'कश्मीर में गंदी फिल्में देखने के अलावा लोग कुछ नहीं करते'
कश्मीर में इंटरनेट बैन पर बोले नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत.

5 अगस्त, 2019. इस दिन केंद्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था. साथ ही सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लगा दी थी. इंटरनेट सेवा पर भी बैन लगा दिया था. हालांकि अब प्रीपेड कॉल, SMS और 2जी इंटरनेट सेवाएं शुरू हो गई हैं. ये बातें इसलिए बता रहे हैं क्योंकि नीति आयोग के एक सदस्य ने ओछी बात कही है. उनका नाम है- वीके सारस्वत. ये DRDO के चीफ भी रह चुके हैं. खैर. इन्होंने कहा क्या है, ये जानिए-
कश्मीर में नेट बंद है, लेकिन आपके गुजरात में तो नेट है न. तो कश्मीर के नेट से आपको क्या प्रॉब्लम है. कश्मीर में अगर ऐसा किया गया है, तो वजह अलग है. कश्मीर में 370 खत्म करना है, अगर हमें एक स्टेट के रूप में कश्मीर को आगे लाना है, तो हमें मालूम है कि वहां कुछ तत्व ऐसे हैं, जो इस तरह की जानकारी का गलत इस्तेमाल करेंगे. और हमारे राज्य में जो शांति लाना चाहते हैं, वो जाकर माहौल खराब करेंगे. ये राजनेता कश्मीर क्यों जाना चाहते हैं? किसलिए जाना चाहते हैं? क्या वो दिल्ली की तरह सड़कों पर हो रहे प्रोटेस्ट को कश्मीर की सड़कों पर लाना चाहते हैं? और जो सोशल मीडिया है, वो उसको बस आग की तरह इस्तेमाल करते हैं. तो आपको वहां इंटरनेट न हो तो क्या फर्क पड़ता है? और वैसे भी इंटरनेट में वहां क्या देखते हैं? क्या ई-टेलिंग हो रहा है वहां पे? वहां गंदी फिल्में देखने के अलावा कुछ नहीं करते आप लोग.
हालांकि इस बयान के बाद उन्होंने माफी मांग ली. उन्होंने कहा- हालांकि वीके सारस्वत ने मीडिया में इस बयान के फैलने के बाद माफी मांग ली. उनका कहना है कि अगर इन बातों से कश्मीर के लोगों को दुख पहुंचा है, तो मैं माफी मांगता हूं. मैं कश्मीरियों के इंटरनेट इस्तेमाल करने के अधिकार के खिलाफ नहीं हूं.#WATCH: NITI Aayog's VK Saraswat says "...They (politicians) use social media to fuel protests. What difference does it make if there’s no internet in Kashmir? What do you watch on internet there? What e-tailing is happening? Besides watching dirty films, you do nothing. (18.01) pic.twitter.com/slz9o88oF2
— ANI (@ANI) January 19, 2020
NITI Aayog's VK Saraswat: I have been quoted out of context. If this misquotation has hurt the feelings of the people of Kashmir, I apologise and would not like them to carry this impression that I am against the rights of the Kashmiris to have internet access. https://t.co/8bwfkBGk6i pic.twitter.com/jwvHaDPVg1 — ANI (@ANI) January 19, 2020ये सारी बातें उन्होंने जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बैन से संबंधित सवाल के जवाब में कही थी. वो धीरूभाई अंबानी सूचना और संचार प्रौद्योगिकी संस्थान (DA-IICT) में बतौर चीफ गेस्ट पहुंचे थे.
वीके सारस्वत JNU के चांसलर भी हैं. उन्होंने JNU में हो रहे प्रोटेस्ट को लेकर भी हाल ही में अपनी प्रतिक्रिया दी थी. कहा था कि छात्र और अध्यापक किसी भी तरह का अनुशासन नहीं चाहते हैं. उन्होंने मौजूदा स्थिति पर पिछले 50-60 सालों में छात्रों को दी गई छूट को जिम्मेदार ठहराया था.
वीडियो देखें : कश्मीर में 134 दिनों से इंटरनेट बंद, दंगा हुआ तो इंटरनेट बंद पर ये होता कैसे है?

