BJP सांसद भर्तृहरि महताब लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर नियुक्त, कांग्रेस ने विरोध क्यों किया?
महताब इसी लोकसभा चुनाव से पहले नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) को छोड़कर BJP में शामिल हुए थे.

BJP सांसद भर्तृहरि महताब को लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया है. स्थायी स्पीकर चुने जाने तक लोकसभा में ये एक अस्थायी व्यवस्था होती है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 जून को ओडिशा के कटक से सांसद महताब को इस अस्थायी पद पर नियुक्त किया है. 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून को शुरू हो रहा है. इस दौरान नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी. भर्तृहरि महताब को ही सांसदों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके बाद 26 जून को लोकसभा के स्पीकर का चुनाव होगा.
महताब इसी लोकसभा चुनाव से पहले नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) को छोड़कर BJP में शामिल हुए थे. वे ओडिशा के कटक से सातवीं बार सांसद चुने गए हैं. ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब के बेटे हैं.
महताब नवनिर्वाचित सांसदों को दिलाएंगे शपथलोकसभा में 24 जून से सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह शुरू होगा. यह कार्यक्रम अगले दो दिन तक चलेगा. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि नवनिर्वाचित सदस्य प्रोटेम स्पीकर के समक्ष शपथ लेंगे. रिजिजू ने लिखा,
कांग्रेस ने किया विरोधभर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि परंपरा के अनुसार सबसे अधिक कार्यकाल पूरा करने वाले सांसद को पहले दो दिनों के लिए प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है. जयराम रमेश ने कहा कि वर्तमान लोकसभा में सबसे वरिष्ठ सांसद कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश और बीजेपी के वीरेंद्र कुमार हैं. दोनों अब अपना 8वां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. वीरेंद्र कुमार केंद्रीय मंत्री हैं इसलिए कोडिकुन्निल सुरेश को प्रोटेम स्पीकर को नियुक्त किया जाना चाहिए था.
प्रोटेम स्पीकर मतलब अस्थाई अध्यक्षप्रोटेम लैटिन भाषा का शब्द है. प्रो टेंपोर (Pro tempore) माने, कुछ समय के लिए या अस्थाई. जब तक स्थाई व्यवस्था न हो जाए. नई लोकसभा में सबसे पहले प्रोटेम स्पीकर नियुक्त होता है. इसे बहुमत वाले दल की सलाह पर राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं. प्रोटेम स्पीकर ही नए सांसदों को शपथ दिलवाते हैं. और फिर लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करवाते हैं. इसके बाद प्रोटेम स्पीकर का रोल खत्म हो जाता है. प्रोटेम स्पीकर के पास कोई भी संवैधानिक शक्ति नहीं होती. यानी सदस्यों पर अनुशासन की कार्रवाई करने जैसे फैसले वह नहीं कर सकते.
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