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सूरत के बाद अब राहुल को दिल्ली वाले मामले में भी सज़ा होगी?

राहुल गांधी ने दिल्ली रेप मामले में पीड़िता के माता-पिता की तस्वीर ट्वीट की थी. NCPCR का कहना है कि राहुल ने ऐसा करके JJ एक्ट का उल्लंघन किया है.

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28 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 29 जुलाई 2023, 01:25 PM IST)
Rahul gandhis tweet of photo of minor rape victims parents
इस केस की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी. (फ़ोटो/आजतक)
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1 अगस्त, 2021 को दिल्ली में 9 साल की लड़की का पहले गैंग रेप और फिर हत्या हुई. घटना के बाद राहुल गांधी रेप पीड़िता के परिजनों से मिले. इस बीच उन्होंने रेप पीड़िता के माता-पिता से साथ फ़ोटो खिंचवाई और उसे ट्विटर पर शेयर कर दिया. इस मामले में तब राहुल का ट्विटर प्रोफाइल ब्लॉक हुआ था, उनके खिलाफ तहरीरें दी गई थीं और दिल्ली हाईकोर्ट में उनके खिलाफ जनहित याचिकाएं लग गई थीं. और अब इनके चलते राहुल की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं.

28 जुलाई 2023 को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि रेप पीड़िता के परिवार की फ़ोटो शेयर करके राहुल गांधी ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 (किशोर न्याय) के कानून, POCSO और भारतीय दंड संहिता IPC की धाराओं का उल्लंघन किया है. कोर्ट में आयोग के इस हलफनामे ने ये साफ कर दिया है कि सूरत के बाद राहुल एक और मामले में अदालतों के चक्कर लगाते नज़र आ सकते हैं.

केस क्या था?

1 अगस्त 2021 को दिल्ली के ओल्ड नांगल में एक 9 साल की दलित लड़की के माता-पिता को बताया गया कि उनकी बेटी की करंट लगने से मृत्यु हो गई और दाह संस्कार कर दिया गया है. माता-पिता के मुताबिक ये एक झूठ था और कुछ लोगों ने बच्ची का रेप करके उसकी हत्या कर दी और सबूत छिपाने के लिए उसके शव को जलाकर अंतिम संस्कार बता दिया.

माता-पिता की शिकायत पर इस मामले में हत्या और नाबालिग से रेप का मामला कायम किया गया था. एक पुजारी समेत चार लोगों को गिरफ़्तारी हुई. स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किए थे, जिसके बाद ये खबर देश-भर में फैली. राहुल गांधी भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुचे. इसके बाद राहुल ने जो ट्वीट किया, उसमें पीड़िता के माता-पिता नज़र आ गए. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस मामले में राहुल पर पीड़िता की पहचान जाहिर न करने का कानून तोड़ने का आरोप लगाया. राहुल के खिलाफ विनीत जिंदल नाम के एक वकील ने दिल्ली पुलिस को एक तहरीर दी. और राहुल के खिलाफ FIR दर्ज करने को लेकर मकरंद सुरेश म्हादलेकर नाम के सामाजिक कार्यकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगा दी.

जब तक ये सब हुआ, NCPCR ने स्वतः संज्ञान लेते हुए. ट्विटर और फेसबुक समेत दूसरी सोशल मीडिया साइट्स को नोटिस जारी किए. और ये तस्वीर हटवाई.

राहुल गांधी पर क्या आरोप?

5 अक्टूबर, 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस डीएन पटेल की बेंच ने याचिका पर ट्विटर को नोटिस जारी किया. इसी मामलें में अब NCPCR का हलफनामा आया है. इसमें आयोग ने कहा,

“राहुल गांधी ने नाबालिग पीड़ित लड़की के माता-पिता के साथ अपनी मीटिंग की फ़ोटो सोशल मीडिया पर शेयर की, जिससे नाबालिग लड़की की पहचान का खुलासा हुआ. उनका ट्वीट जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 का उल्लंघन करता है. इस एक्ट के तहत पीड़िता के परिवार से जुड़ी ऐसी कोई भी जानकारी, जिससे नाबालिग पीड़िता की पहचान हो सके, वो किसी भी माध्यम से बाहर नहीं आनी चाहिए. "

आगे NCPCR ने कहा कि घटना से संबंधित शिकायत मिलने के बाद, राहुल गांधी द्वारा किए गए "गंभीर अपराध" को ध्यान में रखते हुए, पोस्ट को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस और ट्विटर को लिखा था. नोटिस पर ट्विटर ने भारत में पोस्ट को ब्लॉक कर दिया, लेकिन इस ट्वीट को भारत से बाहर देखा जा सकता है. इसे भी आयोग ने POCSO और JJ एक्ट का उल्लंघन माना है.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने केस से जुड़े लोगों से 8 हफ्ते में हलफनामा मांगा है. अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी.

