भाजपा. भारत की सबसे बड़ी पार्टी. केंद्र में सरकार इनकी. 19 राज्यों में या तोअपने बूते या सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा. लेकिन पार्टी फिर भी एक छोटे से राज्यमें चुनाव में उतरने का मन नहीं बना पा रही है. भाजपा ने नागालैंड में विधानसभाचुनाव के बायकॉट का फैसला किया है. भाजपा राज्य में गठबंधन सरकार का हिस्सा थी.भाजपा ऐसा करने वाली अकेली पार्टी नहीं है. राज्य की सबसे बड़ी पार्टी नागा पीपल्सफ्रंट और कांग्रेस समेत कुल 11 पार्टियां 27 फरवरी को होने वाले चुनावों केबहिष्कार में शामिल हैं. इन सभी पार्टियों ने 29 जनवरी को कोर कमिटी ऑफ नागालैंडट्राइबल होहोज़ एंड सिविल ऑर्गनाइज़ेशन्स (CCNTHCO) और 7 नागा गुटों के साथ कोहिमाके होटल जपफु में एक शपथपत्र पर दस्तखत किए. इसके मुताबिक ये पार्टियां न टिकटबांटेंगी, न पर्चा भरेंगी. नागा होहो नागा कबीलों की शीर्ष संस्था है और इसकानागालैंड में बहुत प्रभाव है.नागालैंड में इससे पहले भी कई बार पूरे राज्य में चुनाव बहिष्कार की घोषणा हो चुकीहै. पिछले दिनों निकाय चुनावों का बहिष्कार हुआ था.कोई चुनाव लड़ना क्यों नहीं चाहता?नागालैंड में कुछ अलगाववादी गुट हैं, जो भारत से अलग होने के लिए संघर्ष कर रहेहैं. फिर कुछ गुट हैं, जो भारत के साथ रहना तो चाहते हैं, लेकिन ग्रेटर नागालैंड(जिसमें आस-पास के राज्यों के इलाके भी आते हैं) चाहते हैं. लेकिन पड़ोसी राज्यग्रेटर नागालैंड के लिए ज़मीन देना नहीं चाहते. इस सब को लेकर लंबे समय से लड़ाई चलरही है. केंद्र नागा गुटों से बात कर रहा है, कुछ समझौते भी हुए हैं, लेकिन समझौतेकी बातें आम लोग नहीं जानते. नागा गुटों का इस बात पर ज़ोर है कि पहले एक ठोस नतीजेपर पहुंचा जाए, उसके बाद ही चुनाव हों.एक विधानसभा, कई सरकारेंनागा होहो की मांग तब समझ आती है, जब हम नागालैंड की स्थितियों पर गौर करते हैं.नागालैंड की राज्य सरकार के अलावा वहां एक नागा गुटों की 'सरकार' भी है, जो कैंपहेब्रॉन से काम करती है. कुछ और अंडरग्राउंड सरकारें भी हैं. ये सब टैक्स वसूलतीहैं और अपने नियम लागू करती हैं. इसलिए राज्य में किसी एक नतीजे पर पहुंचने की मांगज़ोरों से की जाती रही है.नागा होहो ने अपनी बात मनवाने के लिए भावनात्मक अपील वाला कार्ड खेल दिया है. वो कहरहे हैं कि राज्य में जो भी (राजनैतिक पार्टियां और अलगाववादी गुट) उनके निर्णय केखिलाफ जाएगा, वो 'नागा विरोधी' करार दिया जाएगा. पूर्वोत्तर में जातीय स्वाभिमानबहुत मायने रखता है. इसलिए किसी के लिए भी 'नागा विरोधी' कहलाने की शर्त पर चुनावमें उतरना आसान नहीं है.प्रधानमंत्री मोदी के साथ नागा होहो के सदस्य (2015, फोटोःप्रधानमंत्री कार्यालय)भाजपा VS भाजपाभाजपा चुनाव बहिष्कार से पहले बुलाई गई दो सर्वदलीय बैठकों में शामिल नहीं हुई थी.लेकिन 29 तारीख को जारी हुए शपथपत्र पर नागालैंड भाजपा की राज्य कार्यकारिणी केसदस्य और पूर्व मंत्री खेटो सेमा ने दस्तखत किए हैं. लेकिन भाजपा के पूर्वोत्तरप्रभारी राम माधव ने एक अखबार से ये कहा कि राज्य भाजपा ने किसी को भी किसी कागज़पर दस्तखत करने को अधिकृत नहीं किया है.नागा गुट कह रहे हैं कि खेटो सेमा ने राज्य भाजपा अध्यक्ष और गृहराज्यमंत्री कोजानकारी में रखकर ही ये कदम उठाया है. CCNTHCO के संयोजक थेजा थेरिएह तो यहां तक कहरहे हैं कि जब कोर कमिटी के सदस्य चुनाव बहिष्कार के लिए समर्थन मांगने NPF अध्यक्षशुरोज़िले से मिलने गए थे, तब केंद्र में गृहराज्य मंत्री किरण रिजुजू नागालैंडसीएम टीआर ज़ीलियांग के घर पर मौजूद थे. रिजुजू भाजपा के लिए नागालैंड चुनावप्रभारी हैं.टीआर ज़ीलियांग और अमित शाह. भाजपा विधानसबा में ज़ीलियांग की NPF सरकार के साथ है.(फोटोःपीटीआई)भाजपा के चुनाव लड़ने, न लड़ने से फर्क क्या पड़ता है?बहुत. भाजपा के फिलहाल चार विधायक हैं विधानसभा में. लेकिन अगर वो सभी सीटों सेपर्चा भर दे, तो वो कई सीटें इसलिए जीत जाएगी क्योंकि उसे कोई मुकाबला मिलेगा हीनहीं. ये एक तरह से 1998 का दोहराव होगा. तब भी नागा होहो और नेशनल सोशलिस्टकाउंसिल ऑफ नागालैंड - ईसाक मुईवा (NSCN-IM) ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था.लेकिन तब कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था और 53 सीटें लाकर सरकार बना ली थी. NPF कीमान्यता रद्द हो गई थी और उसका चुनाव चिह्न वापस ले लिया गया था. इसीलिए चुनावबहिष्कार में सभी का शामिल होना, नागा होहो के लिए बड़ा मसला है.शपथपत्र के बाद धमकी की बारी हैनागा होहो अपील की भाषा में बात करता है. लेकिन सभी नागा गुट ऐसे नहीं हैं.उग्रवादी गुट NSCN -IM ने राज्य की पार्टियों को धमकी दे दी है कि विधानसभा चुनावसे नागा शांति वार्ता पर असर पड़ेगा इसलिए वो चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा न लें.नागा होहो भी 1 फरवरी से राज्यव्यापी बंद का ऐलान कर दिया है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःनागालैंड में चल रहे सियासी घमासान के पीछे इस महिला का हाथ हैनागालैंड में तख्तापलट हो गया है, आपको पता चला?नॉर्थ-ईस्ट के युवाओं में इतना फेमस क्यों है कोरियन कल्चर?एसएस खापलांग: जिसने अपने दोस्त पर ही करवा दिया था जानलेवा हमलाइन्हें औरतों के आरक्षण से दिक्कत है, सरकार को धमकी दी हैVideo:हवाई सफर की 7 गलतफहमियां जो हर किसी के दिमाग में आती हैं