कर दे मुश्किल जीना, आशिक कमीना
अपनी सीनियर से एकतरफा प्यार में गिर पड़े. माने फॉल इन लव. फिर तो बवाल ही काट दिया.
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फोटो - thelallantop
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लिखता हूं खत खून से स्याही न समझना
जिंदा हूं तेरी याद में मुर्दा न समझना.
और जब तक मैं जिंदा हूं, तुमको जीने नहीं दूंगा. क्योंकि आशिक हूं मैं, पोटेंशियल कातिल भी हूं. लल्लन की तरफ ऐसे जासूसी निगाह से घूरना बंद करो. हम खबर बता रहे हैं केरल के बिना लैला मजनू बने अरुण श्रीधर की. जिसने आयशा की जिंदगी तबाह कर रखी है.
तो भैया श्रीधर बाबू केरल के रहने वाले. हेबल, बंगलुरू के एक फोर स्टार होटल में नौकरी पर लगे थे. रोजी रोजगार सही चल रहा था. नवंबर में लगा था पिछले साल. उसकी सीनियर थी आयशा, सेल्स और मार्केटिंग की हेड. इनके अंडर में काम करता था.
महीने भर हुए काम करते. इनके अंदर कोई कीड़ा फूटा जो बताइस कि इनको आयशा से प्यार है. दन्न से इजहार कर डाला. उधर से ऑफर पर झाड़ू फिर गई. मना कर दिया आयशा ने. तब शुरू हुआ असली खेल.
दिन भर में करीब 2 हजार कॉल्स, हज्जारों टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सऐप मैसेज, फेसबुक मैसेज. अलग अलग नंबर और एकाउंट से मैसेज. एक ब्लॉक कर दे तो दूसरा चालू. एकदम नाक में दम कर दिया. खून से लेटर लिख भेजा. मेकप का सामान, मेहंदी, नेलपॉलिश और कॉस्मेटिक्स घर भेज दीं. घर जाकर उसके पापा से कहा मैं आयशा से शादी करूंगा. पापा ने हड़का कर भगा दिया. तब आयशा ने उसकी शिकायत कर अरेस्ट करा दिया.
दिन भर में करीब 2 हजार कॉल्स, हज्जारों टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सऐप मैसेज, फेसबुक मैसेज. अलग अलग नंबर और एकाउंट से मैसेज. एक ब्लॉक कर दे तो दूसरा चालू. एकदम नाक में दम कर दिया. खून से लेटर लिख भेजा. मेकप का सामान, मेहंदी, नेलपॉलिश और कॉस्मेटिक्स घर भेज दीं. घर जाकर उसके पापा से कहा मैं आयशा से शादी करूंगा. पापा ने हड़का कर भगा दिया. तब आयशा ने उसकी शिकायत कर अरेस्ट करा दिया.

