आधार कार्ड जारी करने वाली सरकारी एजेंसी UIDAI ने नवंबर 2016 में दावा किया था कि'आधार डेटा पूरी तरफ सुरक्षित है और UIDAI से कोई भी डेटा लीक नहीं हो सकता, नचुराया जा सकता है.' अब अंग्रेज़ी अखबार दि ट्रिब्यून ने वॉट्सऐप पर एक गुमनामविक्रेता के ऑफर पर एक सर्विस 'खरीदने' का दावा किया है, जो भारत में अब तक बनाए गए1 अरब आधार कार्ड की जानकारी को निर्बाध रूप से मुहैया कराती है.पेटीएम के ज़रिए 500 रुपए का पेमेंट करने के 10 मिनट के अंदर इस रैकेट के एजेंट नेदि ट्रिब्यून के कॉरेसपॉन्डेंट के लिए एक 'गेटवे' बना दिया. फिर उसने लॉगइन आईडी औरपासवर्ड दिया, जिसके ज़रिए आधार का पोर्टल देखा जा सकता है. ऐसे में किसी शख्स नेआधार कार्ड बनवाते समय जो भी जानकारी UIDAI को मुहैया कराई थी, आप वो देख सकते हैं,जैसे नाम, पता, पिन नंबर, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी.दि ट्रिब्यून की रिपोर्टइसके बाद ट्रिब्यून की टीम ने एजेंट को 300 रुपए और दिए, जिसके बदले एजेंट ने एक'सॉफ्टवेयर' उपलब्ध कराया, जिससे आप डीटेल भरकर किसी भी इंसान का आधार कार्ड निकालसकते हैं.जब चंडीगढ़ में UIDAI के अधिकारियों से इस बारे में बात की गई, तो वो ये जानकरभौंचक्के रह गए कि लोगों के पूरे डेटा तक पहुंचा जा सकता है. उन्होंने स्वीकार कियाकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा में बड़ी सेंध है. उन्होंने तुरंत इस मामले को बेंगलुरुमें UIDAI के टेक्निकल कंसल्टेंट्स के पास भेजा. UIDAI के चंडीगढ़ वाले रीजनल सेंटरमें अडिशनल डायरेक्टर-जनरल संजय जिंदल ने कहा,'पंजाब में डायरेक्टर जनरल और मेरे अलावा किसी के भी पास हमारे ऑफीशियल पोर्टल कालॉगइन एक्सेस नहीं है. अगर कोई और ये पोर्टल देखता है, तो ये अवैध है और राष्ट्रीयसुरक्षा में बड़ी सेंध है.'दि ट्रिब्यून की जांच के मुताबिक ये रैकेट एक गुमनाम ग्रुप ने करीब छ: महीने पहलेवॉट्सऐप पर शुरू किया था. इस ग्रुप ने कॉमन सर्विस सेंटर्स स्कीम (CSCS) के तहतइलेक्ट्रॉनिक्स और IT मिनिस्ट्री (ME&IT) द्वारा हायर किए गए करीब तीन लाखविलेज-लेवल एंटरप्राइस (VLE) ऑपरेटर्स को निशाना बवाया. ग्रुप ने इन ऑपरेटर्स कोUIDAI के डेटा को एक्सेस करने का लालच दिया.जिन CSCS ऑपरेटर्स को देशभर में आधार कार्ड बनाने के लिए हायर किया गया था, वो येकाम वापस लिए जाने पर खाली हो गए. डेटा में सेंध लगने के डर से पिछले साल नवंबर मेंइनसे आधार कार्ड बनाने का काम लेकर पोस्ट ऑफिस और चुनिंदा बैंकों को दे दिया गयाथा. ऐसे में अब एक लाख से ज्यादा VLEs पर UIDAI के डेटा में सेंध मारने का शक है.इस सॉफ्टवेयर के एक्सेस के दम पर ये लोग लोगों के आधार कार्ड प्रिंट करने से लेकरदूसरी चीजों से पैसे बना सकते हैं और इससे डेटा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो सकताहै.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:दवा से लेकर दारू तक हर जगह कंपल्सरी होगा आधार कार्ड, तब आप भी यही सोचेंगे!रोज मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने का फोन आता है, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैंसरकार आधार के जो फायदे गिना रही है, उसमें बहुत से नुकसान भी हैं