The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Old currency notes are laced with dangerous bacteria that are causing infections to bank officials

पुराने नोटों से फैल रही नई बीमारियां, बैंक वाले परेशान

पुराने बक्सों से निकले हैं कुछ पुराने नोट. जो बैंक वालों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
केतन बुकरैत
18 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 17 नवंबर 2016, 03:58 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
नोट बदले जा रहे हैं. नए नोट भी दिए जा रहे हैं. लोग दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. भीड़ भड़क्का, धक्का मुक्की इत्यादि इत्यादि. कहीं एटीएम में पैसे खतम हुए जा रहे हैं तो कहीं बैंक में नोट खतम हुए जा रहे हैं. हफिंग्टन पोस्ट तो कह रहा है इस मसले की वजह से 50 के आस पास लोग मर चुके हैं. लेकिन एक समस्या है जिसकी बात बहुत कम की जा रही है. और असल में मामला ये है कि उसकी ओर ध्यान ही नहीं जा रहा है. जब तक जाता है तब तक टाइम निकल जाता है. दरअसल बैंकों में कई लोग पुरानी नोट्स जमा करवा रहे हैं. अब दिक्कत ये है कि ये नोट्स काफ़ी समय से लोगों की तिजोरियों में बंद थे. इन नोटों में फंगस लग चुका है. इसके साथ ही वो ऐसे इन्फेक्शन्स लेकर चल रही हैं जिनसे इंसानी शरीर को काफी नुकसान पहुंच सकता है. और ये इन्फेक्शन्स बैक्टीरिया से फैलते हैं. जो दिखाई नहीं देते. बस, वो इन्फेक्शन फैलता जाता है. जब तक समझ में आता है, आदमी बीमार पड़ चुका होता है. यही बैंक कर्मचारियों के साथ हो रहा है. बैंक कर्मचारी स्किन इन्फेक्शन से लेकर सरदी-ज़ुखाम लेकर घूम रहे हैं. एक आदमी से दूसरे आदमी में ये बीमारियां फैल रही हैं. हालत ये है कि बैंक में भीड़ होने पर ये बीमारियां ग्राहकों को भी मिल रही हैं. नए नोटों के साथ. एकदम मुफ़्त. इलाहबाद बैंक की कैशियर गरिमा ने बताया कि वो दस तारीख तक बिल्कुल ठीक थीं. लेकिन जैसे जैसे बैंक में कैश बढ़ता गया, उनकी स्किन इरिटेशन की समस्या उसी अनुपात में बढ़ती गयी. जबकि इससे पहले उन्हें ऐसी कोई भी समस्या नहीं थी. जब उन्होंने अपना मर्ज डॉक्टर को दिखाया तब ये बात सामने आयी. इसी  बैंक के सीनियर मैनेजर प्रदीप कुमार के मुताबिक ये सच है और वो भी इन्फेक्शन में फंस चुके हैं. बैंक स्टाफ ये भी कह रहा है कि बैंक में इतना कैश आया हुआ है कि उसे पहले हाथों से गिना जाता है फिर मशीन से. इस दौरान सभी नोटें तेज़ हवा के कॉन्टैक्ट में आती हैं. जिससे बैक्टीरिया हवा में शामिल हो जाता है और सभी तक पहुंच जाता है. कई नोटों के बंडल से तो बदबू आती है. क्यूंकि वो न जाने कबसे तिजोरियों में बंद थे. बैंक कर्मचारियों पर काम का बोझ क्या कम था जो ये नया मसला आ गया है. वो पहले ही ओवरटाइम कर कर के परेशान हैं. अब ये बीमारियां तो उन्हें इस समस्या के खतम हो जाने के बाद भी सताती रहेंगी.

Advertisement

Advertisement

()