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दिल्ली दंगे: नौ रिटायर्ड आईपीएस अफसरों ने पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी में क्या-क्या लिखा?

एक चिट्ठी दिल्ली पुलिस की पूरी जांच पर सवाल उठा रही है.

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15 सितंबर 2020 (अपडेटेड: 15 सितंबर 2020, 10:40 AM IST)
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तस्वीर फरवरी में हुई दिल्ली हिंसा की है. अपना घर छोड़कर नए ठिकाने की तलाश में जाता एक परिवार. (फाइल फोटो- PTI)
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इस साल फरवरी में दिल्ली में काफी हिंसा हुई थी. 23 से 26 फरवरी के बीच दंगे भड़के थे. इनमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 581 लोग घायल हुए थे. इन दिल्ली दंगों की जांच चल रही है. चार्जशीट भी फाइल हो चुकी है. अब इस जांच के संबंध में नौ रिटायर्ड आईपीएस अधिकारियों ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को एक चिट्ठी लिखी है. जांच पर तमाम सवाल उठाए हैं.
Letter 3 नौ रिटायर्ड आईपीएस की तरफ से लिखा गया लेटर.

चिट्ठी के मुख्य अंश हिन्दी में पढ़िए
'हम सब इंडियन पुलिस सर्विस से रिटायर्ड अधिकारी हैं. रिटायर्ड अधिकारियों का ये समूह काफी बड़ा है और इसे मिलाकर हम 'कॉन्टीट्यूशनल कन्डक्ट ग्रुप' (सीसीजी) कहते हैं. मिस्टर जूलियो रिबेरो हमारे इस सीसीजी के लिविंग लेजेंड हैं. उन्होंने आपको दिल्ली दंगों की जांच में गड़बड़ी को लेकर जो चिट्ठी लिखी थी, हम उसका समर्थन करते हैं.
दिल्ली पुलिस की तरफ से दंगों की जांच के संबंध में कोर्ट में जो चालान या जांच प्रस्तुत की जा रही है, उसे पक्षपातपूर्ण और राजनीति से प्रेरित कहा जा रहा है. ये भारतीय पुलिस के लिए दुख और चिंता की बात है. ये सेवारत और रिटायर्ड पुलिसकर्मियों के लिए चिंता की बात है.
हमें पता चला है कि आपके एक स्पेशल कमिश्नर ने कुछ हिंदुओं से बात करके उन्हें इस बात को लेकर भड़काने की कोशिश की कि उनकी कम्युनिटी से गिरफ्तारियां हो रही हैं. ये जांच को प्रभावित करने का प्रयास है. पुलिस की लीडरशिप का ये रवैया पीड़ितों को इंसाफ से वंचित कर सकता है. इसका ये मतलब भी है कि बहुसंख्यक समुदाय से जो आरोपी हैं, वो बच निकल सकते हैं.
ये बात और भी चिंताजनक है कि जिन लोगों ने सीएए के ख़िलाफ आवाज़ उठाई या प्रदर्शन में हिस्सा लिया, उन्हें भी निशाने पर लिया जा रहा है. ये उनका संवैधानिक अधिकार था, जो उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति देता है. ये साफ-सुथरी जांच के मानकों का उल्लंघन है. साथ ही ऐसा करते हुए उन लोगों को ढील दी जा रही है, जिन्होंने वास्तव में हिंसा भड़काई. या जो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े हैं.
ऐसी जांच से लोगों का लोकतंत्र, न्याय और संविधान से भरोसा उठ जाएगा.'
किसने लिखी चिट्ठी
नौ रिटायर्ड आईपीएस – शफी आलम, के. सलीम अली, मोहिंदरपाल, एएस दुलत, आलोक बी. लाल, अमिताभ माथुर, पीजीजे नाम्पूथिरी, एके समंथा, अविनाश मोहंती.


उमर खालिद को 9-10 घंटे पूछताछ के बाद दिल्ली दंगे के कनेक्शन में स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया

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