स्टिंग ऑपरेशन: कॉपी में कुछ न लिखो, बस नोट चिपका दो पास हो जाओगे
हर कॉलेज का अलग रेट है, प्रिंसिपल खुद बच्चों की कॉपी लिखते हैं. मैडम किसी को थर्ड डिवीजन नहीं आने देतीं.
फोटो - thelallantop
पिछले कुछ दिनों से बिहार 12वीं की परीक्षा को लेकर खबरों में हैं. कभी टॉपर्स को लेकर तो कभी टॉपर्स बनाने के पीछे की कहानी को लेकर. सारे भिड़े पड़े हैं. कोई नितीश की ऐसी-तैसी कर रहा है तो कोई वहां के शिक्षा मंत्री की. न्यूज चैनल्स
पानी-पिसान लेकर चढ़ बैठे हैं. आज तक न्यूज चैनल ने बिहार टॉपर्स से जुड़ा एक स्टिंग आपरेशन किया. चुना बिहार के वैशाली को. स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम भेजकर वहां के कॉलेजों का स्टिंग किया. ये जरूरी भी था. बिहार के साइंस टॉपर को आवर्त सारणी का सबसे एक्टिव एलीमेंट कौन सा है ये नहीं पता. वहीं आर्ट्स की टॉपर के लिए पॉलिटिकल साइंस का मतलब खाना बनाने से है. आज तक की टीम एजेंट बनकर बिहार के चार कॉलेजों में गई. आइए आपको बिहार में टॉपर्स होने और बनाने की रेसिपी से दो-चार कराए.
1. संत कबीर महंत राम दयाल दास महाविद्यालय
वैशाली जिले में कॉलेज है. न्यूज चैनल की टीम मिली कॉलेज के टीचर और प्रिंसिपल के भाई राजेश्वर राय से. और कहा कि उनके पास दिल्ली और हरियाणा के कुछ स्टूडेंट हैं. उन्हें फर्स्ट डिविजन से 12वीं की परीक्षा पास कराना है. वो भी बिना एक्जाम दिए.
रिपोर्टर के इतना कहने पर राजेश्वर राय उनसे पूछ बैठे, पास कराने के लिए स्कॉलर आप बैठाएंगे या हम. सीधे शब्दों में समझ लो भइया, किताबी कीड़ो को स्कॉलर कहते हैं. रिपोर्टर राजेश्वर को ही स्कॉलर अरेंज करने की बात कहता है. वो उन्हें भरोसा दिलाता है कि उसका जुगाड़ भी हो जाएगा. हम पटना से अरेंज करा देगें. उसके बाद एडमिशन से लेकर रजिस्ट्रेशन और फॉर्म भरने तक का सारा प्रोसेस एक-एक कर बता देता है. साथ में स्कॉलर का रेट भी बताता है.
टॉप कराने के लिए राजेश्वर ने एक कैंडिडेट का 12 हजार रुपये मांगा. इतना शरीफ राजा हरिशचंद्र के अलावा ये ही निकला. बता दिया कि उन 12 हजार में से 10 हजार स्कॉलर को देगा और 2 हजार खुद की जेब में डालेगा. भाई साब ये तो लड़के का केस था. लड़की अगर स्कॉलर बैठेगी तो रेट 18 से 20 हजार होगा. मतलब एक्जाम पास नहीं बियाह कराने के लिए मांग रहे हो. राजेश्वर का कहना है कि बिहार में लड़कियां बहुत कम पढ़ी-लिखी है. इसलिए स्कॉलर मुश्किल से मिलती है. कॉमर्स और आर्ट्स के लिए टॉपर बनाने का रेट केवल 4500 रुपये है. इन सब के अलावा जनाब ने भरोसा दिलाया कि बाहर से आए स्टूडेंट्स को माइग्रेशन सर्टिफिकेट दिलाएंगे, एक्जाम सेंटर में चोरी-चकारी कराएंगे और फर्स्ट डिवीजन से पास भी. लेओ भइया पूरे 25 हजार रुपये में टॉपर तैयार है.
2. संजय सिंह +2 उच्च माध्यमिक विद्यालय
यहां कॉलेज की प्रिंसिपल और प्रबंधक सुनीता सिंह ने बच्चों को टॉपर बनाने का ठेका लिया हुआ है.
