नरेन्द्र मोदी का सन्देश: कश्मीर का राग छोड़ो, तुम दे के रहोगे बलूचिस्तान
भाषण में PM मोदी ने भारत की कूटनीति जोरदार कर दी.
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फोटो - thelallantop
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गाज़ियों में जब तलक बू रहेगी ईमान की, तख़्त-ए-लन्दन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की.
बलूचिस्तान, गिलगिट और पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों ने मुझे धन्यवाद बोला है. ऐसी जगहों से ऐसे सन्देश आये हैं, जहां मैं कभी गया नहीं, जहां के लोगों से मैं कभी मिला नहीं. मैं उनका आभारी हूं.
कुछ लोग कह रहे हैं कि ये नरेन्द्र मोदी का नवाज शरीफ को जवाब है. नवाज शरीफ ने 14 अगस्त के पाकिस्तान स्वतंत्रता दिवस को कश्मीर को डेडीकेट किया था.15 अगस्त के भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ऐसी बात कही है, जो भारत के किसी प्रधानमंत्री ने इतना खुलकर कभी नहीं कहा था. लाल किले से प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान का जिक्र किया. कहा: इस भाषण से पहले, पिछले सप्ताह कश्मीर के ऊपर एक ऑल-पार्टी मीटिंग में नरेन्द्र मोदी ने बलूचिस्तान का जिक्र किया था. ये भी कहा था कि इस्लामाबाद को अपने ही लोगों पर किए अत्याचार की सफाई देनी पड़ेगी. बलूचिस्तान और PoK में किये अत्याचारों के बारे में दुनिया को बताना होगा. इस मीटिंग की बातें जब मीडिया में आईं तो बलोच नेताओं ने नरेन्द्र मोदी को थैंक यू बोला था. 1947 से ही वहां स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी जा रही है. पर ना बोलने से कौन सा कश्मीर को पाकिस्तान छोड़ रहा है? आज़ादी के बाद से अब तक भारत हमेशा रक्षात्मक स्थिति में ही रहा है. अपने ही पार्ट कश्मीर के लिए हमेशा भारत को सफाई देनी पड़ी है. पाकिस्तान हर मुद्दे पर कश्मीर को घसीट लाता है. आज तक वहां के शासक इस बात को नहीं समझ पाए कि कश्मीर भारत का अंदरूनी मुद्दा है. रही बात घेरने की, तो नरेन्द्र मोदी ने निश्चित रूप से ये पॉइंट निकाला है, जहां पाकिस्तान को धरा जा सकता है.
कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि नरेन्द्र मोदी के कहने से पाकिस्तान को मौका मिल जायेगा कश्मीर पर अपना हक़ जताने का.
2009 में शर्म-अल-शेख में भारत-पाक बातचीत के दौरान बलूचिस्तान का मुद्दा आया था. भारत ने लगभग मान लिया था कि बलूचिस्तान में इसका भी कुछ रोल है. इस बात पर पार्लियामेंट में बड़ा हंगामा हुआ था. पर अब बात बदल गई है. प्रधानमंत्री के बलूचिस्तान के बारे में कहने से भारत की कूटनीति थोड़ी मजबूत होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि जितनी जमीन के लिए लड़ाई है, उससे ज्यादा जमीन के लिए अपना दावा ठोंकना चाहिए.
क्या है बलूचिस्तान का मुद्दा?
बलूचिस्तान से हमेशा ऐसी ही ख़बरें आती हैं: 13 लोग गायब. खुदाई में कंकाल मिले. सेना की गोलीबारी. हत्या. मार-काट.
किसी को नहीं पता कि वहां 1947 से अब तक कितने लोग मरे हैं. क्योंकि वहां पत्रकारों तक को नहीं छोड़ा जाता है.

बलूचिस्तान का नक्शा- tamil.net से
1947 में ब्रिटिश राज से आज़ाद होने के बाद क्या हुआ है यहां, पढ़िए:
1.
बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान के बीच का हिस्सा है. पाकिस्तान के एरिया का 44% है ये, पर यहां पाक की कुल आबादी के मात्र 5% लोग रहते हैं. सुन्नी इस्लाम यहां का मेन धर्म है.
2.
ब्रिटिश राज में ये ब्रिटिश इंडिया में ही आता था. उस वक़्त यहां चार राज्य थे: मकरान, लस बेला, खरान और कलात. 1947 में भारत की आज़ादी के बाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया. पर 'कलात के खान' यार खान ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान से अपनी आज़ादी की घोषणा कर दी. जिन्ना ने बड़ा प्रेशर बनाया. फिर 1948 में पाक आर्मी ने कलात पर हमला कर कब्ज़ा कर लिया. यार खान संधि के लिए मजबूर हो गए. पर उनके भाइयों ने जंग छेड़ दी.
3.
इनके बाद नवाब नौरोज खान ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़नी शुरू की. उनके परिवार के कई लोगों को फांसी दे दी गई.
4.
1960 के बाद लड़ाई और ज्यादा बढ़ गई. पर पाक आर्मी ने 1970 के आस-पास बलोच विद्रोहियों को काबू में कर लिया. पाकिस्तानी प्रेसिडेंट याह्या खान ने बलूचिस्तान को पाक का चौथा राज्य घोषित कर दिया. पर ये लड़ाई छिटपुट रूप से 1980 तक चलती रही.
5.
2004 में ग्वादार पोर्ट में बलूच विद्रोहियों ने हमला कर कुछ लोगों को मार दिया. फिर आर्मी से भी झंझट की. बलोच नेताओं ने पाकिस्तान को मेमोरंडम भी दिया कि हमारी मांगें पूरी करो. पर 2006 में 80 साल के बूढ़े बलोच नेता अकबर बुगती को पाक आर्मी ने मार दिया. इरादा था किसी भी विद्रोह को दबाना. 2009 में कलात के खान सुलेमान दाऊद ने अपने आप को बलूचिस्तान का शासक घोषित कर दिया. पर इससे कुछ हुआ नहीं. जंग जारी है. पाक आर्मी अपना काम करती रही. जिसके बारे में दुनिया को पता नहीं है. पर इतना अंदाज़ा जरूर है कि कुछ बुरा हो रहा है.
6.
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा एरिया है. पाकिस्तान की GDP में बलूचिस्तान का हिस्सा दिन पर दिन घटता जा रहा है. क्योंकि वहां कोई इंडस्ट्री लगती नहीं. शिशु मृत्यु दर और डिलीवरी के दौरान मौतें भी बहुत ज्यादा हैं वहां. पाकिस्तान में सबसे कम पढ़े-लिखे लोग वहीं हैं.
7.
ग्वादार पोर्ट बलूचिस्तान में ही आता है. पर यहां से होनेवाली आमदनी में बलूचिस्तान का हिस्सा उतना नहीं है. इसके चलते यहां पर कोई डेवलपमेंट नहीं होता.
8.
इंडिया, इजराइल, अफगानिस्तान पर पाकिस्तान हमेशा इल्जाम लगाता रहा है कि ये लोग बलूचिस्तान में आतंकवाद बढ़ाते हैं.
9.
पिछले दस साल में पाया गया है कि बलोच लोग रहस्यमय ढंग से गायब हो रहे हैं. अचानक ही कोई डेड बॉडी दिख जाती है. किसी के नाखून उखड़े रहते हैं. जलने के निशान रहते हैं. हड्डियां टूटी हुईं. कभी-कभी सिर में छेद ड्रिल किया हुआ मिलता है.
कुल मिलकर बलूचिस्तान की स्थिति बहुत ही ख़राब है. पाकिस्तान ने बन्दूक के दम पर 70 साल से रखा हुआ है बलूचिस्तान. पर कश्मीर के हालात बिगाड़ने में उसकी विशेष दिलचस्पी है. इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निश्चित रूप से वो दांव खेला है, जो भारत की कूटनीति को एक हाथ ऊपर ले जायेगा.
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