नोबेल वालों ने बॉब डिलन को नोबेल देने की घोषणा की, तब सोचा न होगा कि आइस-पाइसखेलना पड़ेगा. नोबेल समिति ने बॉब डिलन तक पहुंचने की बहुत कोशिश की, लेकिन नाकामरहे और अब हारकर मेल-वेल करना बंद कर दिया है. जिस दिन नोबेल मिला, उस दिन भी बॉबगाने गा रहे थे. नोबेल मिलने के दिन और नोबेल मिलने की खबर आने के बाद डिलन का लासवेगस में कंसर्ट था. वहां भी डिलन ने नोबेल जीतने पर खुशी या गम कुछ भी नहीं जताया,बल्कि ज़िक्र तक नहीं किया.डिलन के इस तरीका-ए-कार को कुछ लोग हठबुद्धि मानते हैं, तो कुछ का कहना है कि बॉबअपने रास्ते पर चलता जाता है, उसे किसी से कोई फर्क नहीं पड़ता. उस कंसर्ट को भी‘व्हाई ट्राई टू चेंज मी नाऊ’ (तुम मुझे अब क्यों बदलना चाहो) गाने के साथ खत्मकिया था.नोबेल देने वाली स्वीडिश अकेडमी की स्थाई सचिव ने वहां के सरकारी रेडियो को बताया,‘अब हम कुछ नहीं कर रहे हैं. मैंने बॉब के सबसे नज़दीकी सहयोगी को मेल भेजे हैं औरदोस्ताना जवाब मिले हैं. फिलहाल के लिए इतना काफी है.’ वैसे नोबेल समिति का इसआइस-पाइस पर क्या कहना है?अकेडमी की स्थाई सचिव ने कहा, ‘मुझे कोई चिंता नहीं है. अगर वो नहीं आना चाहें तो नआएं पर हर सूरत में ज़ोरदार जश्न होगा और पुरस्कार के हकदार डिलन ही हैं.’ हर साल10 दिसंबर को स्टॉकहॉम में वहां के राजा नोबेल पुरस्कार देते हैं और नोबेल विजेताओंको दावत-ए-नोबेल में अपने विचार सुनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है.अगर डिलन न आएं तो भी पुरस्कार उनका ही रहेगा. हां, लेने से ही मना कर दिया तो अलगबात है. हालांकि डिलन के आधिकारिक ट्विटर खाते से 2 ट्वीट आए हैं. पहले में बॉबडिलन को नोबेल मिलने की घोषणा ज्यों की त्यों है और दूसरे में इस अवसर पर ओबामा काबधाई ट्वीट रिट्वीट हुआ है. अगर यहां से कुछ ‘सुराग’ निकालें तो बॉब को सब पता है,बस नोबेल वालों से बात करने का टाइम नहीं है.यह पहली बार है कि जब किसी गायक (लोकगायक पढ़िए) को साहित्य का नोबेल दिया गया है.सिर्फ काग़ज़ी साहित्य को साहित्य मानने वालों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की थी.कहीं ऐसा तो नहीं है कि उनकी कड़ी निंदा से बॉब का मन हो गया हो कि भैय्या तुम लेलो नोबेल.अगर ऐसा होता है, तो पहली बार नहीं होगा, जब किसी साहित्यकार ने नोबेल ठुकरा दियाहो. ‘डॉक्टर ज़िवागो’ के लेखक बोरिस पास्तरनाक और ज्यां पॉल सार्त्र ने नोबेल लेनेसे इनकार कर दिया था. असल में कुछ लेखक इतने बड़े होते हैं कि नोबेल को पुरस्कारमें वो मिलते हैं.लेव तॉलस्तॉय नोबेल पुरस्कार को कभी नहीं मिले. कहा ये जाता है कि वो रूस के थेइसलिए पश्चिमी देशों को इस महान लेखक को नोबेल देने में एतराज़ था. हमारे यहां भीकालजयी उपन्यास ‘राग दरबारी’ के लेखक श्रीलाल शुक्ल को जब मिलना चाहिए था, ज्ञानपीठनहीं मिला. आखिर में जब श्रीलाल शुक्ल इस दुनिया से जाने वाले थे, तब ज्ञानपीठपुरस्कार की इज्जत बढ़ाने के लिए श्रीलाल जी को अस्पताल जाकर आनन-फानन में पुरस्कारदिया गया.तो कई बार लेखक पुरस्कारों को मिलते हैं. पर क्या डिलन नोबेल को मिलेंगे? इसका पहलाजवाब ये कि डिलन अभी अपने टूर पर हैं, जो 23 नवंबर को खत्म हो रहा है. उसके बादशायद नोबेल वालों को डिलन का कुछ समय मिल पाए. और दूसरा जवाब डिलन का ही एक गाना है– द आंसर, माई फ्रेंड, इज ब्लोइंग इन द विंड (जवाब हवाओं में बह रहा है, दोस्त,फिज़ाओं में बह रहा है).-------------------------------------------------------------------------------- ये स्टोरी हेमंत ने की है.--------------------------------------------------------------------------------