पिछले कुछ दिनों से वॉट्सएप और फेसबुक पर चीनी अंडों से जुड़ी बातें बहुत शेयर होरही हैं. जिनमें लिखा हुआ है कि चीन से प्लास्टिक के बने अंडे आ रहे हैं. सो प्लीजडोंट यूज इट. उड़ रहे मैसेज में कहा गया कि इन अंडों का स्वाद तो अलग है ही, येबड़ी ही घटिया तरह से बदबू मार रहे हैं और ये प्लास्टिक की तरह जल भी रहे हैं.ये सब जमके शेयर हुआ. और लोग अंडा लेते वक्त दुकान वालों से कहने लगे, भइया सुनोचीन वाला मत देना. लोग अंडे ठोंक-बजाकर लेने लगे, इस चक्कर में कई अंडे फूटे जा रहेहैं.लेकिन ये सब मामला हवा-हवाई ही चल रहा था. अब चाइनीज अंडों के नाम पर अंडों के जोसैंपल लिए गए थे, उनकी जांच के बाद की रिपोर्ट आ चुकी है. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबरके मुताबिक ऐसी एक नहीं, बल्कि दो रिपोर्ट में एक्सपर्ट लोगों का कहना है कि ऐसेअंडे सड़े हुए हो सकते हैं. पर वो प्लास्टिक के नहीं हैं. ये रिपोर्ट्स केरल वेटनरीऐंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लाइवस्टॉक प्रॉडक्ट टेक्नोलजी औरसेंडर फॉर अडवांस स्टडीज़ इन पोल्ट्री साइंस की हैं.अंडा अकेला नहीं है उसके साथ पटाखे, झालर, मांझा, चावल और चाउमीन भी हैंवैसे ये पहली कोई अफवाह नहीं है. इसके पहले भी चाइनीज झालरों, चाइनीज पटाखों, चाइनासे आने वाले चावल-चाउमीन और चाइनीज मांझे को लेकर भी खूब अफवाहें चल रही थीं.झालरों के बारे में ये कहा जा रहा था कि इनके अंदर से जहरीली गैस निकलती है. चावलऔर चाउमीन प्लास्टिक के होते हैं. ये कोई बताने वाली बात तो है नहीं. आप भी इनअफवाहों से बराबर वाकिफ हैं.पटाखे वाला कांसेप्ट सुन के कल्पना को चक्कर आ गया थापटाखों को लेकर जो अफवाह वाला मैसेज आ रहा था, वो तो और भी इंट्रेस्टिंग था. इतनीगहरी प्लानिंग चीनियों ने भारत को नुकसान पहुंचाने की कर रखी थी. कि इसको कोईइंडियन प्लान करता तो उसे और उसकी सोच दोनों को चक्कर आ जाता. मैसेज की हिंदी कोठीक नहीं किया गया है, ताकि पढ़ते वक्त आप पूरा आनंद ले सकें. ये रहा मैसेज -मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान भारत पर सीधा हमला नही कर सकता इसलिए उसने भारतसे बदला लेने के लिए चीन की सहायता ली है चीन ने भारत में अस्थमा रोग फैलाने के लिएपटाखों में विशेष तरह का बारुद भरा है जिसके जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड से भीजहरीली गैसें निकलती है जो श्वास रोगो को बढाता है इसके अलावा भारत में नेत्र दोषपैदा करने के लिए विशेष प्रकार की सजावट की लाईट भी बनाई जा रही है जिनमें बङीमात्रा में पारा भरा गया है. कृप्या इस दिवाली थोङा जागरूक रहें और इन चाईनीजउत्पादों का उपयोग न करें. इस मैसेज को सभी भारतीयों तक पहुंचाए. जय हिन्दचाइनीज मांझा, जो चाइनीज है ही नहींएक चाइनीज चीज है चाइनीज मांझा. वैसे इस किलर धागे में कुछ भी चाइनीज नहीं है.