बेंगलुरु मास मोलेस्टेशन की आग अभी ठंडी नहीं हुई है. लोगों ने सोशल मीडिया पर खूबगुस्सा दिखाया. लेकिन रोज आने वाली रेप और मोलेस्टेशन की ख़बरें कम नहीं हुई हैं.बीते दिनों ओडिशा की एक लड़की बैशाली ने अपने और अपने दोस्तों के साथ हुई ऐसी ही एकघटना के बारे में फेसबुक पर लिखा. जिसे लोगों ने खूब शेयर किया. दुख की बात ये थीकि लड़की को सरेआम पीटा गया. और न लोगों ने कुछ किया, न पुलिस ने. पढ़िए बैशाली नेक्या लिखा: आज दोपहर जब मैं नंदनकानन रोड की तरफ पहुंच रही थी, ये आदमी जिसे आपतस्वीर में देख रहे हैं, मेरी सहेली समता की तरफ देखकर भद्दे इशारे करने लगे. जबहमारे पुरुष दोस्त सार्थक ने उन्हें फटकारते हुए कहा कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं,वो लड़के हमें धमकाने लगे. और हमारा पीछा करने लगे. थोड़ी दूर पर हमें रोककर लड़नेलगे. जवाब में हमने सबसे करीबी पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया. तब तक उन लड़कों नेअपने कुछ और दोस्तों को बुला लिया. जब हमारे पुरुष दोस्त ने बीच में आकर हमें बचानेकी कोशश की, उन लड़कों ने उसे खूब पीटा. जब मैं वीडियो बनाने लगी, तो जान से मारनेकी धमकी दी. एक दूसरे लड़के ने मेरी दोस्त को थप्पड़ मारा, उसका फोन तोड़ दिया औरगालियां दीं. सबसे दुखद बात ये कि लगभग 30 मर्द वहां खड़े रहे और कोई हमारी मदद केलिए नहीं आया. पुलिस स्टेशन दो किलोमीटर दूर था, लेकिन उन्हें आने में 40 मिनट लगगए. जब हमने पूछा इतनी देर कैसे लगी, उन्होंने कहा उनकी गाड़ी में पेट्रोल नहीं था.और कहा इस बात की शिकायत हम सरकार से करें. इसके बाद हमारी मदद करने के बजाय वोपूछने लगे कि हमारे दोस्त से हमारा क्या रिश्ता है. हम इस सड़क पर क्यों घूम रहे थे.ये लोग अनपढ़ लोगों से भी ज्यादा बुरे थे. अनपढ़ लोगों के पास तो साधन नहीं होते. येलोग तो पढ़-लिखकर भी अभद्र रह गए. ये लोग तो इंसान ही नहीं थे. हमें उन्हें बुलाया,और वो हम पर ही सवाल उठा रहे थे! जब तक हमारे मां-पापा नहीं आ गए, वो लोग हमारामजाक उड़ाते रहे. आज मैंने वो महसूस किया, जो पिंक फिल्म में दिखाया गया था . मेरीआंखों में आंसू थे, मैं कांप रही थी. भीड़ में से एक इंसान ने कहा, 'तुम लड़कियां हो,तुम क्यों बोल रही हो? घर जाओ, बवाल करना बंद करो. अपनी लिमिट याद रखो. तुम्हें घरपर होना चाहिए. सच में? दोपहर के वक़्त, कपड़ों से पूरी तरह ढकी हुई लड़कियां, चेहरेतक ढंके हुए और अब भी समाज हमें दोष दे रहा है? लड़कियों, सेल्फ-डिफेंस सीखो. पहलीबार मुझे इतना मजबूर महसूस हुआ. अपने लिए जियो, अपने लिए लड़ो. दुनिया ऐसे खुदगर्जमर्दों से भरी पड़ी है. इस समाज में हमसे अपेक्षित होता है कि हम केवल समझौते करें.तुम किसी मर्द से कम नहीं हो. अपने औरत होने पर गर्व करो.