घर-दफ़्तर से बाहर निकलो, बुद्ध की साढ़े-साती चल रही है
एक गजब घटना होने वाली है.शाम साढ़े चार बजे से. ऊपर आसमान में. दूरबीन का जुगाड़ करो, फ़िल्टर लगाओ और देखो.
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Image: NASA
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हम सभी पिच्चर हॉल गए हैं. हॉल में एक हरकत हम सभी ने की है. नहीं नहीं, वो वाली नहीं. उसके बारे में यहां बात नहीं करेंगे. कभी घर पे आओ. यहां दूसरी बात हो रही है. हम बात कर रहे हैं उस छोटी सी खिड़की के सामने हाथ लगाने की जिसमें से रोशनी बाहर आ रही होती है. उसके सामने हाथ लगाते ही आगे स्क्रीन पर काला-काला हाथ बनकर आ जाता था. उस खिड़की में प्रोजेक्टर होता था.
कुछ ऐसा ही हो रहा है अभी. एक बहुत बड़ी स्क्रीन पर. एक बहुत बड़े प्रोजेक्टर के सामने.
सभी प्लैनेट्स सूरज के चारों ओर चक्कर लगा रहे होते हैं. ये तो बचपन में ही पढ़ लिया था. साथ ही उनके घूमने के रास्ते अलग-अलग होते हैं. इन रास्तों पर घूमते-घूमते प्लैनेट्स अक्सर एक दूसरे के सामने आ जाया करते हैं. जब सामने आयेंगे तो ज़ाहिर सी बात है कि वो दिखेंगे. अब फ़र्ज़ कीजिये कि हमारे सामने एक सूरज है. जो प्रोजेक्टर का काम कर रहा है. फिर सूरज और हमारे बीच में घूमते-घूमते एक प्लैनेट आ जाये. तो क्या होगा? हमें उस प्लैनेट के आकार का एक काला धब्बा दिखेगा. ज़ाहिर सी बात है. क्यूंकि वो प्लैनेट सूरज से हम तक आने वाली किरणों को रोक रहा होगा. इसलिए उतनी जगह पर हमें अंधेरा सा दिखाई देगा. हालांकि सूरज के बड़े आकार और उसकी फ़ैली हुई रोशनी के कारण हमें नंगी आंखों से ऐसा होता हुआ नहीं दिखता है.
तो बस ऐसा ही होने वाला है. थोड़ी ही देर में. बुद्ध ग्रह सूरज के चारों ओर घूमता हुआ इस वक़्त पृथ्वी और सूरज के बीच में आ पहुंचेगा. और ऐसे में अगर टेलिस्कोप या सन-फ़िल्टर से लैस दूरबीनों से देखा जाए तो सूरज की सतह पर एक काला धब्बा देखा जा सकेगा. बुद्ध को कुल सूरज से इस पार से उस पार निकलने में साढ़े 7 घंटे लगेंगे. ऐसे में ये काला धब्बा साढ़े सात घंटों तक देखा जा सकेगा.
ये घटना हज़ार सालों में महज़ 13 बार होती है. पिछली बार 2006 में हुई थी. इंडिया में ये घटना शाम साढ़े चार बजे से शुरू होगी.
इस घटना से जुड़ा हुआ एक वीडियो, NASA ने पोस्ट किया है. देखें:
https://www.youtube.com/watch?v=IEkkCaBTgZ8

