सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया. लेकिन अब सरकार परदबाव है कि वह गलती से एलओसी पार कर गए भारतीय जवान को सही-सलामत वापस लेकर आए. वोजवान जो गलती से एलओसी पार कर गया था और जिसके पाकिस्तानी कब्जे में होने का सदमाउनकी नानी सह नहीं पाईं और दिल के दौरे से मर गईं. यह भी भारतीय सेना के एक जवान औरउसके शोक संतप्त परिवार के बारे में है. चंदू बाबूलाल चौहान मौजूदा मैकेनिज्म केतहत वापस लाया जा सकेगा, इसकी संभावना बनी है. क्योंकि दो हफ्ते बाद पाकिस्तान नेगुरुवार को भारत से कंफर्म कर दिया है कि हमारी 37 राष्ट्रीय राइफल का सिपाही चंदूबाबूलाल चव्हाण उसके कब्जे में है. आर्मी सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी आर्मीडायरेक्टोरेट की तरफ से गुरुवार को ऑफिशियल हॉटलाइन पर भारतीय सेना को ये सूचना दीगई. 22 साल का चंदू 29 सितंबर की दोपहर को चंदू अपनी राइफल के साथ गलती से' एलओसीपार कर गए थे. इसी दिन भारतीय सेना ने तड़के एलओसी के पार सर्जिकल स्ट्राइक कियाथा. उस तरफ कड़ी चौकसी थी और चंदू उनकी पकड़ में आ गए. बताया जाता है कि पाक आर्मीने मानकोट के वेस्ट में झंडरूट इलाके से चौहान को पकड़ा और अब उन्हें निकयालमिलिट्री हेडक्वॉर्टर में रखा है. सूत्रों के मुताबिक, उसी दिन दोपहर ढाई बजे,लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने पाकिस्तानी सेना को हॉटलाइन पर चंदू के गायब होने कीखबर दी थी. भारतीय सेना ने साफ किया कि चव्हाण के गायब होने का सर्जिकल स्ट्राइक सेकोई लेना-देना नहीं है.अब जरा चंदू के परिवार की बात.चंदू ने 2012 में सेना जॉइन की थी. उनका परिवार महाराष्ट्र के धुले जिले केबोरविहिर गांव में रहता है. दो महीने पहले ही उन्हें कश्मीर भेजा गया था. उनके बड़ेभाई भूषण भी सेना में हैं और जामनगर में पोस्टेड हैं. छुटपन में ही चंदू के मां-बापगुजर गए थे. उन्हें उनके नाना-नानी ने पाल-पोसा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजजब भोपाल में जब शौर्य स्मारक का उद्घाटन करेंगे, उनकी सरकार ये दबाव झेल रही होगी.चंदू के गांव वाले घर में उनके दोस्त और रिश्तेदार जमा हो रहे हैं. दो हफ्ते पहलेजब चंदू की नानी लीलाबाई को खबर मिली थी तो उन्हें सदमे से दिल का दौरा पड़ गया था.उस वक्त वह चंदू के बड़े भाई भूषण के पास गुजरात के जामनगर में थीं और वहीं उनकीमौत हो गई थी. चंदू बाबूलाल उस कमांडो टीम का हिस्सा नहीं थे, जिसने PoK मेंसर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकियों का मार गिराया. लेकिन एकमात्र डर यही है किपाकिस्तान में इस वक्त जो भारत विरोधी माहौल है और राहील शरीफ पर अपनी ताकत दिखानेका दबाव है, कहीं चंदू इसकी भेंट न चढ़ जाए. उन पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर वहां उन्हेंघुसपैठिया या जासूस साबित करने की कोशिश न होने लगे. आज भोपाल में जब नरेंद्र मोदीशहीद सैनिकों की याद में शौर्य स्मारक का उद्घाटन कर रहे होंगे, उनकी सरकार पर चंदूको सुरक्षित वापस लाने का दबाव भी होगा. यहीं पर भारत सरकार की कूटनीतिक परीक्षाहोगी.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें कौन हैं चंदू बाबूलाल चौहान सस्पेंस: भारतीय जवान चंदू बाबूलाल कोपाकिस्तान ने कब पकड़ा?