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पाकिस्तान ने 16 महीनों में 6 सैटेलाइट स्पेस में भेजे, भारत के डिफेंस एक्सपर्ट ने बड़ी चेतावनी दे दी

पाकिस्तान ने पिछले 16 महीनों में चीन की मदद से 6 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च किए हैं, जिन्हें खुफिया निगरानी के लिहाज से अहम माना जा रहा है. इनमें से कुछ सैटेलाइट्स की ऑर्बिट और सेंसर कैपिबिलिटी उत्तर भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर पर बार-बार नजर रखने में मदद कर सकती है.

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9 जून 2026 (पब्लिश्ड: 11:38 PM IST)
Pakistan Satellites China Pakistan Space Cooperation
अंतरिक्ष से भारत पर नजर रखेगा पाकिस्तान? (फोटो- India Today)
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पाकिस्तान क्या सैटेलाइट्स भेजकर ‘भारत की रेकी’ करने की कोशिश कर रहा है? कछुए की रफ्तार से चलने वाले पाकिस्तान के अंतरिक्ष मिशनों में पिछले एक साल में खरगोश जैसी तेजी देखी गई है. 16 महीनों में पाकिस्तान ने चीन की मदद से 6 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं. इनमें से कुछ सिर्फ अर्थ ऑब्जर्वेशन यानी धरती पर निगरानी रखने के लिए नहीं भेजे गए हैं. 

बताया जा रहा है कि इनका असल उद्देश्य दक्षिण एशिया, खासकर भारत और जम्मू-कश्मीर पर ज्यादा फोकस रखना है. दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान में ये सब पहलगाम हमले और भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के पहले से चल रहा था. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी Space and Upper Atmosphere Research Commission (SUPARCO) साल 1961 में बनी थी. इसके बाद से उसने बेहद धीमी रफ्तार से कुछ ही सैटेलाइट्स लॉन्च किए. लेकिन जनवरी 2025 से लेकर अप्रैल 2026 के बीच पाकिस्तान ने 6 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स लॉन्च किए हैं. इनमें ऑप्टिकल इमेजिंग, हाइपरस्पेक्ट्रल और रिमोट-सेंसिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं.

भारत के लिए चिंता की बात क्यों है?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि असल बात ये नहीं है कि पाकिस्तान ने कितने सैटेलाइट्स लॉन्च किए हैं. बल्कि ये है कि ये सब मिलकर क्या कर सकते हैं? इंडियन नेवी के पूर्व रियर एडमिरल सुधीर पिल्लई ने इसे लेकर एक ब्लॉग पोस्ट लिखा है. उन्होंने पाकिस्तान के इस अंतरिक्ष प्रोग्राम का एनालिसिस करते हुए बताया कि 16 महीनों में 6 सैटेलाइट्स का जो नेटवर्क पाकिस्तान ने तैयार किया है, वो सिर्फ धरती पर होने वाले बदलावों पर नजर रखने वाला सिस्टम नहीं है. इसकी प्राथमिकता ये नहीं है कि वो पृथ्वी को ऑब्जर्व करे और बाद में इसका थोड़ा-बहुच इस्तेमाल सेना भी कर ले, बल्कि इनके सैटेलाइट्स की प्राथमिकता ही सैन्य उपयोग की लगती है.

पिल्लई के मुताबिक, इन सैटेलाइट्स की कक्षा (Orbit), इनमें लगे सेंसर और इन्हें बनाने वाली संस्थाओं को देखकर लगता है कि इनका मकसद कहीं ज्यादा रणनीतिक और मिलिट्री वाला है. यानी ये सैटेलाइट्स पाकिस्तान के लिए सिर्फ मौसम की जानकारी देने या धरती की सामान्य तस्वीरें जुटाने के काम नहीं आएंगे. बल्कि ये भारतीय जमीन पर नजर रखने, खुफिया जानकारी जुटाने जैसे काम भी करेंगे. 

सैटेलाइट्स क्या कर सकते हैं?

पाकिस्तान के 6 उपग्रहों में से सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला सैटेलाइट PRSC-EO3 है. इसे अप्रैल 2026 में लॉन्च किया गया था. बताया गया कि इसे पृथ्वी की जिस कक्षा में सेट किया गया है, वहां से पूरी दुनिया की बजाय दक्षिण एशिया पर खासतौर पर निगरानी रखी जा सकेगी. अमेरिका की अंतरिक्ष निगरानी कंपनी COMSPOC का मानना है कि ये सैटेलाइट उत्तर भारत, खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के ऊपर से बार-बार गुजर सकता है. साथ ही ये एक ही दिन में एक ही इलाके की कई बार तस्वीरें खींच सकता है.

अंतरिक्ष और डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी निगरानी पाकिस्तान की सेना के बहुत काम आ सकती है.

सैटेलाइट्स के इस परिवार में कई ऐसे भी हैं, जो बहुत साफ तस्वीरें लेते हैं. ये जमीन पर होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी कैप्चर कर लेते हैं. छिपाई गई सैन्य सामग्री का पता लगाना हो या स्ट्रैटजिक तौर पर संवेदनशील इलाकों पर नजर रखना, ये सैटेलाइट्स सबकुछ कर लेते हैं.

अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान ने HS-1 हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट छोड़ा था. इसके बारे में कहा जाता है कि यह अलग-अलग तरह की चीजों में फर्क कर सकता है. यह ऐसी वस्तुओं की पहचान भी कर सकता है जो सामान्य कैमरों या ऑप्टिकल सेंसरों की नजर से बच सकती हैं. पाकिस्तानी सैटेलाइट्स की टीम में PRSC-EO2 और PRSC-EO3 जैसे एकदम नए और एडवांस उपग्रह भी हैं. ये अपग्रेडेड इमेजिंग टेक्नीक और AI की मदद से किसी भी डेटा का एनालिसिस करने में माहिर हैं. 

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान की इस योजना में चीन की बड़ी भूमिका है. इनमें से कई सैटेलाइट्स चीनी रॉकेटों से छोड़े गए हैं. कुछ को पाकिस्तान और चीन की एजेंसियों ने मिलकर बनाया है. 

भारत को रहना होगा तैयार

वैसे तो भारत स्पेस सेक्टर में पाकिस्तान से काफी आगे है. लेकिन पड़ोसी देश की सैन्य उद्देश्यों वाले स्पेस प्रोग्राम्स की रफ्तार देखकर उसे सतर्क होना होगा और मिलिट्री-स्पेस के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी. क्योंकि डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वक्त में जंग सिर्फ जमीन पर मौजूद हथियारों से नहीं लड़ी जाएगी. अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी जिसके पास ज्यादा और तेज होगी, उसी का पलड़ा भारी रहेगा.

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