एक लंबे अरसे से वन रैंक वन पेंशन की बात हो रही है. मगर सब ढाक के तीन पात की तरहनजर आ रहा है. मौजूदा सेंटर गवर्नमेंट ने ढिंढोरा पीटा कि उनके राज में वन रैंक वनपेंशन लागू कर दिया गया. मगर हुआ क्या? एक पूर्व सैनिक की खुदकुशी. वो भी तब, जबकरीब 5 हजार रुपये की गड़बड़ हो रही थी. अगर पूरी तरह से वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी)के तहत पेंशन दी जाती तो पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल आर्मी वालों को पूरी तरह सेपेंशन दिए जाने की मांग को लेकर जान नहीं देते. डिफेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों काकहना है कि पेंशन सरकार की तरफ से दी जा रही थी. गड़बड़ी बैंक की कैलकुलेशन में हुई.वहीं रामकिशन ग्रेवाल की फैमिली का कहना है कि जब से वो रिटायर हुए, तब से उन्हेंओआरओपी के तहत कोई पेंशन नहीं मिली. राम किशन को दो बार राष्ट्रपति और एक बारसीओएएस (आर्मी चीफ) से मेडल मिला था. पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल. हरियाणा केभिवानी में बामला गांव के रहने वाले थे. और वहां की पंचायत के पहले दलित सरपंच थे.वो अपने गांव में लोगों के बीच इतने मकबूल थे कि गांव वालों को यकीन ही नहीं रहा हैकि उनके जैसा बुद्धिमान और बहादुर आदमी भी ख़ुदकुशी कर सकता है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया केमुताबिक राम किशन ग्रेवाल छठे पे कमीशन और वन रैंक वन पेंशन दोनों के हकदार थे.लेकिन उनको वन रैंक वन पेंशन के हिसाब से पेंशन नहीं मिल रही थी. दूसरी तरफ रक्षामंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार की तरफ से उन्हें वन रैंक वन पेंशन का लाभदिया जा रहा था. सरकार की तरफ से कोई खामी नहीं थी. उन्हें पेंशन कम मिल रही थी तोइसकी वजह स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की भिवानी ब्रांच के कैलकुलेशन में हुई गड़बड़ी थी.हरियाणा की इसी ब्रांच में रामकिशन का अकाउंट था. जिस पर गौर किया जा रहा है.इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राम किशन की मांग सिर्फ पेंशन में 5 हजार रुपये बढ़करमिलने की थी. रामकिशन के बेटे जसवंत ने बताया कि वो 2004 में डिफेंस सिक्योरिटी कोरसे रिटायर हुए थे, जिसके बाद उन्हें हर महीने 24,999 रुपये की पेंशन मिलती थी.लेकिन वन रैंक वन पेंशन लागू होने के बाद उनकी पेंशन 30 हजार रुपये हो जानी चाहिएथी. रामकिशन चाहते थे कि उनकी पेंशन में एरियर के साथ छठे-सातवें वेतन आयोग औरओआरओपी के हिसाब से इजाफा हो. 2004 में ही रिटायर होने वाले एक अन्य पूर्व सैनिकपृथ्वी सिंह ने बताया, 'अगर सही से जोड़ा जाए तो हम सभी 30 हजार रुपये की पेंशनपाने के हकदार हैं.''जो गड़बड़ियां आ रही हैं, उन्हें सुधारा जा रहा है'रामकिशन ग्रेवाल 1966 में टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हुए थे. 1979 तक इस आर्मी मेंरहे. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 13 साल की सर्विस में वो 6 साल तक हीएक्टिव सर्विस में रहे. इसके बाद वह 1980 में डिफेंस सिक्योरिटी कोर में आ गए, जहांसितंबर 2004 तक काम करते रहे. इस तरह उन्होंने डिफेंस सिक्योरिटी कोर में 24 साल कीसर्विस की.पेंशन के लिए टेरिटोरियल सर्विस में 15 साल की एक्टिव सर्विस जरूरी है. डिफेंससिक्योरिटी कोर में भी पेंशन के लिए इतना टाइम पीरियड होना चाहिए. जानकारों केमुताबिक रामकिशन ने अगर दोनों ही जगह 15-15 साल सर्विस की होती तो उन्हें दोनोंसर्विस के लिए अलग पेंशन मिलती. लेकिन टेरिटोरियल आर्मी में उनकी एक्टिव सर्विससिर्फ छह साल ही रही, इसलिए उन्हें सिर्फ डिफेंस सिक्योरिटी कोर के लिए पेंशन मिलरही थी. वह इसी में वन रैंक वन पेंशन के भी हकदार थे.वहीं रक्षामंत्री पर्रिकर ने बुधवार को कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के विकास के लिएसमर्पित है और सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के तहत करीब 5 हजार करोड़ रुपये बांटेहैं. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों से खबर है कि 20 लाख 60 हजार पेंशनरों में सिर्फ एकलाख को लाभ देना बाकी रह गया है. बाकी रह गए मामलों में जो मुश्किल आ रही हैंउन्हें सुलझाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है.'रामकिशन की मानसिक स्थिति क्या थी, इसकी जांच होनी चाहिए'आर्मी को लेकर मौजूदा सरकार बहुत ही दावे और वादे करती आ रही है. उसी सरकार केफॉरेन मिनिस्टर हैं और फॉर्मर आर्मी चीफ जनरल वी.के. सिंह. कहते हैं, "उन्होंनेखुदकुशी की है. कोई नहीं जानता कि क्या वजह है. ओआरओपी को एक कारण के तौर पर दिखायाजा रहा है. उनकी मानसिक स्थिति क्या थी, हम नहीं जानते. पहले इसकी जांच होने दीजिए.ओआरओपी को राजनीति से ऊपर रखिए." वीके सिंह के इस बयान को लेकर अरविंद केजरीवाल नेट्वीट किया और कहा, 'वीके सिंह आप पर शर्म आती है. पूर्व सैनिक राम किशन को दो बारराष्ट्रपति और एक बार सीओएएस (आर्मी चीफ) से मेडल मिले. वह एक सम्मानित सैनिक थे.शहीद का मिले दर्जा, होने लगी ये मांगइंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रामकिशन की बीवी किताब कौर ने कहा, 'हमने दिल्लीमें रह रहे अपने परिवार के लोगों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी.मेरे पति मृत पड़े थे और परिवार वालों को पीटा जा रहा था.' रामकिशन के पांच बेटे औरदो बेटियां हैं. रामकिशन के बड़े बेटे दिलावर हरियाणा पुलिस में हैं और फिलहालफतेहाबाद में ड्यूटी कर रहे हैं. उनके गांव में करीब 10 हजार लोगों की आबादी है,जिसमें दो पंचायत हैं. अपनी पंचायत में वह वह 1200 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन सेजीते थे. उनकी बीवी कौर ने कहा, 'गांव के लोगों को वो इतने पसंद थे कि जीतने के बादलोगों ने उन्हें कंधे पर उठा लिया था. गांव में खूब मिठाई बांटी गई थी और पटाखेजलाए गए थे. अब वो नहीं रहे. मैं आशा करती हूं कि सरकार उन्हें शहीद का दर्जा देगीक्योंकि उन्होंने खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए अपनी जान दी है.''--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंOROP के लिए सुसाइड करने वाले फ़ौजी ने जहर खाने के पांच मिनट बाद किया था आखिरी कॉलराहुल गांधी, फौज के साथ सबसे बड़ा धोखा आपके मम्मी, पापा और दादी ने किया है