कानून क्या कहता है, क्या सजा हो सकती है?

राहुल के लिए मुश्किलें कितनी बढ़ेंगी, ये इसपर निर्भर करेगा कि उनपर कौनसे मामले में कार्रवाई होती है और उन्हें कहां छूट मिलती है. ये कोर्ट के विवेक पर निर्भर है. फैसला आने से पहले, उस कानून की चर्चा कर लेते हैं, जिसे तोड़ने का आरोप NCPCR ने राहुल पर लगाया है.
आयोग ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 का हवाला दिया है. इस एक्ट को समझने के लिए दी लल्लनटॉप ने सुप्रीम कोर्ट के वकील ईलिन सारस्वत से बात की. उन्होंने बताया कि यह एक्ट 18 साल तक के बच्चों के लिए बनाया गया है. इस एक्ट के तहत कार्रवाई का पॉवर जिला अधिकारी के पास होता है. मतलब जिला अधिकारी फैसला करेगा, केस दर्ज होगा या नहीं. केस की सुनवाई के लिए अलग से जुवेनाइल डिस्ट्रिक्ट बोर्ड बनता है. ट्रायल होते हैं. सारी चीज़ें कोर्ट रूम प्रोसिडिंग जैसी ही होती हैं. लेकिन कुछ चीज़ें अलग होती है. यह एक्ट सिर्फ अपराधों के लिए ही नहीं बनाया गया है. इसकी दो कैटेगरी है. 
1)  जो बच्चे क्राइम करते हैं
- अगर नाबालिग का अपराध गंभीर नहीं होगा (चोरी या कुछ) तो उसकी सजा उस अपराध के हिसाब से होगी. उसे आम कोर्ट में ट्रायल पर नहीं लेकर जाया जाएगा. 
- 16-18 साल के नाबालिग अगर गंभीर अपराध (रेप, मर्डर) करते हैं, तो उनका केस ट्रायल पर ले जाया जा सकता है, बशर्ते एक बोर्ड इसकी अनुशंसा करे.  

इस एक्ट की तीन अहम बातें हैं, जिन्हें नाबालिग़ों के हक को ध्यान में रखते हुए शामिल किया गया है -
- नाबालिग को बेल मिल सकती है. 
- पुलिस गिरफ़्तार नहीं कर सकती. 
- पुलिस डायरेक्टली इन्वेस्टिगेट नहीं कर सकती. ज़िलाधिकारी इन फैसलों में शामिल रहते हैं.

2) जिन बच्चों को प्रोटेक्शन की जरूरत होती है 
इस कैटेगरी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) देखती है. इसमें ड्रिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमिटी बनाई गई है. ये कमिटी एक जिले में एक से ज़्यादा भी बन सकती है. सब राज्य सरकार पर निर्भर करता है. इसमें बच्चों को प्रोटेक्शन और देखभाल दी जाती है. जैसे-
- अनाथ बच्चों का ध्यान रखना
- बच्चों का एडॉप्शन ठीक से करवाना
- रेप सर्वाइवर की मदद
- रेप से पैदा हुए बच्चों की देखभाल
- चाइल्ड ट्रैफ़िकिंग से बच्चों को बाहर निकालना और उनका ध्यान रखना.

जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत किसी भी नाबालिग के साथ गंभीर अपराध करने वाले को 3 साल से लेकर 7 साल की सजा का प्रावधान किया गया है. इसका मतलब राहुल की चुनौती छोटी तो नहीं है. मकरंद सुरेश म्हादलेकर ने मांग की है कि हाईकोर्ट राहुल के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दे. और NCPCR की राय अब कोर्ट के सामने है. कि JJ एक्ट का मामला तो बनता है.

ट्विटर की दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं

मामले में कोर्ट को दिए अपने जवाब में ट्विटर ने कहा कि राहुल गांधी ने पीड़िता के माता-पिता से अनुमति लेकर तस्वीर ट्वीट की थी. और ट्विटर ने भारतीय कानूनों के अमल में ट्वीट हटा दिया है. लेकिन वो दुनिया के बाकी देशों में ऐसा नहीं कर सकता, क्योंकि क्षेत्राधिकार अलग-अलग हैं. लेकिन NCPCR का कहना है कि चूंकि ट्वीट अब भी दुनिया के दूसरे देशों में देखा जा सकता है, इसीलिए पहचान ज़ाहिर न करने को लेकर भारतीय कानूनों का उल्लंघन तो ट्विटर अब भी कर ही रहा है. इसका मतलब ट्विटर के लिए संकट के बादल छंटे नहीं हैं.

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