ताज़े मामले से शुरू करते हैं. तारीख 16 जनवरी की. दिल्ली का आनंद विहार रेलवेस्टेशन. शाम को 16 साल के यश कुमार और 14 साल के शुभम रेलवे लाइन पर पहुंचे. 400रुपए दिहाड़ी किराए पर DSLR लेकर. उद्देश्य एक था. चिड़िया की आंख की तरह नजरसेल्फी पर थी. खींच रहे थे तभी ट्रेन ने उड़ा दिया. अब खानदान में चिल्लगोहार मचीहै. इसी तरह बीते महीने सर गंगाराम अस्पताल में तीन अजूबे केस आए. 'सेल्फीसाइड' कीबीमारी से ग्रस्त. ये लोग इलाज के लिए आए थे. अच्छा हुआ मरने से पहले इनको इलाजकराने की अक्ल आ गई. अब थोड़े से आंकड़े दे देते हैं. पकाऊ होंगे लेकिन आंखें चौड़ीकरने वाले. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोशिएशन ने आंकड़े दिए हैं कि 60 परसेंट महिलाएंसेल्फीसाइड का शिकार हैं, और उनको पता भी नहीं. और सुनो. 2015 की रिसर्च आई थीजिसमें कहा गया कि इस साल शार्क के हमलों से ज्यादा मौतें सेल्फी की वजह से हुईं.बीते साल के आंकड़े बताते हैं कि सेल्फी से हुई मौतों में इंडिया नंबर वन है. गूगलन्यूज आर्काइव के आंकड़े से दो साल में 19 मौतें सेल्फी की वजह से हुईं. आंकड़ों सेबोर हुए तो आदतों के बारे में जान लो. ट्रेन की पटरी, ताज होटल, एयरपोर्ट, बेड,बाथरूम, शादी, बाइक कार की सीट पर, कोबरा के साथ, गधे और शेर के साथ, पहाड़ों कीऊंचाई से, कुएं की गहराई. बर्फ में नंगे बदन, पानी से लेकर दारू पीते. मतलब कोईजगह, पोश्चर, अभी तक बचा नहीं है जिसमें सेल्फी न ली गई हो. कभी कभी तो रंग मेंनहाए हुए सेल्फी भी ली जाती है जिसमें कोई पहचाने भी नहीं. कभी किसी सेलिब्रिटी केसाथ सेल्फी होती है जिस सेलिब्रिटी को कोई जानता भी नहीं. तो साहिबान ये हाल हैसेल्फी के नशे का. मॉडर्नता एडिक्शन कहने से आती है. आप शब्द छोड़ो भावनाओं परध्यान दो. अब एक बात बताओ. दुनिया में सबसे बुरा क्या है? बाप के कंधे पर बेटे काजनाज़ा? उससे भी बुरा कुछ है. अगर वो बेटा सेल्फी लेते हुए मरा हो. ये एके हंगल नहींबताएंगे क्योंकि वो इस दुनिया में हैं नहीं. हम बता रहे हैं. मतलब एक बात बताओ यार.जिस डैम पर जाकर सेल्फी लेने की सोची तुमने वो डैम फ़ूल भी न सोचे. बहादुरी औरबेवकूफी के बीच में जो लक्ष्मण रेखा होती है उसको कब पार कर गए तुम, पता ही नहींचला. डैम पर जाकर नीचे चले गए, फिर ऊपर. पता नहीं स्वर्ग गए कि नर्क. सेल्फीस्टिक्स ने काम आसान कर दिया है लेकिन अभी वैसी क्रीम या थेरेपी नहीं आई हैं जिनसेमुंह परमानेंट पाउट नुमा रह सके. अगर आ जाती तो उसकी बिक्री जियो सिम से ज्यादाहोती, लिख के रख लो. अपने मुंह के साथ इतने अत्याचार शास्त्रीय गायक भी नहीं करताहै जितना ये सेल्फी लेने वाले कर जाते हैं. फिर पेड़ पर चढ़कर और दीवार पर लटककरसेल्फी लोगे तो पाउट वाला मुंह तो टूटेगा है, जान जाने में भी कसर नहीं रहेगी.https://www.youtube.com/watch?v=A_aPgPq6hMM एक बात बताओ यार. बरसों से सुनते आरहे हो कि गांव के लोग सुबह लोटा लेकर टट्टी 'लाइन' पर जाते हैं. ट्रेनों से निकलनेवाली टट्टी लाइन पर जाती है. इतनी टट्टी के बीच में खड़े होकर सेल्फी खींचने कारोमांच क्या है दोस्त? उसमें पाउट बनाने की जरूरत ही क्या होगी. नाक अपने आप सिकुड़जाती होगी. अगर ट्रेन तुमको टट्टी में मिलाकर गुजर जाती है तो न ट्रेन की गलती है नटट्टी की. ये सेल्फी की दीवानगी है. अति हर चीज़ की खतरनाक होती है. औकात से ज्यादासेल्फी जानलेवा है. यार सेल्फी लेते हुए मर जाना, इससे बुरा कुछ हो ही नहीं सकता.सोचो पैदा ही क्यों हुए थे. अगर सेल्फी लेते हुए कोई मर गया तो मां बाप को, घरवालों को अफसोस होता है. दुख का पहाड़ टूट पड़ता है. जो आंसू बहते हैं उनको सेल्फीके नशेड़ी डिजर्व नहीं करते. अगर सेल्फी से मौतें ऐसे ही जारी रहीं तो मोबाइल केफ्रंट कैमरे के साथ सिगरेट के पैकेट जैसा नोट लिखा आएगा. "सेल्फी जानलेवा है. न लेंन लेने दें."--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: सेल्फी विद कोबरा इंस्टाग्राम पर, फोटो खींचक जेल में फेसबुक पर चेंपी'सेल्फी विद कोबरा', डसा लिए 25 हजार