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निर्भया केस के चार दोषियों में से एक ने पेच फंसा दिया, फिर टल सकती है फांसी

केस 7 साल से अटका था, अभी 10 दिन पहले ही डेथ वॉरंट आया.

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16 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 16 जनवरी 2020, 08:39 AM IST)
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निर्भया की मां आशा देवी बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट से बाहर आती हुईं। (फोटो- PTI)
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16 दिसंबर, 2012 को दिल्ली में निर्भया गैंगरेप केस हुआ. महिला सुरक्षा को लेकर जितनी बातें इस केस के बाद हुईं, वो पहले कभी नहीं हुई थीं. बस दिक्कत ये रही कि बातें ही हुईं, सजा नहीं हुई. बीते 7 जनवरी को निर्भया केस के चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई. तय हुआ कि 22 जनवरी को फांसी दी जाएगी. लेकिन 7  साल, 20 दिन बाद आया फैसला अब 10 दिन में ही फिर अटकता दिख रहा है. निर्भया केस के दोषियों की फांसी टल सकती है. वजह- चार में से एक दोषी की दया याचिका अभी लंबित है. जब तक उस पर फैसला नहीं होगा, फांसी नहीं होगी. मामले में पेच फंसने की शुरुआत बुधवार को हुई. चार में से एक दोषी मुकेश ने डेथ वॉरंट को चुनौती दी थी. दिल्ली हाईकोर्ट में इसी पर सुनवाई थी. कोर्ट ने मुकेश की चुनौती को खारिज कर दिया. सुनवाई तक से इनकार कर दिया. कहा- फांसी होगी. अब आप सोचेंगे कि पेच कहां फंसा? पेच फंसा दया याचिका पर. दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि मुकेश की दया याचिका भी अभी लंबित है. उस पर फैसला आने तक फांसी नहीं दी जा सकती. प्रोसेस ये है कि जब तक बचाव का एक भी रास्ता बचा है, तब तक दोषी को फांसी नहीं दी जा सकती. अब इस मामले पर आज यानी गुरुवार को सुनवाई होनी है. दया का सवाल ही नहीं, तो फांसी क्यों टलेगी... अब सवाल- गुनाह इतना गंभीर है कि दया याचिका तो खारिज होनी ही है. फिर फांसी क्यों टलेगी? इसका जवाब ये है कि अगर दया याचिका खारिज हो भी गई, तो फांसी 14 दिन से पहले नहीं हो सकती. याचिका खारिज होने और फांसी होने के बीच इतना अंतर तो होना ही चाहिए. दिल्ली सरकार की काउंसिल ने हाईकोर्ट के सामने बात ये सारी बात रखी. जस्टिस महमोहन और संगीता ढींगरा सहगल की बेंच थी. सरकार के स्टैंडिल काउंसिल (क्रिमिनल) राहुल मेहरा ने कोर्ट को ये भी बताया कि भले ही याचिका एक दोषी की लंबित है, लेकिन जब तक इस पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक चारों में से किसी दोषी को सजा नहीं हो सकती. यानी फांसी 22 तारीख को ही होगी, ये अभी तय नहीं है. कोर्ट ने कहा- सिस्टम को कैंसर हो गया है इस पूरे मामले पर सबसे बड़ी बात वो है, जो कोर्ट ने कही. कोर्ट ने कहा, ‘अगर नियम यही है तो ये खराब नियम है. मतलब कि जब तक एक की भी याचिका लंबित है, तब तक बाकियों को भी फांसी नहीं हो सकती. इस मामले में सूझ-बूझ का इस्तेमाल तो किया ही नहीं गया. सिस्टम कैंसर से जूझ रहा है.’ स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा ने भी कहा, 'दोषी अब सिस्टम को फ्रस्टेट करने का काम कर रहे हैं. ये सारी कोशिशें सिर्फ फैसले में ज्यादा से ज्यादा देरी लाने की हैं. अब ये याचिका खारिज हो भी जाती है, तो फ्रेश डेथ वारंट जारी करना होगा. इसके बाद फांसी देने की जो प्रक्रिया 7 जनवरी से होती आ रही थी, वही फिर दोहरानी पड़ेगी.' दिल्ली सरकार पहले ही मुकेश की दया याचिका खारिज करने की सिफारिश कर चुकी है. प्रोटोकॉल के मुताबिक राष्ट्रपति ने दया याचिका पर विचार करने से पहले दिल्ली सरकार से उनकी राय मांगी थी. उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि 'बिजली की रफ्तार’ (लाइटनिंग स्पीड) से याचिका को खारिज करने की सिफारिश कर दी गई थी. महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भी कहा कि इतने लंबे इंतजार के बाद इतनी लेट-लतीफी ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि जब 22 जनवरी की तारीख तय है, तो फांसी उसी दिन होनी चाहिए.
वीडियो- निर्भया केस: चारों दोषियों के लिए पटियाला हाउस कोर्ट से डेथ वारंट जारी

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