मध्य प्रदेश की जेलों से ही क्यों भागते हैं कैदी?
कैदियों के भागने में मध्य प्रदेश का दूसरा नंबर है.
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Image: PTI
मध्य प्रदेश में जेल से फरार आठ संदिग्ध आतंकी मुठभेड़ में मार दिए गए. इस मामले पर जो कहानियां चल रही हैं उन्हें थोड़ा पॉज दो. दिमाग इधर डाइवर्ट करो. आठ लोगों की फरारी के बाद एमपी सरकारी जागी है. इस भगेलू केस की जांच के ऑर्डर दिए हैं. लेकिन मध्य प्रदेश का पुराना रिकॉर्ड देखो. कैदियों के जेल से भागने में इसका नंबर दो है.
'हिंदुस्तान टाइम्स' की खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पिछले 15 साल में 28 बार कैदी जेल से भागे हैं. माने साल में दो बार का एवरेज रखो. पहले पायदान पर राजस्थान कब्जा जमाए है. इतने ही टाइम में वहां 55 बार जेल से फरारी हुई. ये डेटा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने दिया है. इन दोनों प्रदेशों में इस वक्त बीजेपी की सरकार है. भोपाल की जिस सेंट्रल जेल से आठों संदिग्ध आतंकी फरार हुए, वो देश की सबसे हाईटेक जेलों में से है. लेकिन हैरत है कि उसके ताले लकड़ी और चम्मच से खुल जाते हैं.
2013 में यही मौसम रहा. अक्टूबर का महीना. जब सात SIMI मेंबर खंडवा से निकल भागे थे. दो साल भागते रहे, फिर दबोचे गए. जो सोमवार की रात भागे थे, उनमें से तीन पिछले भगोड़ों में थे. माने ये लोग दूसरी बार लॉटरी जीते थे. लेकिन मार दिए गए, बैड लक.2001 से 15 तक तो NCRB ने सर्वे करके इतने मामले बताए हैं. 2013 में CAG अर्थात कॉम्पट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल ने ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी. जिसमें लिखा था कि 2007 से 12 तक 91 बार जेल से भागने की वारदातें हुई हैं. 96 कैदी भागे. और जो भागे उनमें 57 बाउंड्री कूद कर भागे. चाय में नशा मिलाकर और सिक्योरिटी स्टाफ की लापरवाही से भागे.इस केस में भी पता चला कि तीन दिन से CCTV खराब थे. दो कांस्टेबल लगाए गए थे वो भी लप्पूझन्ना हथियारों के साथ. जब लोगों को फरारी थाली में परोसकर दोगे तो वो भागेंगे नहीं? बाकी कॉन्सिपरेसी वगैरह का क्या है. अभी सौ तरह की बातें होंगी. रेडी रहो सुनने धुनने के लिए.
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