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बबलू दुबे जेल से किडनैपिंग करता है, फिरौती मांगता है 100 करोड़ की

किसी आदमी को रोकना हो तो कानून कहता है कि उसे सलाखों के पीछे डाल दो. पर मुझे जरा दार्शनिक होने की इजाजत दें. सलाखें भला किसे रोक पाई हैं.

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30 मई 2016 (अपडेटेड: 31 मई 2016, 07:38 AM IST)
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सुरेश केडिया (बीच में), साथ में SP जितेंद्र राणा और SP विनय कुमार.
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किसी आदमी को रोकना हो तो कानून कहता है कि उसे सलाखों के पीछे डाल दो. पर मुझे जरा दार्शनिक होने की इजाजत दें. सलाखें भला किसे रोक पाई हैं. कहानी सुना रहे हैं बिहारी गैंगस्टर बबलू दुबे की. जो पहले नेपाल से ऑपरेट करते थे, अब जेल से करते हैं. वहां बैठे-बैठे किडनैपिंग करवा लिए. फिरौती मांगे 100 करोड़ की.

26 मई 2016

कहानी मुख्तसर इस तरह है. नेपाल के बड़े घराने के उद्योगपति हैं सुरेश केडिया. उनके भाई विमल केडिया वहां सद्भावना पार्टी के सांसद हैं. नामी फैमिली है. सुरेश केडिया नेपाल के बरियारपुर में गढ़ी माई स्थान पर दर्शन करने गए थे. लौट रहे थे कि बरियारपुर के पश्चिम में हथियारबंद लोगों ने कार रुकवा ली. गाड़ी से खींचकर स्कॉर्पियो में बैठाला और लेकर इंडिया चले आए. सुरेश केडिया के ड्राइवर सुरेश कानू ने विरोध किया तो उसे तुरंत गोली मार दी. नेपाल पुलिस ने पीछा करने की कोशिश की पर छू नहीं पाए.
नेपाल का एक अमीर उद्योगपति किडनैप हो चुका था. उसे बिहार के ईस्ट चंपारण के किसी कोने में रखा गया था. केडिया के परिवार को संदेश मिलने में ज्यादा समय नहीं लगा. पूरे 100 करोड़ रुपयों की फिरौती मांगी गई थी.

3 दिन बाद

बिहार के रक्सौल जिले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है. एसपी बेतिया विनय कुमार और एसी मोतिहारी जितेंद्र राणा बैठे हैं. साथ में हैं, किडनैपर्स के चंगुल से छुड़ाए गए सुरेश केडिया. विनय बता रहे हैं कि ये किडनैपिंग बबलू दुबे ने कराई थी. जी हां, बबलू दुबे. और ये सुनकर सामने बैठे पत्रकारों में खुसर-फुसर शुरू हो जाती है.

बबलू दुबे? वो तो जेल में है जनाब!

विनय कुमार बता रहे हैं कि 2013 में जब वो मोतिहारी जिले के एसपी थे, तब नेपाल पुलिस की मदद से ही बबलू दुबे को पकड़ा गया था. 50 हजार का इनामी था. विनय ने बताया कि बिहार पंचायत चुनाव से पहले उसे मोतिहारी जेल से बक्सर जेल भेज दिया गया था. वहीं से उसने ये किडनैपिंग करवाई. इस घटना में दोनों तरफ के बदमाश शामिल हो सकते हैं.
बबलू दुबे
बबलू दुबे की नेपाल में गिरफ्तारी की तस्वीर.