विशुद्ध इंडियन होता है ये. पहले कॉटन के धागे लगते थे पतंगों में. इसलिए इस मांझेको मजबूत बनाने के लिए चावल का आटा और मसाले लगाये जाते थे. पर थोड़ा जोर पड़ने पर येटूट जाता था. इस टूटन से निजात पाने के लिए नए धागे लाये गए. नायलॉन के. यही हैंचाइनीज धागे. फिर इसको और मारक बनाया गया. इसमें कुछ चीजें मिलाई गईं:1. शीशे का चूरा 2. इंडस्ट्री में लगने वाले खतरनाक अधेसिव, जो उंगलियां भी चिपकादेंगे 3. एल्युमीनियम ऑक्साइड, जो चमड़े पर रगड़ दें तो खंखोर देगा 4. जिरकोनियाऑक्साइड, जो एल्युमीनियम ऑक्साइड से भी बड़ा वाला है 5. मैदा, जो कि पेस्ट बनाने केकाम में आता है 6. कहीं-कहीं लोग इसमें ब्लेड भी चिपका देते हैं.मार्केट में चाइनीज सामान की लिस्ट भी थीचीनी आइटम को लेकर एक-दो लिस्ट भी बनाकर लोग सर्कुलेट कर रहे थे. जिसमें लिखा था किचाइनीज कंपनी कौन-कौन सी हैं.लो ज्ञान बढ़ा लोचीन के खिलाफ जंग में बाबा रामदेव हुए कमांडरबहरहाल देश भर के सारे तथाकथित बड़े-बड़े देशभक्त चीन पर अपने-अपने तरह से हमले कासुझाव दे रहे हैं. ऐसा में सोमवार को बाबा रामदेव ने भी कहा कि हमारे घरों मेंभगवान राम और कृष्ण की मूर्तियां भी चीन की आ गई है. दिवाली की लाइटें भी चीन से आरही हैं. इनसे देश की एकता और अखंडता को खतरा है. पूरे देश में चीन के सामान काबहिष्कार होना चाहिए, तभी चीन कंट्रोल में आएगा, नहीं तो ये हमारे लिए खतरा बनजाएगा. ये सब बाबा इसलिए कह रहे थे क्योंकि बाबा का मानना है कि चीन के चलते हीभारत न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल नहीं हो पा रहा है.नया दावा, चीन से ट्रेड 30 परसेंट कम होने वाला हैकंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने दावा किया है कि सोशल मीडिया कीबायकॉट चाइना प्रोडक्ट्स की मुहिम ने अपना असर बाजार पर दिखाना शुरू कर दिया है. औरये असर काफी जबरदस्त है, जिससे इस दीवाली मेड इन चाइना प्रोडक्ट्स का व्यापार तीसफीसदी तक कम हो सकता है.वहीं कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि सोशल मीडिया पर चाइनीज सामानोंके विरुद्ध जो मुहिम छेड़ी गयी है, उससे मोटे तौर पर चीन को कोई नुकसान नहीं होगा.कम से कम इस सीजन तो कतई नहीं. इसकी वजह ये है कि दीवाली के मौके पर खरीदारी कीतैयारी ट्रेडर 2-3 महीने पहले ही शुरू कर देता है. लिहाजा तकरीबन सभी थोकव्यापारियों की दुकानें और गोदाम चाइनीज सामानों से अटे पड़े हैं. ऐसी स्थिति मेंयदि किसी का नुकसान होगा तो वो हमारे देश के ही लोग और व्यापारी होंगे.पर दोस्त, आप तो समझदार हैं. इसलिए जोश में होश का बंडल बनाकर तालाब में न फेंकनेसे कोई फायदा नहीं. चीन को सबक सिखाने के चक्कर में कहीं अपना नुकसान ही न करबैठना. वैसे चीन को सबक सिखाने का सबसे सही तरीका ये है कि सरकार चीनी सामान केआयात पर रोक लगाए. वैसे चीनी सामान में वैरायटी-वैरायटी की मिलावट से जनता परेशानहै और इस बारे में सबसे सही बात हमारे एक साथी आशीष कहते हैं कि चीन पर बैन लगानाहै तो सबसे पहले चाइनीज सैनिकों पर बैन लगाना चाहिए. जो हर महीने ही इंडियामें घुसे चले आते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -झालर बैन से कुछ नहीं होगा, चीन की पुंगी बजानी है तो ये करोचाइनीज सामान का बायकॉट अकेले कर लो, पीएम न करेंगेचाइनीज नहीं है चाइनीज मांझा, इंडियन है ये जो गर्दन काट देता है!त्रिपुरा महीनों तक देश से कटा रहा, आपको घंटा फर्क पड़ा?इन लोगों की चली तो रिलायंस जियो 4G बंद हो जाएगा