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'तुर्कमान गेट के पास मस्जिद की पूरी जमीन वक्फ की', ओवैसी ने मामले का 'RSS कनेक्शन' बता दिया

ओवैसी के मुताबिक कोर्ट ने सर्वे कराने का आदेश दिया, लेकिन इस मामले में वक्फ को पक्षकार ही नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड को इस केस में पार्टी बनना चाहिए था और वक्फ से जुड़ी गजट अधिसूचना को अदालत के सामने रखना चाहिए था.

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Owaisi
AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी. (India Today)
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सौरभ
7 जनवरी 2026 (Published: 08:57 PM IST)
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दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए तोड़फोड़ अभियान पर AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दावा किया कि यह पूरी ज़मीन वक्फ की है. ओवैसी ने कहा, 

12 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में एक फ़ैसला दिया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस मामले में याचिकाकर्ता ‘सेव इंडिया फ़ाउंडेशन’ था, जिसका पृष्ठभूमि RSS से जुड़ी हुई है.

ओवैसी के मुताबिक कोर्ट ने सर्वे कराने का आदेश दिया, लेकिन इस मामले में वक्फ को पक्षकार ही नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड को इस केस में पार्टी बनना चाहिए था और वक्फ से जुड़ी गजट अधिसूचना को अदालत के सामने रखना चाहिए था. इसके अलावा, दिल्ली वक्फ बोर्ड को अदालत में रिव्यू पिटीशन भी दाख़िल करनी चाहिए थी. ओवैसी ने कहा कि ऐसा न होने के कारण अदालत ने गलत फ़ैसला ले लिया.

AIMIM प्रमुख ने यह भी कहा कि जिस LDO का हवाला दिया जा रहा है, वह शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन है. ओवैसी ने ज़ोर देकर कहा कि सबसे अहम बात यह है कि 1947 में यह जगह एक मस्जिद थी. इस पूरी प्रक्रिया में वक्फ को नुकसान हुआ है और जो कुछ भी हुआ है, वह गलत है.

असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की कि दिल्ली वक्फ बोर्ड और उसकी प्रबंध समिति को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए, सभी तथ्य सामने रखने चाहिए और मौजूदा स्थिति को बनाए रखने यानी status quo के लिए अदालत से आदेश लेना चाहिए.

इस बीच घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात और पत्थरबाजी में घायल पुलिसकर्मियों के बयान भी सामने आएं हैं. आजतक से बात करते हुए कांस्टेबल विक्रम ने बताया,

मैं ड्यूटी पर तैनात था. 2 हजार से ज्यादा की भीड़ थी. भीड़ नारे लगा रही थी- 'जिसका खून नहीं खौला...' और इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई. मेरे सिर पर चोट आई है.

मौके पर मौजूद हेड कांस्टेबल जल सिंह ने भी घटना के बारे में बताया. उन्होंने कहा,

डेमोलिशन से पहले हम लोग अनाउंसमेंट कर रहे थे कि 'कोर्ट का ऑर्डर है, शांति बनाए रखें.' तभी भीड़ उग्र हुई. भीड़ नारे लगा रही थी और बहुत ज्यादा पथराव हो रहा था. पथराव करने वालों ने मास्क लगाया हुआ था, कुछ ने तौलिए से चेहरा ढका हुआ था.

इस बीच हिंसा और पथराव को लेकर दर्ज FIR की कॉपी सामने आई है. FIR में दर्ज मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक हेड कांस्टेबल जल सिंह के सिर के पिछले हिस्से में 3.5 सेंटीमीटर का गहरा घाव पाया गया. कांस्टेबल विक्रम के माथे के दाहिने हिस्से में चोट आई, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों को कमर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं. कुछ मामलों में सूजन, खरोंच और हल्की चोटें दर्ज की गईं.

वीडियो: पुरानी दिल्ली में मस्जिद के पास तोड़-फोड़, पत्थरबाज़ी हुई, 5 पुलिसकर्मी घायल

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