केडिया और पुलिस का अलग-अलग दावा

दोनों पुलिस कप्तानों ने बताया कि सुरेश केडिया को ईस्ट चंपारण के कोटवा में बंधक बनाकर रखा गया था. उनका दावा है कि पुलिस ने किडनैपर्स का पता लगाया और किडनैपर्स उन्हें देख भाग खड़े हुए. लेकिन केडिया का दावा कुछ और है.
वह कह रहे हैं संडे सुबह काला चश्मा लगाकर दो आदमी उन्हें मोटरबाइक पर सड़क किनारे छोड़ गए. वहां से पुलिस ने उन्हें लिया. उनसे मारपीट नहीं की गई, लेकिन हाथ बंधे रहने की वजह से छिल गया है. चेहरा कपड़े से ढंक दिया गया था. किडनैपर्स उन्हें पानी में कुछ मिलाकर देते थे.
मोतिहारी एसपी ने बताया कि शक के आधार पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया. बाद में एक शख्स को अरेस्ट किया गया, जिसके पास से पिस्टल, चार कारतूस और घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की गई.

बबलू दुबे का इतिहास-भूगोल?

30 साल का होगा बबलू. रहने वाला है, मोतिहारी के सिसुवाथान गांव का. बबलू छोटी हाइट का सामान्य सा दिखने वाला लड़का है. सिर्फ देखने पर जाएंगे तो गैंगस्टर बिल्कुल नहीं लगता. मेल पैटर्न बाल्डनेस का शिकार. थोड़ी तोंद भी निकली हुई है.
कभी बिहार की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में था. बिहार में उस पर कत्ल के 36 और किडनैपिंग-फिरौती के दर्जन भर केस चल रहे थे. लेकिन पहली बार जब नीतीश सरकार बनी तो डर के वह नेपाल भाग गया. काठमांडू के सीतापाइला की 'सेफ' कॉलोनी से ऑपरेट करने लगा. तीन साल पहले 28 मई 2013 को, बिहार पुलिस की स्पेशल रिक्वेस्ट पर नेपाल पुलिस ने उसे काठमांडू से ही धर लिया था.
जैसे ही बिहार पुलिस को खबर मिली, वो बबलू को लेने नेपाल पहुंच गई. लेकिन वो नेपाल में भी खूब क्राइम मचा चुका था. वहां पुलिस ने उसकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर दी, जिसकी वजह से उसे तत्काल नहीं सौंपा जा सका.
एक हफ्ते बाद, 4 जून को ही उसे रक्सौल पुलिस को सौंप दिया गया. अब उसका धंधा बिहार में कम और नेपाल में ज्यादा चलता था. वह मोतिहारी जेल से ही नेपाल के व्यापारियों से फिरौती और रंगदारी वसूलने लगा. बताया जाता है कि उसके पास एक दर्जन नेपाली नंबर थे. जिनसे वह बिहार के बड़े सरकारी कर्मचारियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, ईंटा-भट्टा संचालकों और कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिकों को फोन करके रंगदारी वसूलता था.

10 करोड़ फिरौती दी हमने: परिवार

बिहार पुलिस कह रही है कि उन्होंने केस सॉल्व कर दिया है और बाकी सबूतों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है. लेकिन कहानी इतनी सीधी नहीं है. सुरेश केडिया के पारिवारिक सूत्रों की मानें तो उन्हें आजाद कराने के लिए किडनैपर्स को 10 करोड़ रुपये की फिरौती दी गई थी.
केडिया फैमिली के एक मेंबर ने बताया कि फिरौती की रकम काठमांडू से हवाला के जरिए मुंबई भेजी गई. पांच-पांच करोड़ रुपये की दो खेपों में यह पैसा भेजा गया. इसके बाद किडनैपरों ने रविवार दोपहर सुरेश केडिया को मोतिहारी के एक गांव में लाकर छोड़ा. और पुलिस ने किडनैपरों को लोकेट नहीं किया था. खुद किडनैपरों ने पुलिस को केडिया के इस गांव में होने की खबर दी थी.
जांच टीम में रहे नेपाल पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, रक्सौल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस एक किडनैपर की गिरफ्तारी दिखाई गई है, दरअसल उसे अपहरण के ही दिन बरामद की गई स्कॉर्पियो के साथ सुगौली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
कहानी बड़ी पेचीदा है. शक के दायरे में बबलू दुबे भी हैं और पुलिस भी.

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