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नोटबंदी से लौटा बार्टर सिस्टम, 3 किलो गोभी दो, 1 किलो मछली लो

ये वो खबर है, जिसके जरिए आप भी मदद कर सकते हैं. मगर कैसे ये जान लो.

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पंडित असगर
15 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 14 नवंबर 2016, 04:54 AM IST)
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यहां कतारें. वहां कतारें. लोग परेशान हो रहे हैं. पैसा नहीं मिल रहा. क्या करें. क्या न करें. ढेर सारी रिपोर्टिंग हो रही है. लोगों को परेशान होते दिखाया जा रहा है. इसे पढ़ने के बाद आपको कुछ राहत सी महसूस होगी कि किस तरह लोगों ने इस संकट से निपटने का तरीका ढूंढ लिया है. देश के कई इलाकों में बार्टर सिस्टम अपनाया जा रहा है. बार्टर सिस्टम मतलब जरूरत का सामान दो. और बदले में जरूरत का सामान लो. मेरे गांव में तो अब भी ऐसा होता है कि जैसे किसी के घर में आटा, चीनी या फिर कुछ और चीज ख़त्म हो जाती है तो वो पड़ोसी से वो चीज मांग लेता है और फिर जब उसके घर में वो चीज आ जाती है तो वो उसे लौटा देता है. इस लेन-देन की सहूलियत से लगता ही नहीं कि घर में कभी कोई चीज कम हुई हो.
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'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने कई इलाकों में लोगों से पैसों की कमी को लेकर बातचीत की. झारखंड के गुमला इलाके में उरांव गांव के पूर्व प्रधान प्रदीप ने बताया कि दुकानदार लोगों को उधार सामान दे रहे हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि पैसे मरने वाले नहीं हैं. कुछ लोग सामान एक्सचेंज करने की सुविधा भी दे रहे हैं. दीनू महतो ने बताया कि उन्होंने मार्केट में अपनी सब्जियां बेचने के बजाए दुकानदार को देकर उससे बदले में मस्टर्ड आयल और मसाले ले लिए.
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बालंगीर जिले के कांताबंजी टाउनशिप में रहने वाले किसान सुरथा बेहेरा का कहना है कि यहां कोई बड़ी परेशानी नहीं है. लोगों को उधार सामान मिल रहा है. कर्नाटक के गडग जिले में रहने वाली शीतल ने बताया कि अगर किसी की शादी है तो दुल्हन के दहेज़ के लिए सामान उधार दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि हमारा बिजनेस किसानों पर ही डिपेंड है. हम उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हैं. इस वक्त वो पुराने नोट बंद होने की वजह से काफी परेशान हैं. हम उनकी परेशानी समझ सकते हैं. इसलिए शादी के लिए कपड़े उधार दे रहे हैं. बकराना गांव अहमदाबाद में है जिसे एलके आडवाणी ने गोद लिया हुआ है. वहां बैंकिंग फैसिलिटी नहीं है इसलिए लोगों को पुराने नोट बदलने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. कई गांव वाले 12 किलोमीटर दूर सानंद शहर में मौजूद बैंक जा रहे हैं. गांव के सरपंच जेशु सेन्मा कहते हैं, गुजारा करने के लिए कुछ पैसा तो चाहिए ही. लेकिन नोट बंदी का फैसला सही है. गांव वालों ने दूध और सब्जियों से सामान बदलना शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के माधोपुर गांव में सूर्य प्रकाश लाइन में लगे लेकिन पैसा नहीं निकाल पाए. उनकी बेटी की शादी है. तब उनके पड़ोसी ने  पैसे देकर उनकी मदद की. परेशानी के समय में इंसानियत हमें बचाए हुए है. साथी हाथ बढ़ाना...100 का नोट बढ़ाना.
 

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