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वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज MBBS कोर्स के योग्य नहीं? 4 महीने पहले तो सब ठीक था

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के पहले बैच में 50 छात्रों में से 44 मुस्लिम छात्रों को दाखिला दिया गया. क्या इस बात को लेकर शुरू हुए विवाद ने मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई ही बंद करवा दी?

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माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली गई है. (Photo: SMVDIME)
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सौरभ
8 जनवरी 2026 (Published: 11:50 PM IST)
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जम्मू के रियासी जिला स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को 2025-26 सत्र से MBBS कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली गई. किसी भी कॉलेज में MBBS कोर्स की पढ़ाई हो सकती है या नहीं इसकी अनुमति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) देता है. NMC ने ये कहते हुए यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कोर्स को बंद कर दिया था कि यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में काफी कमियां हैं, पर्याप्त फैकल्टी और क्लिनिकल मटेरियल उपलब्ध नहीं है. अब खबर है कि NMC ने SMVDIME से मेडिकल कोर्स चलाने की अनुमति वापस लेकर अपना ही चार महीने पुराना फैसला उलट दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ चार महीने पहले ही विस्तृत निरीक्षण और पूरी जांच-पड़ताल के बाद इस संस्थान को कोर्स शुरू करने की हरी झंडी दी गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक संस्थान और केंद्रीय स्वास्थ्य से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह नया फैसला ‘बिना उचित प्रक्रिया’ के और ‘बेहद जल्दबाजी’ में लिया गया लगता है. अधिकारियों ने बताया कि आम तौर पर जब किसी मेडिकल कॉलेज में कमी पाई जाती है, तो पहले उसे कारण बताओ नोटिस भेजा जाता है, जो या तो ऑनलाइन आंकड़ों के आधार पर होता है या अचानक किए गए निरीक्षण के बाद जारी किया जाता है. इसके बाद जवाब के आधार पर फैसला लिया जाता है.

अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया में पहले एनएमसी के सामने अपील करने का प्रावधान होता है और उसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के पास दूसरी अपील की जा सकती है. लेकिन इस मामले में नियामक संस्था से जुड़े अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कॉलेज की ओर से अब तक कोई अपील दाखिल नहीं की गई है.

इस बीच मेडिकल कॉलेज पर लगे प्रतिबंध पर जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान आया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग “एक मेडिकल कॉलेज के बंद होने” का जश्न मना रहे हैं. अब्दुल्ला ने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में लोग ऐसे संस्थान पाने के लिए संघर्ष करते हैं, जबकि यहां बच्चों का भविष्य बर्बाद होने पर खुशी मनाई जा रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर लोग बच्चों का भविष्य तबाह करने में खुश हैं, तो उन्हें पटाखे फोड़ते रहना चाहिए.

दरअसल, मेडिकल कॉलेज पर प्रतिबंध लगने के बाद बीजेपी और कुछ हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के उस फैसले का जश्न मनाया था. श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने जम्मू में विजय जुलूस निकाला, पटाखे फोड़े और नाच-गाना किया. यह समिति हिंदू सामाजिक और धार्मिक संगठनों का एक समूह है, जिसने श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित इस मेडिकल कॉलेज में गैर-हिंदू छात्रों के प्रवेश के खिलाफ आंदोलन किया था.

संघर्ष समिति नवंबर से इस बात का विरोध कर रही थी कि मेडिकल कॉलेज के पहले बैच में 50 छात्रों में से 44 मुस्लिम छात्रों को दाखिला दिया गया, जिनमें ज्यादातर कश्मीर से थे. चयनित छात्रों में सिर्फ सात हिंदू और एक सिख छात्र था. समिति का कहना था कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा वित्तपोषित संस्थान में हिंदू छात्रों और माता वैष्णो देवी में आस्था रखने वालों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि दो साल के भीतर इस संस्थान की प्रवेश क्षमता 400 तक पहुंचने वाली थी, जिसमें से करीब 250 सीटें जम्मू के छात्रों को मिलने वाली थीं. उन्होंने कहा कि अब धर्म के नाम पर कॉलेज बंद होने से किसी को भी ये सीटें नहीं मिलेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में जो छात्र मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं ले पाएंगे, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि इस संस्थान को बंद कराने में संघर्ष समिति की क्या भूमिका रही.

वीडियो: 'हिंदूओं को प्राथमिकता...', माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को लेकर क्यों बवाल मच रहा?

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