दकियानूसी ख्यालों की फुस्सी निकालती हैं ये ढाबा गर्ल्स
पाकिस्तान में वो चौड़ में दुनिया से कहती हैं, 'बेखौफ आज़ाद जीना मुझे.'
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'लोग क्या कहेंगे नजरें नीची करो ये क्या पहना हुआ है जुबां पर काबू रखो लड़कियां घर की इज्जत होती हैं लड़कियां ऐसा काम नहीं करती'भाड़ में जाएं ऐसी बातें. दकियानूसी बातें जित्ती जल्दी तबाह की जाएं, उत्ता चंगा है. इंडिया में जो हो रहा है सो हो रहा है. आप हम देखते, पढ़ते और सुनते ही रहते हैं. हमारे यहां की लड़कियां बैरियर तोड़ रही हैं. आजादी से जी रही हैं. जीना चाह रही हैं. अपना जो प्यारा पड़ोसी है, वहां की बेटियां जाबड़ काम कर रही हैं. जानोगे तो आपका भी हमारी तरह दिल खुश हो जाएगा.
#Girlsatdhabas ढाबे पर लड़कियां. हाईवे से आवन-जावन में कभी न कभी आप किसी ढाबे पर रुके होंगे. कुछ खाया या पिया होगा. याददाश्त पर थोड़ा लोड डालिए. आपको ढाबे में तब आस पास कहीं लड़कियों का कोई ग्रुप जोर से ठहाके लगाते हुए चाय पीते या कुछ खाते नजर आया था. फैमिली के साथ बैठी लड़कियों को काउंट कर रहे हैं तो काउंटर होने के लिए तैयार रहिए. खैर शायद बमुश्किल ही आपने किसी ढाबे पर लड़कियों को आजाद बेखौफ बैठे देखा हो. यहीं से शुरू होता है हमारा पाकिस्तान एंगल. जनाब, उस पार की लड़कियां ढाबों पर बैठ चाय पीने और जी भर गपियाने के लिए घरों से बाहर निकल आई हैं.

कराची में लड़कियों के लिए 'खुल्ला' माहौल? हालात हमारे यहां से भी कम ठीक हैं उस पार. लेकिन कुछ लोग होते हैं न. कुछ करने की ठान लेते हैं. खुशी और सुकूं के लिए. ऐसी ही कुछ लड़कियां हैं उस तरफ. जब मन करता है पाकिस्तान की चौड़ी, सकरी गलियों में निकल जाती हैं. बैठती और गपियाती हैं, ढाबों पर बैठकर. ये लड़कियां 'पर्दे में रहो' जैसे ख्यालों की फुस्सी निकालती हैं. और जमकर टहिलती, घूमती नजर आती हैं.

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फेसबुक पेज से जुड़े क्या? इन लड़कियों ने फेसबुक पेज भी बनाया है. GIRLS AT DHABAS. जब भी ये कहीं किसी ढाबे पर जाती हैं तो फेसबुक पर फोटो अपलोड कर देती हैं. टाइमलाइन भर रखी है कुड़ियों ने. टंबलर पर भी खूब एक्टिव हैं ये लड़कियां. ये कल्चर शुरू करने वाली लड़कियों में से एक कराची की सादिया खत्री ने कहा, 'ये मुहिम कोई आंदोलन है. या कोई बड़ा बदलाव लाएगा. ऐसी कोई भ्रम मैंने नहीं पाला है.' मिड डे को दिए इंटरव्यू में सादिया ने कहा, 'मैं अक्सर ढाबा जाती थी. मैं वहां इकलौती लड़की होती थी. एक बार मैंने ढाबा जाकर #girlsatdhabas हैशटैग के साथ तस्वीर डाली. हमारे सोशल मीडिया सर्किल में फिर इसी हैशटैग के साथ कुछ और लोगों ने भी तस्वीरें डालीं. और ट्रेंड शुरू हो गया. धीरे धीरे पांच लड़कियां जुड़ गईं इस प्रोजेक्ट से.

अपना ढाबा, अपनी हुकूमत #Girlsatdhabas वालों का ख्वाब है कि अपना ढाबा खोला जाए. फंड भी जुटा रही हैं. करीब साढ़े छह लाख रुपये जोड़ने की बात है. बताते हैं कि लड़कियों ने एक महीने में करीब 2 लाख रुपये जोड़ भी लिए हैं.
एंटी मैन तो नहीं है कैंपेन? बिलकुल नहीं. #Girlsatdhabas से जुड़ी लड़कियां कहती हैं. आदमियों से कोई दुश्मनी थोड़ी है. जब हमारा अपना ढाबा होगा, तो वो भी आएं. उनके लिए स्पेस होगा. लेकिन इन ढाबों का स्टाफ केवल लड़कियां या सेक्सुएल माइनॉरिटी ही होंगी.

सादिया
हमें भी जुड़ना है #Girlsatdhabas से हां तो जुड़िए न. कम से कम 10 डॉलर डोनेट करने होंगे. ताकि लड़कियां ढाबा खोल सकें. दूसरा काम ये कि अपनी तस्वीरों और कहानियों को लड़कियां #Girlsatdhabas के साथ शेयर कर सकती हैं. आस पड़ोस में स्ट्रीट क्रिकेट मैच करवा सकें तो बहुत ही चंगी बात. और कोई बहुत ही बड़े दिलवाला है तो वो पुरानी साइकिल या मोटर साइकिल भी डोनेट कर सकता है. अपना लड़कियां आराम से घूम सकेंगी. और सोना महापात्रा वाला गाना गा सकेंगी, बेखौफ आजाद जीना है मुझे....

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गाना सुन लियो, 'बेखौफ आज़ाद जीना मुझे'
https://www.youtube.com/watch?v=SA4m_rcSwqs

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