ट्रेन के कंबलों की असलियत जानकर गुस्सा आया था न, ये खबर पढ़कर और आएगा
वाह इंडियन रेलवे, वाह.
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फोटो - thelallantop
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ऑफिस के एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में पटना गए थे. जाने का टिकट कन्फर्म था. लखनऊ वापस लौटने के लिए एसी थ्री टियर में टिकट कराया गया था. 3 वेटिंग पर अटक गया. स्टेशन पहुंचे. 3 घंटे की माथापच्ची, कई फ़ोन कॉल्स और लाइन में धक्के खाने के बाद स्लीपर क्लास में सीट मिली.
सूत्रों के मुताबिक, रेलवे ने दो ऑप्शन निकाले हैं. एक तो जो हमने बताया कि एसी का टेम्प्रेचर बढ़ा दिया जाए. और दूसरा कि कम्बल पर कवर चढ़ा दिया जाए. अरे वही खोल जो हम लोग जाड़े में चढ़ाते हैं रजाई पर. खोल की धुलाई आसान भी होगी और सस्ती भी. फिलहाल रेलवे प्रशासन शुरुआत में कोई भी योजना कुछ ही ट्रेन में लागू करेगी.

पहले लोग सफ़र पर निकलने से पहले सारा इंतज़ाम करके निकलते थे. Symbolic Photo. Credit: Gaon connection.
वैसे कैग ने शिकायत तो ट्रेन में खाने-पीने के लिए भी की थी. महंगा और गंदे पानी से बनाए जाने वाले खाने पर क्या हुआ. ये अब तक पता नहीं चला. अब तो डर लग रहा है कहीं खाना भी बंद न हो जाए. फिर हम लोग उसी टाइम पर वापस पहुंच जाएंगे जब लोग सफ़र पर निकलने से पहले खाना-पीना, बोरिया-बिस्तर सब लेकर चलते थे. एक पिट्ठू बैग के साथ सफ़र करना भूल जाओ.
ये जान लेंगे, तो ट्रेन में कभी खाना नहीं खाएंगे
अब सबसे अहम बात, वो महीना जनवरी का था. आने-जाने की टिकट एसी में हुई थी इसलिए कम्बल लेकर चले नहीं. आप कोशिश भी करें तो अंदाजा नहीं लगा सकते कि वो 11-12 घंटे की रात कैसे कटी. अटेंडर से कम्बल मांगा तो उसने बताया कि एसी वालों के लिए ही पूरा नहीं पड़ रहा. उस वक़्त बस कम्बल चाहिए था. फटा-गंदा कैसा भी.आप सोचेंगे ये कहानी क्यों सुनाई जा रही है आज. एक ख़बर चल रही है कि रेलवे एसी कोच वालों को कम्बल देना बंद करने वाला है. राहत के लिए एसी का टेम्प्रेचर बढ़ाया जाएगा. अब तक 19 डिग्री टेम्प्रेचर रहता था अब इसे बढ़ाकर 24 डिग्री करने पर भी विचार चल रहा है. इसके पीछे वजह है पइसा. रेलवे एक कंबल की धुलाई पर 55 रुपए खर्च करता है और हमसे सिर्फ 22 रुपए ही लिए जाते हैं.
कैग की रिपोर्ट से शुरू हुई कहानी
कुछ दिन पहले कैग ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी. इसमें भइया लोगों ने बताया था कि कितने चीकट कम्बल ओढ़ने के लिए दिए जा रहे हैं. छह-छह महीने उनकी धुलाई नहीं हो रही. वगैरह-वगैरह. इसी के बाद रेलवे ने कम्बल न देने की अकल लगाई है.और कर लो शिकायत
रेलवे वालों का कहना है कि कम्बल की धुलाई पर मोटा खर्च होता है. इसके बाद भी कम्बल साफ नहीं होते. बाद में हमारे-आप के जैसे यात्री शिकायत करते हैं. तो क्यों न कम्बल का झंझट ही ख़त्म कर दिया जाए. न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी. एसी क्लास में ठंडक ही नहीं रहेगी तो कम्बल की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. लेकिन भइया सबकी बॉडी एक जैसी तो नहीं होती न. जैसे हो सकता है कि किसी को 24 डिग्री पर भी हल्की ठंड महसूस होती हो. तब वो क्या करे.सूत्रों के मुताबिक, रेलवे ने दो ऑप्शन निकाले हैं. एक तो जो हमने बताया कि एसी का टेम्प्रेचर बढ़ा दिया जाए. और दूसरा कि कम्बल पर कवर चढ़ा दिया जाए. अरे वही खोल जो हम लोग जाड़े में चढ़ाते हैं रजाई पर. खोल की धुलाई आसान भी होगी और सस्ती भी. फिलहाल रेलवे प्रशासन शुरुआत में कोई भी योजना कुछ ही ट्रेन में लागू करेगी.

पहले लोग सफ़र पर निकलने से पहले सारा इंतज़ाम करके निकलते थे. Symbolic Photo. Credit: Gaon connection.
वैसे कैग ने शिकायत तो ट्रेन में खाने-पीने के लिए भी की थी. महंगा और गंदे पानी से बनाए जाने वाले खाने पर क्या हुआ. ये अब तक पता नहीं चला. अब तो डर लग रहा है कहीं खाना भी बंद न हो जाए. फिर हम लोग उसी टाइम पर वापस पहुंच जाएंगे जब लोग सफ़र पर निकलने से पहले खाना-पीना, बोरिया-बिस्तर सब लेकर चलते थे. एक पिट्ठू बैग के साथ सफ़र करना भूल जाओ.
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