The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Nepal election result old guard rejection balen shah to become next pm

नेपाल चुनाव: Gen Z के हीरो बालेन शाह प्रचंड जीत की ओर, PM बनना लगभग पक्का, हार रहे ओली

Nepal Eection Result: नेपाल में सरकार बनाने यानी बहुमत के लिए 275 में से 138 सीटों पर जीत दर्ज करना जरूरी है. अभी तक 162 सीटों की काउंटिंग में Balen Shah की राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 122 सीटों पर आगे चल रही है. KP Sharma Oli बुरी तरह हार रहे हैं.

Advertisement
pic
7 मार्च 2026 (अपडेटेड: 7 मार्च 2026, 10:06 AM IST)
Gen Z Nepal election result old guard rejection balen shah
नेपाल चुनाव में बालेन शाह की पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है. (इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

नेपाल में आम चुनाव के वोटों की गिनती जारी है. रुझानों में Gen Z प्रोटेस्ट के नायक बालेन शाह की राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) निर्णायक बढ़त बनाती दिख रही है. पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार बालेन शाह ने झापा-5 निर्वाचन सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को काफी पीछे छोड़ दिया है. ये रुझान ओल्ड गार्ड की सत्ता से विदाई और पहले मिलेनियल प्रधानमंत्री के स्वागत का संदेश दे रहे हैं.

नेपाल में कुल 275 सीटों में से 165 सीटों पर डायरेक्ट इलेक्शन हुआ. इंडिया टुडे से जुड़े पंकज दास की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार, 7 मार्च को सुबह 9 बजे 165 में से 162 सीटों की काउंटिंग में राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) 122 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि नेपाली कांग्रेस 17, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट (CPN-UML) 10 और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) सिर्फ 10 सीटों पर आगे है. इसके अलावा, श्रम संस्कृति पार्टी (SSP) 3, राष्ट्रिय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) 1 और स्वतंत्र 1 सीट पर आगे चल रही हैं.

नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनावों में 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने वोट डाले हैं. वोटों की गिनती में 3 से 4 दिन लगने की उम्मीद है. नेपाली चुनाव आयोग ने बताया है कि 9 मार्च तक काउंटिंग पूरी करने की कोशिश की जाएगी.

नेपाल में कुल 275 सीटों पर प्रतिनिधि चुने जाने हैं. लेकिन यहां मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम है. एक बैलेट पेपर में वोटर अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार को वोट देता है. इस व्यवस्था को First Past The Post (FPTP) या प्रत्यक्ष मतदान कहते हैं. इसके तहत 165 सांसद चुने जाएंगे. जिसकी काउंटिंग में अभी बालेन शाह की पार्टी 122 सीटों पर आगे चल रही है.

दूसरे बैलेट पेपर में राजनीतिक पार्टी वोट देती है. जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उसे संसद में सीट मिलती है. इस व्यवस्था को Proportional Representation (PR) सिस्टम कहा जाता है. इस सिस्टम से 110 सदस्य चुने जाने हैं. इसकी गिनती अभी शुरू नहीं हुई है. लेकिन मधेशी आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारी और स्वतंत्र राजनीतिक कार्यकर्ता रमन पांडे ने बताया कि इनकी गिनती में भी बालेन शाह की पार्टी को भारी बढ़त मिलने की उम्मीद है.

नेपाल में सरकार बनाने यानी बहुमत के लिए 275 में से 138 सीटों पर जीत दर्ज करना जरूरी है. अभी तक 162 सीटों की काउंटिंग में ही राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी 122 सीटों पर आगे चल रही है. यानी नेपाल में केपी शर्मा ओली के शासन की विदाई होने जा रही है और जेन-Z प्रोटेस्ट से चर्चा में आए बालेन शाह नेपाल का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है.

बालेन शाह का पूरा नाम बालेन्द्र शाह है. वो साल 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर चुने गए थे. शाह ने 2026 नेपाल आम चुनाव में साल 2022 में बनी राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी के साथ चुनाव लड़ने का समझौता किया. समझौते के तहत उनको पार्टी के संसदीय दल का नेता और चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. जबकि रवि लामिछाने को राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया.

कौन हैं बालेन शाह ?

साल 2017 में नेपाल में स्थानीय चुनाव हो रहे थे. एक नौजवान ने वोटिंग के दिन अपने फेसबुक पेज पर लिखा, आज मैं वोट नहीं करूंगा. मैं उम्मीदवार नहीं हूं. मैं सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हूं और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स कर रहा हूं. मुझे पता है कि कैसे एक देश को संवारा जाता है. मैं अपना वोट अगले चुनाव में खुद को दूंगा. मैं अपने देश की तरक्की चाहता हूं और इसके लिए किसी और पर निर्भर नहीं रह सकता.

