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पेंशन देने में बैंक ने गड़बड़ी की या फिर OROP के तहत मिल ही नहीं रही थी?

पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल अपनी गांव पंचायत के पहले दलित सरपंच थे.

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पंडित असगर
3 नवंबर 2016 (Updated: 3 नवंबर 2016, 06:31 AM IST)
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एक लंबे अरसे से वन रैंक वन पेंशन की बात हो रही है. मगर सब ढाक के तीन पात की तरह नजर आ रहा है. मौजूदा सेंटर गवर्नमेंट ने ढिंढोरा पीटा कि उनके राज में वन रैंक वन पेंशन लागू कर दिया गया. मगर हुआ क्या? एक पूर्व सैनिक की खुदकुशी. वो भी तब, जब करीब 5 हजार रुपये की गड़बड़ हो रही थी. अगर पूरी तरह से वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के तहत पेंशन दी जाती तो पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल आर्मी वालों को पूरी तरह से पेंशन दिए जाने की मांग को लेकर जान नहीं देते. डिफेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि पेंशन सरकार की तरफ से दी जा रही थी. गड़बड़ी बैंक की कैलकुलेशन में हुई. वहीं रामकिशन ग्रेवाल की फैमिली का कहना है कि जब से वो रिटायर हुए, तब से उन्हें ओआरओपी के तहत कोई पेंशन नहीं मिली. राम किशन को दो बार राष्ट्रपति और एक बार सीओएएस (आर्मी चीफ) से मेडल मिला था.
पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल. हरियाणा के भिवानी में बामला गांव के रहने वाले थे. और वहां की पंचायत के पहले दलित सरपंच थे. वो अपने गांव में लोगों के बीच इतने मकबूल थे कि गांव वालों को यकीन ही नहीं रहा है कि उनके जैसा बुद्धिमान और बहादुर आदमी भी ख़ुदकुशी कर सकता है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक राम किशन ग्रेवाल छठे पे कमीशन और वन रैंक वन पेंशन दोनों के हकदार थे. लेकिन उनको वन रैंक वन पेंशन के हिसाब से पेंशन नहीं मिल रही थी. दूसरी तरफ रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार की तरफ से उन्हें वन रैंक वन पेंशन का लाभ दिया जा रहा था. सरकार की तरफ से कोई खामी नहीं थी. उन्हें पेंशन कम मिल रही थी तो इसकी वजह स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की भिवानी ब्रांच के कैलकुलेशन में हुई गड़बड़ी थी. हरियाणा की इसी ब्रांच में रामकिशन का अकाउंट था. जिस पर गौर किया जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राम किशन की मांग सिर्फ पेंशन में 5 हजार रुपये बढ़कर मिलने की थी. रामकिशन के बेटे जसवंत ने बताया कि वो 2004 में डिफेंस सिक्योरिटी कोर से रिटायर हुए थे, जिसके बाद उन्हें हर महीने 24,999 रुपये की पेंशन मिलती थी. लेकिन वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बाद उनकी पेंशन 30 हजार रुपये हो जानी चाहिए थी. रामकिशन चाहते थे कि उनकी पेंशन में एरियर के साथ छठे-सातवें वेतन आयोग और ओआरओपी के हिसाब से इजाफा हो. 2004 में ही रिटायर होने वाले एक अन्य पूर्व सैनिक पृथ्वी सिंह ने बताया, 'अगर सही से जोड़ा जाए तो हम सभी 30 हजार रुपये की पेंशन पाने के हकदार हैं.'

'जो गड़बड़ियां आ रही हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है'

रामकिशन ग्रेवाल 1966 में टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हुए थे. 1979 तक इस आर्मी में रहे. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 13 साल की सर्विस में वो 6 साल तक ही एक्टिव सर्विस में रहे. इसके बाद वह 1980 में डिफेंस सिक्योरिटी कोर में आ गए, जहां सितंबर 2004 तक काम करते रहे. इस तरह उन्होंने डिफेंस सिक्योरिटी कोर में 24 साल की सर्विस की.

पेंशन के लिए टेरिटोरियल सर्विस में 15 साल की एक्टिव सर्विस जरूरी है. डिफेंस सिक्योरिटी कोर में भी पेंशन के लिए इतना टाइम पीरियड होना चाहिए. जानकारों के मुताबिक रामकिशन ने अगर दोनों ही जगह 15-15 साल सर्विस की होती तो उन्हें दोनों सर्विस के लिए अलग पेंशन मिलती. लेकिन टेरिटोरियल आर्मी में उनकी एक्टिव सर्विस सिर्फ छह साल ही रही, इसलिए उन्हें सिर्फ डिफेंस सिक्योरिटी कोर के लिए पेंशन मिल रही थी. वह इसी में वन रैंक वन पेंशन के भी हकदार थे.

वहीं रक्षामंत्री पर्रिकर ने बुधवार को कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के विकास के लिए समर्पित है और सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के तहत करीब 5 हजार करोड़ रुपये बांटे हैं. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों से खबर है कि 20 लाख 60 हजार पेंशनरों में सिर्फ एक लाख को लाभ देना बाकी रह गया है. बाकी रह गए मामलों में जो मुश्किल आ रही हैं उन्हें सुलझाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है.

'रामकिशन की मानसिक स्थिति क्या थी, इसकी जांच होनी चाहिए'

आर्मी को लेकर मौजूदा सरकार बहुत ही दावे और वादे करती आ रही है. उसी सरकार के फॉरेन मिनिस्टर हैं और फॉर्मर आर्मी चीफ जनरल वी.के. सिंह.  कहते हैं, "उन्होंने खुदकुशी की है. कोई नहीं जानता कि क्या वजह है. ओआरओपी को एक कारण के तौर पर दिखाया जा रहा है. उनकी मानसिक स्थिति क्या थी, हम नहीं जानते. पहले इसकी जांच होने दीजिए. ओआरओपी को राजनीति से ऊपर रखिए." vk singh वीके सिंह के इस बयान को लेकर अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया और कहा, 'वीके सिंह आप पर शर्म आती है. पूर्व सैनिक राम किशन को दो बार राष्ट्रपति और एक बार सीओएएस (आर्मी चीफ) से मेडल मिले. वह एक सम्मानित सैनिक थे.

शहीद का मिले दर्जा, होने लगी ये मांग

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रामकिशन की बीवी किताब कौर ने कहा, 'हमने दिल्ली में रह रहे अपने परिवार के लोगों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी. मेरे पति मृत पड़े थे और परिवार वालों को पीटा जा रहा था.' रामकिशन के पांच बेटे और दो बेटियां हैं. रामकिशन के बड़े बेटे दिलावर हरियाणा पुलिस में हैं और फिलहाल फतेहाबाद में ड्यूटी कर रहे हैं. उनके गांव में करीब 10 हजार लोगों की आबादी है, जिसमें दो पंचायत हैं. अपनी पंचायत में वह वह 1200 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीते थे. उनकी बीवी कौर ने कहा, 'गांव के लोगों को वो इतने पसंद थे कि जीतने के बाद लोगों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया था. गांव में खूब मिठाई बांटी गई थी और पटाखे जलाए गए थे. अब वो नहीं रहे. मैं आशा करती हूं कि सरकार उन्हें शहीद का दर्जा देगी क्योंकि उन्होंने खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए अपनी जान दी है.''

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