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यूपी में जातिगत जनगणना कराने की मांग पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ी बात कह दी

बिहार सरकार की तरफ से जातिगत जनगणना को पटना हाई कोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद यूपी में जातिगत गणना कराने की मांग फिर से तेज़ हो गई है.

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10 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 10 अगस्त 2023, 10:25 PM IST)
Yogi Adityanath
योगी आदित्यनाथ.
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उत्तर प्रदेश में जातिगत जनगणना कराने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सरकार का फ़िलहाल जातिगत जनगणना कराने का कोई विचार नहीं है. समाजवादी पार्टी की तरफ से विधानसभा में मुख्यमंत्री से प्रदेश में जाति गणना कराने को लेकर सवाल पूछा गया था. इस सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने साफ़ तौर पर जवाब 'ना' में दिया है.

यूपी में जातिगत जनगणना नहीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने जवाब में कहा है कि देश के संविधान की 7वीं अनुसूची की संघ सूची के क्रम 69 पर जनगणना का विषय अंकित है. भारत सरकार की तरफ से जनगणना के काम के लिए जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 बनाए गए हैं, जिसके तहत जनगणना का काम किया जाता है.

सपा की तरफ से संग्राम यादव ने मुख्यमंत्री से सदन में जातिगत जनगणना को लेकर सवाल किया गया था.

बिहार सरकार की तरफ से जातिगत जनगणना को पटना हाई कोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बाद यूपी में जातिगत गणना कराने की मांग फिर से तेज़ हो गई है. बीएसपी प्रमुख मायावती ने ट्वीट कर कहा कि जातिगत जनगणना न सिर्फ यूपी में, बल्कि पूरे देश में कराए जाने की ज़रूरत है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी 2022 विधानसभा चुनाव के पहले से इसका समर्थन करते रहे हैं.

बीजेपी के सहयोगी भी पक्ष में 
उत्तर प्रदेश में जातिगत जनगणना की मांग सिर्फ विपक्षी ही नहीं बीजेपी के सहयोगी दल भी कर रहे हैं. एनडीए में शामिल अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी और सुभासपा भी कर रही है. पिछड़ों की राजनीति करने वाली अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी समय-समय पर जातिगत जनगणना की मांग उठाते आए हैं.

कोर्ट में भी चल रहा मामला
जातिगत जनगणना को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है. गोरखपुर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता काली शंकर की याचिका पर 9 अगस्त को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 4 हफ़्तों में अपना पक्ष कोर्ट में रखने को कहा है. याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति को उनकी आबादी के हिसाब से आरक्षण का फ़ायदा मिल रहा है, लेकिन पिछड़ी जातियों के साथ ऐसा नहीं है. 

याचिका में कहा गया है कि 1931 में हुई जाति जनगणना के बाद अब तक जातियों की गिनती नहीं कराई गई है. ऐसे में आबादी के हिसाब से आरक्षण का फ़ायदा देने के लिए फिर से जनगणना कराई जानी ज़रूरी है.

वीडियो: यूपी विधानसभा में जाति जनगणना को लेकर विपक्ष ने जमकर बवाल काटा, अखिलेश ये बोले.

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