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महिला सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजे तो CISF अफसर पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

CISF के एक सब-इंस्पेक्टर ने अपनी महिला सहकर्मी को बार-बार अश्लील मैसेज भेजे और घर में घुसने की कोशिश की. विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर सज़ा मिली, जिसे उसने कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ऐसे अपराध के लिए सजा कम है, ज़्यादा मिलनी चाहिए थी.

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High Court
Delhi High Court
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कनुप्रिया
17 अक्तूबर 2025 (पब्लिश्ड: 07:17 PM IST)
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सोचिये कि जिस वर्दीधारी इंसान को देख कर आपके मन में सुरक्षा का भाव आना चाहिए, अगर आपको पता चले कि इसी वर्दीधारी शख़्स ने अपने किसी सहकर्मी को सेक्शुअली हैरेस किया है? ऐसा ही एक मामला आया दिल्ली हाईकोर्ट के सामने.

CISF यानी सेन्ट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फ़ोर्स के एक सब-इन्स्पेक्टर ने अपने ही कॉलीग, महिला सहकर्मी को कुछ अश्लील मेसेजेज़ भेज दिए. एक बार नहीं, बल्कि बार-बार. CISF सब-इन्स्पेक्टर यहीं नहीं रुका. उसने महिला सहकर्मी के घर में भी ज़बरदस्ती घुसने की कोशिश की. जब घर में नहीं घुस पाया तब उसे कॉल कर के फोन पर भी हैरेस करता रहा. जब पानी सर से ऊपर चढ़ गया, तब जा कर महिला ने अपने डिपार्टमेंट में कंप्लेंट फ़ाइल की. जिसके बाद डिपार्टमेंटल इंक्वायरी हुई, विभागीय जांच हुई, और उस जांच में CISF सब-इन्स्पेक्टर दोषी भी पाया गया. सज़ा के तौर पर उसका सैलरी काट ली गयी.  सैलरी कट के खिलाफ आरोपी सब-इन्स्पेक्टर ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील फ़ाइल की. अपील थी CISF मनैजमेंट के खिलाफ.

दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच में बैठे थे जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस विमल कुमार. उन्होंने पहले सब-इन्स्पेक्टर की दलील सुनी. उसका कहना था कि सजा के तौर पर किसी का वेतन काटना उसके मानवाधिकार का हनन है. वो अपनी बेगुनाही के क़सीदे पढ़ने की कोशिश भी कर रहा था. इसके बाद CISF ने अपना पक्ष रखा. कहा, कि एक ‘शादीशुदा’ वर्दीधारी का इस तरह से अपनी महिला सहकर्मी को अश्लील टेक्स्ट भेजने को हलके में नहीं लेना चाहिए.

बेंच का भी यही मानना था कि एक ‘शादीशुदा’ वर्दीधारी को ऐसी हरकत शोभा  नहीं देती. और ऐसे में किसी को अश्लील मैसेज भेजना अनुचित है, गलत है. कोर्ट ने ये भी कहा कि अपराध के हिसाब से इन्स्पेक्टर की सजा कम है. उसे और बड़ी सजा मिलनी चाहिए थी.

जाते-जाते एक सवाल मेरा आपसे, ये ‘शादीशुदा’ पर जो इतना ज़ोर दिया जा रहा है, क्या अगर कोई पुरुष शादीशुदा न हो और तब उसने ऐसी कोई हरकत कर दी हो, तो क्या उसे सजा कम मिलनी चाहिए? या उसका अपराध कम हो जाता है? हमें कॉमेंट सेक्शन में बताइये.


 

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