इस नौजवान की पहचान एक उभरते रैपर के तौर पर बन रही थी. लेकिन कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं होने के चलते उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया. बात आई गई हो गई. लेकिन साल 2022 में काठमांडू के मेयर चुनाव में उसने निर्दलीय ताल ठोक दी. तब भी काठमांडू के बाहर कई लोग उन्हें सीरियसली नहीं ले रहे थे. लेकिन उसने नेपाल की सभी स्थापित पार्टियों को हराकर पांच साल पहले कही गई बात साबित कर दी. 32 साल के इस नौजवान का नाम है बालेन्द्र शाह उर्फ बालेन शाह. झापा-5 सीट पर ही उनकी पूर्व पीएम ओली से भिड़ंत है, जिसमें ओली बुरी तरह हार रहे हैं.

जेन जी आंदोलन से देश भर में राजनीतिक स्वीकार्यता

बालेन शाह का जन्म 1990 में काठमांडू के गौरीगांव में हुआ था. उनके पिता डॉ. राम नारायण शाह एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं और उनकी मां ध्रुवदेवी शाह एक होममेकर हैं. बालेन और उनकी पत्नी सबीना काफले की एक बेटी है.

बालेन शाह किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े थे. उनके पास कोई संगठन या राजनीतिक अनुभव भी नहीं था. नेपाल में जब जेन जी का आंदोलन शुरू हुआ तो सोशल मीडिया पर लोग उनसे मेयर के पद से इस्तीफा देकर नेतृत्व करने की अपील करने लगे. बालेन शाह जेन जी आंदोलन का समर्थन कर रहे थे. वो सड़क पर नहीं उतरे लेकिन सोशल मीडिया पर लगातार आंदोलन के समर्थन में मुखर थे.

नेपाल के अखबार माई रिपब्लिका के मुताबिक, बालेन शाह बचपन से संगीत प्रेमी थे. इनकी पहचान स्ट्रक्चरल इंजीनियर, रैपर, एक्टर, म्यूजिक, प्रोड्यूसर, गीतकार और एक कवि की रही है. बतौर रैपर उनके कई गाने काफी लोकप्रिय हुए हैं. जिसमें ‘आम नेपाली बुबा’, ‘पुलिस पत्रिकार’, ‘नेपाल हासेको’ जैसे गाने शामिल हैं. इन गानों में नेपाल की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर कमेंट्री है. इंटरनेट ने ही बालेन शाह की पैन नेपाल छवि गढ़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है.

बालेन शाह ने काठमांडू के वॉइट हाउस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वहीं कर्नाटक के विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री ली. बालेन कॉलेज की पढ़ाई के दौरान भी छात्र राजनीति में सक्रिय रहे थे. लेकिन चुनावी राजनीति में आगाज साल 2022 में मेयर के चुनाव से ही किया.

बालेन अक्सर काला चश्मा लगाए रखते हैं. सत्ता के खिलाफ बोलने के चलते उनकी काफी प्रशंसा की जाती है. हालांकि बालेन शाह की राजनीतिक विचारधारा को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. उनके बयान अक्सर सत्ता को निशाना बनाने वाले होते हैं. लेकिन अब तक उन्होंने कोई वैचारिक स्टैंड नहीं लिया है.

मधेशी पहचान को लेकर मुखर नहीं

बालेन शाह मूल रूप से मधेश प्रांत के महोत्तरी जिले के रहने वाले हैं. नेपाल की राजनीति में किसी मधेशी रूट वाले नेता का काठमांडू और पहाड़ियों के बीच लोकप्रिय होना आसान नहीं है. शायद इसीलिए बालेन शाह कभी भी बहुत मुखर होकर मधेशियों के मुद्दों के साथ खड़े नहीं हुए. उनका जन्म भी काठमांडू के नेवारी इलाके में हुआ है. रमन पांडे बताते हैं कि साल 2015 में मधेशियों के आंदोलन का दमन किया गया लेकिन तब बालेन शाह ने इसको लेकर चुप्पी साधे रखी.

बीबीसी से बातचीत में नेपाल के प्रसिद्ध लेखक और चिंतक सीके लाल ने बालेन शाह के राजनीतिक उभार की तुलना यूक्रेन के जेलेंस्की से की. जेलेंस्की राष्ट्रपति बनने से पहले कॉमेडियन थे. उनके मुताबिक, 

पॉपुलिस्ट नेता ऐसे ही आंदोलनों से आते हैं. लेकिन उनके साथ दिक्कत होती है कि उनके पास कोई संगठन नहीं होता है और न ही कोई विचारधारा होती है. कई बार भीड़ के आगे आने से जो नेतृत्व पैदा होता है उससे बहुत परिवर्तन की उम्मीद लगाना खतरे से खाली नहीं होता.

हालांकि बालेन शाह अपनी रैलियों में डिजिटल गवर्नेंस से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे की बेहतरी के लिए योजनाओं की बात करते नजर आए हैं. आम चुनाव के रुझान बताते हैं कि नेपाली जनता ने उनके वादों पर ऐतबार जताया है. अब देखना होगा कि अब तक सत्ता की मुखालफत करने वाले बालेन शाह सत्ता मिलने पर नेपाल में कोई बुनियादी बदलाव ला पाते हैं या नहीं.

वीडियो: नेपाल में कौन से वीडियो पर हिंसा भड़क उठी? भारत-नेपाल सीमा पर क्या माहौल?

Advertisement

Advertisement

()