ये मइडम ने तो हद कर दिया. 60 हजार मांग रही है. अतना महंगा. 60 हजार में फर्स्ट डिवीजन और 50 हजार में सेकेंड डिवीजन पास कराने के. थर्ड डिवीजन तो ये किसी को कराती ही नहीं हैं. रिपोर्टर ने बार्गेन करने की कोशिश की तो साफ मना कर दिया. रिपोर्टर मान गया तो कहती हैं कि ये बात वो किसी को न बताए. मैडम का कहना है कि बच्चा फर्स्ट और सेकेंड ही आएगा. आखिरकार स्कूल की इज्जत का सवाल है. अगर रिजल्ट अच्छा रहा तो आपका हमारा लंबे समय का रिश्ता होगा. कल को आप फिर आएंगे. मतलब मैडम इस काम को पूरी तन्मयता के साथ कर रही हैं.
3. राम विदेशी सिंह महाविद्यालय
कॉलेज के प्रिंसिपल है एन कुमार. ये तो सबसे तेज निकले. रिपोर्टर को कह दिया कि कागज पत्तर लेकर कल आ जाओ. सारा काम करा देगें. पर रिस्क नहीं लेगें. जितना बन पड़ेगा उतना सहयोग करेगें. प्रिंसिपल ने 1 लाख रुपये में स्टूडेंट को फर्स्ट डिवीडन से पास कराने की बात कही. और पास होने के कुछ टिप्स भी दिए. कुमार ने कहा कि स्टूडेंट का पेपर भरना जरूरी है. चाहे उसे गाने से भरो या फिर क्वेशचन पेपर को कॉपी कर के. ये दावा करते हैं कि कॉपी भरी होगी तो नंबर छप्पड़ फाड़ कर मिलेगें. एन कुमार का ब्रह्मास्त्र के बारे में जानोगे तो दिमाग हिल जाएगा. हर कॉपी में 500 के हरे नोट रखो. जहां चेक होने जाएगी कॉपी वहां से हम सेटिंग कर एक स्टूडेंट का रेट फिक्स कर लेगें. अगर कोई दिक्कत हुई तो हम देख लेगें. राम विदेशी सिंह महाविद्यालय के प्रिंसिपल के मुताबिक 2500-3000 में आप टॉपर बन सकते हैं.
4. वासुदेव सिंह इंटर कॉलेज
यहां के प्रिंसिपल हैं चंद्रभूषण शर्मा. ये तो टॉपर बनाने के उस्ताद निकले. ये दावा करते हैं कि सेंटर खरीद कर स्टूडेंट्स को टॉप कराते हैं. कुछ आला अफसरों से सेटिंग कर सारा कुछ मैनेज कर अपना मनपसंद सेंटर हथिया लेते हैं. कहने का मतलब सेंटर अपना हो गया तो वहां के स्टाफ भी. और फिर स्टूडेंट की बल्ले-बल्ले. लेकिन पिछले साल शर्मा जी की लग गई थी. पैसे देने के बाद भी सेंटर में चोरी चली नहीं. इस साल फिर से दावा कर रहे हैं कि सब कुछ इनके प्लान के हिसाब से चलेगा. कॉपियों की अदला-बदली से लेकर चोरी-चकारी सब.
5. शंभु राय इंटर कॉलेज
इसने भी टॉपर बनाने का ठेका लिया हुआ है. इसके प्रिंसिपल हैं शशिरंजन. ये स्टिंग टीम को बताते हैं कि ग्रेजुएशन में ये लोग खुद बच्चों के पेपर देते थे. और कुछ को पैसे देकर पटना से बुलाते थे. हजार-पांच सौ में पूरा कॉपी लिखते थे.
ये पहली बार नहीं है जब बिहार में बोर्ड की परीक्षा में इतनी धांधली हुई है. ये खेल हर बार का है. जब भी ऐसा कुछ होता है सरकार दो-चार गिरफ्तारियां करा देती है. जांच के आदेश देती है और कमिटी बना कर भिड़ा देती है उनको जांच-पड़ताल के लिए. पर होता कुछ नहीं. इस स्टिंग से कितना सुधरेगा बिहार और वहां की शिक्षा व्यवस्था उसका पता नहीं.
https://www.youtube.com/watch?v=tN5dEfHnK_U