The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Narendra modi's new minister KJ Alphons justifies fuel price hike, says 'someone who has a car is not starving'

पेट्रोल-डीजल के दाम तो जनता झेल लेगी, आपके इस मंत्री को झेलना मुश्किल है मोदीजी

पहले बीफ खाने का भी जुगाड़ बता चुके हैं.

Advertisement
pic
16 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 16 सितंबर 2017, 11:26 AM IST)
Img The Lallantop
मोदी के नए मंत्री अल्फोंस कन्ननथनम का नया बया सरकार की मुश्किलें बढ़ाने वाला है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था. पक्का बीजेपी वाले कुछ दिन में यही कहते दिखेंगे. वजह एक नए-नए मंत्री बने अल्फोंस कन्ननथनम हैं, जिनकी जुबान में कोई लगाम नहीं है. पता नहीं क्यों इनको कोई सेंटर फ्रेश नहीं दे रहा है. जो मन में आ रहा है, बोले जा रहे हैं. और अबकी बार तो इन्होंने गलत लकड़ी ले ली है. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते रेटों पर जवाब देने के बजाए जनता को ही कोस दिया है, पहले पूरी बकवास. सॉरी बयान पढ़िए-
# पेट्रोल वही लोग खरीदते हैं जिनके पास कार-बाइक है. निश्चित तौर पर वे भूखे नहीं मर रहे.
# जो इसका खर्च उठा सकते हैं उन्हें पैसे तो देने होंगे.
# हम यहां पिछड़ों के कल्याण के लिए, प्रत्येक गांव को बिजली देने, घर बनाने, टॉयलेट बनाने के लिए हैं. इस पर काफी सारा पैसा खर्च होगा. इसलिए हम उन लोगों पर टैक्स लगा रहे हैं जो इस काबिल हैं.
यही हैं नए-नए बने अल्फोंस कन्ननथनम.
यही हैं नए-नए बने अल्फोंस कन्ननथनम.

मैं कहता हूं- टैक्स लीजिए ना सर. बकैती काहे कर रहे हैं. और बकैती कर ही रहे हैं तो कायदे की करिए. पढ़े-लिखे लोगों की तरह. आप कह रहे हैं पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले लोग भूखे नहीं मर रहे हैं. ठीक कहा. वो इतनी आसानी से नहीं मरेंगे. मेहनत की खाते हैं ना. पर जो गरीब आदमी, किसान मर रहा है, वो इसी पेट्रोल-डीजल के बढ़ते रेटों की वजह से ही मर रहा है. जानिए कैसे-
1. ट्रैक्टर, जनरेटर, पंप पानी से नहीं चलते...
ये ट्रैक्टर डीजल से ही चलता है.
ये ट्रैक्टर डीजल से ही चलता है.

अल्फोंस साहब. खेती के बारे में तो सुना ही होगा. वो बाइक-कार चलाने वाले नहीं करते हैं. देश का गरीब, मेहनती और खुद्दार. जी हां खुद्दार किसान करता है. खेती करते वक्त ट्रैक्टर, ट्यूबवेल, थ्रैशर, दवा छिड़कने वाली मशीनों को चलाने के लिए डीजल की जरूरत पड़ती है. वही डीजल जिस पर आपकी सरकार 11 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ा चुकी है. कभी किसी किसान के पास चले जाइयेगा बता देगा. इन बढ़ते दामों से खेती उसके लिए कितने घाटे का सौदा होती जा रही है. 2014 से 2015 के बीच देश में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े 40 फीसदी ऐसे ही नहीं बढ़ गए थे. बाइक-कार वालों से बेशक टैक्स लीजिए पर गरीब किसानों को मरने ना दीजिए..
2. बस-टेम्पो हवा से नहीं चलते हैं
किराया देने के बाद धक्का अलग लगाना पड़ता है.
किराया देने के बाद धक्का अलग लगाना पड़ता है.

