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न्यूजीलैंड की मस्जिदों में फायरिंग करने वाले ने 74 पन्नों में कौन सी 11 वजहें बताईं

फायरिंग से पहले हमलावर ने एक मेनीफेस्टो जारी किया है.

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15 मार्च 2019 (अपडेटेड: 15 मार्च 2019, 06:25 AM IST)
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मस्जिद पर हमला करने वाला आतंकी बैरंट ट्रैंटन
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15 मार्च का दिन. दोपहर को न्यूजीलैंड के क्राइसचर्च में दो मस्जिदों पर एक हथियारबंद शूटर ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. 27 से ज्यादा लोगों के मरने की खबर आ रही है. यहां बांग्लादेश की क्रिकेट टीम भी नमाज़ पढ़ने पहुंची थी. खिलाड़ियों को भागकर मैदान वापस मैदान पर पहुंचना पड़ा. न्यूजीलैंड और बांग्लादेश के बीच तीसरा टेस्ट रद्द कर दिया गया. न्यूजीलैंड पुलिस ने इस हमलावर को हिरासत में ले लिया है.
मगर सबसे खास बात ये कि इस 28 साल के ऑस्ट्रेलियाई युवक ने इन दो मस्जिदों पर हमला करने से पहले 74 पेज का एक मेनिफेस्टो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था. हालांकि न्यूजीलैंड पुलिस ने इस युवक का ट्विटर हैंडल सस्पेंड कर दिया है, मगर ये मेनिफेस्टो मीडिया में मौजूद है. इसमें इस युवक ने अपने हमले के पीछे कई वजहें बताई हैं. एक नजर डालिए इन 11 वजहों पर जिसे इस मेनिफेस्टो में शामिल किया है.
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घटनास्थल पर राहत पहुंचाते पुलिसकर्मी और दाएं उस मेनिफेस्टो का कवर पेज जिसे हमलावर ने रिलीज किया है.

1. जब तक एक भी व्हाइट आदमी जिंदा है, तब तक वो अपने मुल्क पर बाहरी आक्रमणकारियों को कब्जा करने नहीं देगा. वो हमारी जमीन पर कभी कब्जा नहीं कर पाएंगे और वो हमारी जगह कभी नहीं ले पाएंगे. मैं ये हमला उन हजारों हजार लोगों की जान के बदले में कर रहा हूं जो इन बाहरी आक्रमणकारियों ने यूरोप में सदियों से ली हैं.
2. मैं ये हमला उन इस्लामिक लोगों से बदले के लिए कर रहा हूं जिन्होंने हमें सालों तक जेल में बंद रखा.
3. मैं ये हमला यूरोपियन जमीन पर हुए अनेकों आतंकी हमलों में मारे गए लोगों की जान के बदले में कर रहा हूं.
4. मैं ये हमला एब्बा एकरलंद की जान का बदला लेने के लिए कर रहा हूं (एब्बा 11 साल की वो लड़की थी जिसकी स्वीडन के स्टॉकहोम में हुए आंतकी हमले में अप्रैल 2017 में जान चली गई थी )
5. मैं ये हमला सीधे तौर पर यूरोप में बाहरी लोगों के आकर बसने को रोकने के लिए है. मैं उन्हें डराकर और मारकर खत्म कर दूंगा.
6. मैं अपने लोगों के राजनीतिक दुश्मनों को बता देना चाहता हूं कि अगर हमारे लोगों को नजरांदाज किया गया तो आखिर में इसी तरह की घटनाएं होंगी.
7. मैं हिंसा और बदले की भावना फैलाकर अपने यूरोपियन लोगों और इन बाहरियों के बीच में फूट पैदा करना चाहता हूं.
8. मैं उस बात का भी बदला लेना चाहता हूं जहां अपनी पहचान और अपनी जमीन को बचाने के लिए यूरोपियन औरतों, मर्दों और बच्चों ने कभी न खत्म होने वाली लड़ाई में अपनी जान दी है. उन लोगों ने सिर्फ इसलिए जान दी क्योंकि वो इस विदेशी गंदगी से अपनी जमीन छुड़ाना चाहते थे.
9. मैं ये करके दिखाना चाहता हूं कि सीधा एक्शन कैसे किया जा सकता है. मैं उन लोगों को रास्ता दिखा रहा हूं जो मेरी तरह सोचते हैं और अपने पूर्वजों की जमीन को इन विदेशी आक्रमणकारियों से छुड़ाना चाहते हैं. मैं बताना चाहता हूं कि वो अकेले ऐसे नहीं हैं.
10. मैं डर का वो माहौल बनाना चाहता हूं जहां बदलाव के लिए ही सबसे क्रांतिकारी, मजबूत और भीषण प्रयास किए जाएंगे.
11. मैं इतिहास के थमते पैंडुलम को गति देना चाहता हूं, मैं वेस्टर्न सोसाइटी को अस्थिर करके एकजुट होने पर मजबूर करना चाहता हूं ताकि वो वर्तमान की सुखवादी, स्वार्थी और व्यर्थवादी सोच से बाहर निकलें जो पश्चिमी सोच पर हावी हो चुकी है.

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