नोटबंदी की चोट से बचने के लिए गोरखपुरिया मजदूरों ने तरीका निकाला
ये तरीका बुजुर्गों को इंदिरा सरकार की याद ताजा करा देगा.
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दिहाड़ी मजदूरी करते हैं साब. लेकिन जब किसी के पास पैसा ही नहीं दिहाड़ी देने का तो क्या मजदूरी करें. पेटीएम में तो पेमेंट करा नहीं सकते हर शाम. तो नसबंदी करा रहे हैं. इससे दो फायदे होते हैं. हजार रुपए मिलते हैं. और आराम करने को मिल जाता है. ये जानकारी हिंदुस्तान अखबार के मुताबिक गोरखपुर से आई है.
शुक्रवार को मजदूर मार्केट घूमने पर ये इन्फॉर्मेशन निकली. 23 साल के एक लड़के ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं. मजदूरी छोड़के घर बैठना मुमकिन नहीं. तो करा डाली नसबंदी. पीसीआई वो टीम है जो नसबंदी करती है. इसके लीडर हैं संदीप पांडे. बताया कि 20 अक्टूबर से 25 नवंबर तक 49 नसबंदी हुईं. कहोगे कि ये तो नॉर्मल बात है. खास बात ये है कि इनमें से 39 की नसबंदी पिछले 15 दिन में हुई है. उनको हजार रुपए कैश, तीन लाख का दुर्घटना बीमा और कुछ दिन का आराम मिला.
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