नोट बदले जा रहे हैं. नए नोट भी दिए जा रहे हैं. लोग दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.भीड़ भड़क्का, धक्का मुक्की इत्यादि इत्यादि. कहीं एटीएम में पैसे खतम हुए जा रहे हैंतो कहीं बैंक में नोट खतम हुए जा रहे हैं. हफिंग्टन पोस्ट तो कह रहा है इस मसले कीवजह से 50 के आस पास लोग मर चुके हैं. लेकिन एक समस्या है जिसकी बात बहुत कम की जारही है. और असल में मामला ये है कि उसकी ओर ध्यान ही नहीं जा रहा है. जब तक जाता हैतब तक टाइम निकल जाता है. दरअसल बैंकों में कई लोग पुरानी नोट्स जमा करवा रहे हैं.अब दिक्कत ये है कि ये नोट्स काफ़ी समय से लोगों की तिजोरियों में बंद थे. इन नोटोंमें फंगस लग चुका है. इसके साथ ही वो ऐसे इन्फेक्शन्स लेकर चल रही हैं जिनसे इंसानीशरीर को काफी नुकसान पहुंच सकता है. और ये इन्फेक्शन्स बैक्टीरिया से फैलते हैं. जोदिखाई नहीं देते. बस, वो इन्फेक्शन फैलता जाता है. जब तक समझ में आता है, आदमीबीमार पड़ चुका होता है. यही बैंक कर्मचारियों के साथ हो रहा है. बैंक कर्मचारीस्किन इन्फेक्शन से लेकर सरदी-ज़ुखाम लेकर घूम रहे हैं. एक आदमी से दूसरे आदमी मेंये बीमारियां फैल रही हैं. हालत ये है कि बैंक में भीड़ होने पर ये बीमारियांग्राहकों को भी मिल रही हैं. नए नोटों के साथ. एकदम मुफ़्त. इलाहबाद बैंक की कैशियरगरिमा ने बताया कि वो दस तारीख तक बिल्कुल ठीक थीं. लेकिन जैसे जैसे बैंक में कैशबढ़ता गया, उनकी स्किन इरिटेशन की समस्या उसी अनुपात में बढ़ती गयी. जबकि इससे पहलेउन्हें ऐसी कोई भी समस्या नहीं थी. जब उन्होंने अपना मर्ज डॉक्टर को दिखाया तब येबात सामने आयी. इसी बैंक के सीनियर मैनेजर प्रदीप कुमार के मुताबिक ये सच है और वोभी इन्फेक्शन में फंस चुके हैं. बैंक स्टाफ ये भी कह रहा है कि बैंक में इतना कैशआया हुआ है कि उसे पहले हाथों से गिना जाता है फिर मशीन से. इस दौरान सभी नोटें तेज़हवा के कॉन्टैक्ट में आती हैं. जिससे बैक्टीरिया हवा में शामिल हो जाता है और सभीतक पहुंच जाता है. कई नोटों के बंडल से तो बदबू आती है. क्यूंकि वो न जाने कबसेतिजोरियों में बंद थे. बैंक कर्मचारियों पर काम का बोझ क्या कम था जो ये नया मसला आगया है. वो पहले ही ओवरटाइम कर कर के परेशान हैं. अब ये बीमारियां तो उन्हें इससमस्या के खतम हो जाने के बाद भी सताती रहेंगी.