तान लगातार इस पैक्ट को पूरा करने में असफल रहा है. ये पैक्ट ये सुनिश्चित करता है कि दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) में अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित रहे. इस घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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