पब्लिक ट्रांसपोर्ट नाम की एक चीज होती है. इसमें बस, ऑटो, टेंपो जैसी चीजें आती हैं. शायद आप भी कभी बैठे होंगे. ये सब चीजें भी डीजल-पेट्रोल से ही चलती हैं. इनमें देश का गरीब, किसान और आम आदमी चलता है. इनके पास चार्टर्ड प्लेन नहीं होते हैं. जब डीजल-पेट्रोल का रेट बढ़ता है तो टिकट का रेट यानी किराया भी बढ़ जाता है. कभी खरीदी होगी आपने शायद. इस बढ़े किराये का बोझ भी देश के गरीब की जेब पर पड़ता है. अब रोज तो आप नेता लोगों की रैली होती नहीं है कि मुफ्त में सवारी करने को मिल जाए.
3. खाना-पीना खुद चल के नहीं आता घर
ट्रकों का ना जाने कितना डीजल तो जाम में फुंक जाता होगा.
ट्रकों का ना जाने कितना डीजल तो जाम में फुंक जाता होगा.

आसाम से चाय पत्ती, हिमाचल से टमाटर, नासिक से प्याज और ऐसी ही अन्य चीजें देश के अलग-अलग हिस्सों में पैदल चल के नहीं जाती हैं. ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों से जाती हैं. और इन ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों में भी डीजल पड़ता है. सो जैसे ही सरकार तेल के रेट बढ़ाती है. ट्रांसपोर्ट वाले माल ढोने का किराया बढ़ा देते हैं. फिर सब्जी, दाल, चाय की पत्ती के व्यापारी अपने सामान का रेट बढ़ा देते हैं. और ऐसे ही बढ़ते-बढ़ाते ये आम आदमी तक पहुंचता है. इस आपदा को महंगाई कहते हैं. इस बला से पूरा देश त्रस्त है. आम आदमी को संसद में सब्सिडी वाली थाली तो मिलती नहीं है ना सरजी.
4. भूलिये मत-मिडिल क्लास सबसे ज्यादा त्रस्त है
जब तेल का रेट बढ़ता है तो लाइन लगाने का कष्ट अलग.
जब तेल का रेट बढ़ता है तो लाइन लगाने का कष्ट अलग.

कानों को सुन के कितना अच्छा लगा कि केंद्र सरकार गरीबों के लिए काम कर रही है. बिल्कुल करिए. पर कार-बाइक से चलने वाले मर नहीं रहे हैं, ये कहके आपने इस देश के मिडिल क्लास को छेड़ दिया है. इस कार-बाइक से मिडिल क्लास ही चलता है. कमसकम बाइक तो उनका पुष्पक विमान है ही. तो जो आप पेट्रोल-डीजल का रेट दुनिया भर के टैक्स लगाकर बढ़ाए जा रहे हैं. उससे इस मिडिल क्लास की जेब ढीली हो रही है. महंगाई से उसका घर का पूरा बजट बिगड़ रखा है. थोड़ा अपनी नीतियों और ज्यादा अपनी पर जुबान दीजिए. क्योंकि ये आम आदमी भी वोट देता है.
इसको मंत्री किसने बनाया?किसी से कोई यही पूछने वाला है.
इसको मंत्री किसने बनाया?किसी से कोई यही पूछने वाला है.

लगता है इन महाशय को चर्चा में रहने का बहुत शौक है. तभी मीडिया का माइक देखते उतावले हो जाते हैं और गोड़ देते हैं. कुछ दिन पहले भुवनेश्‍वर में बोले थे- विदेशी पर्यटक अगर भारत आना चाहते हैं तो उससे पहले अपने देश में ही बीफ खाकर आएं. उनसे बीफ पाबंदी पर सवाल किया गया था. खैर गलती मीडिया वालों की ही रही होगी. आपसे सवाल जो पूछ लिया. आगे से हम ही लोग ध्यान रखेंगे. या एक तरीका है. आप मेंटोस खा लिया करो. सुना है इससे दिमाग की बत्ती जल जाती है.


वीडियो देखें- 

ये भी पढ़ें:
मोदी के ‘नसीब’ से कम हुए तेल के दाम पर अब किसके नसीब का साया है?

GST: प्रेमियों के लिए भी अलग-अलग टैक्स स्लैब ज़रूरी है

पढ़िए GST के बारे में सबकुछ, आसान भाषा में

GST से मोमो सस्ते होंगे कि महंगे, जानते हो?

 

Advertisement

Advertisement

()