मान्यताओं के अनुसार कैलाश पर्वत भगवान शिव का घर है. इस लिहाज़ से हिंदुओं के लिएएक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल भी हुआ. लेकिन यहां बात कैलाश की नहीं, 'ऊं पर्वत' की होरही है. कैलाश-मानसरोवर यात्रा के दौरान आखिरी भारतीय पड़ाव नाबीढ़ांग आता है, जो14,000 फीट की उंचाई पर है. यहां से 'ऊं पर्वत' दिखाई पड़ता है.कैलाश-मानसरोवर यात्रा के रास्ते में पड़ता है ऊं पर्वत.ऊं पर्वत नेपाल के दरलुचा और भारत के पिठौरागढ़ जिले (उत्तराखंड) में पड़ता है. इसपहाड़ का ये नाम इसलिए पड़ा कि जून से लेकर नवंबर तक जब बर्फ कुछ छंटती है, तो इसपर बर्फ से 'ऊं' का शेप बन जाता है. लगातार 6 महीने नज़र आने के बाद पूरापहाड़ ताजी बर्फबारी में ढंक जाता है और ऊं की आकृति गायब हो जाती है.बर्फबारी के बाद ढंकी ऊं की आकृति.लेकिन इसका नज़र आना बुरी खबर क्यों है?दिक्कत ये है कि हर साल जून से नवंबर के बीच नज़र आने वाली ये आकृति इस साल जनवरीसे ही नज़र आने लगी है. कारण है ग्लोबल वॉर्मिंग. जो बर्फ पहले जून में पिघलनी शुरूहोती थी, इस साल जनवरी से ही पिघलने लगी. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, येजानकारी इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आइटीबीपी) के बरेली रेंज के डीआईजी एपीएसनिंबाडिया ने दी. निंबाडिया हेलिकॉप्टर से चीन बॉर्डर का निरीक्षण करने गए थे. तब19,000 हज़ार फीट की ऊंचाई से ये आकृति उनकी नज़र में आ गई.ये आकृति नजर जून से नज़र आती है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इस बार समय सेपहले दिखाई दे रही है.ग्लोबल वॉर्मिंग हमारे समय का सबसे भयानक सच है. धरती का तापमान यूं ही बढ़ता रहातो एक दिन ऊं की ये आकृति पूरी तरह गायब हो जाएगी. तब बस नंगा पहाड़ बचेगा, जिसकेबारे में सुनाने को हमारे पास सिर्फ एक दुखद किस्सा होगा.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:मिया माल्कोवा की 'God, Sex and Truth' थिएटर में नहीं, यहां रिलीज़ होगीहैलमेट पहनना कितना जरूरी है, अब शोएब मलिक से बेहतर कोई नहीं जानताअंगरेजी में टाइटल होता, अप क्लोज एंड पर्सनल विद अनुराग कश्यपथंडरबोल्ट: सबसे जांबाज मिलिट्री ऑपरेशन, जिसमें बेंजामिन नेतन्याहू के भाई शहीदहुए थे--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें: 6 चीजें, जो आपको भूलकर भी गूगल पर सर्च नहीं करनी चाहिए