रेप के आरोप में जेल में बंद आसाराम के बेटे नारायण साईं को सूरत के सेशन कोर्ट नेरेप का दोषी करार दिया है. करीब 11 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने नारायण साईंको उम्रकैद की सजा दी है. अब नारायण साईं ताउम्र जेल में ही रहेगा. कोर्ट ने उसपरएक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इसके अलावा नारायण साईं के चार साथियों को10-10 साल की सजा कोर्ट ने सुनाई है.अब नारायण साईं और उसके साथी सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे. सूरत की सेशनकोर्ट ने 26 अप्रैल को ही नारायण साईं को दोषी करार दिया था. उसी दिन कोर्ट ने तयकिया था कि सजा 30 अप्रैल को सुनाई जाएगी. 30 अप्रैल को सूरत पुलिस ने कोर्ट केआस-पास सुरक्षा बढ़ा दी थी. आशंका जताई जा रही थी कि कोर्ट के आस-पास नारायण साईंके समर्थक पहुंच सकते हैं. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी थी. पुलिस ने सुरक्षा केबीच नारायण साईं को जेल भेज दिया.सूरत की दो बहनों से बाप-बेटे ने किया था बलात्कारसूरत की दो बहनों का आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं पर अटूट विश्वास था. कैरेवनकी रिपोर्ट के अनुसार, दोनों बहनों में बड़ी बहन को सबसे पहले 1996 में घरवालों नेअहमदाबाद के आश्रम भेजा था. तब वहां 12 दिन का अनुष्ठान था. इसके बाद जब घरवालेबेटी को लेने पहुंचे तो आसाराम की पत्नी लक्ष्मी देवी ने घर वालों को समझा-बुझा करउसे गुरु के पास ही रहने को तैयार कर लिया. भक्ति में खोया परिवार मान गया और बेटीको वहीं अहमदाबाद छोड़ गया. सन 2000 की बात है. यही परिवार नारायण साईं के एककार्यक्रम में हिस्सा लेने सूरत गया. 16 साल की हो चुकी छोटी बेटी भी साथ गई थी.कथित तौर पर यहां नारायण साईं की ओर से परिवार को बहलाया-फुसलाया गया और छोटी बेटीको मेघनगर आश्रम बनने में सहयोग के बहाने रोक लिया गया. उसे घर लौटने नहीं दियागया.रेप के बाद हुई लड़की से मारपीटनारायण साईं के खिलाफ ये केस करीब 11 साल पुराना है.उसे 2002 में नारायण साईं के साथ बिहार और नेपाल के टूर ले जाया गया. वहां से लौटकरसूरत आई तो रिपोर्ट के मुताबिक एक दिन साईं ने उसे अपने पास बुलाया. फिर उसका रेपकिया. बार-बार किया. बाद में लड़की ने अपने घर जाने की कोशिश की तो उसे मारा-पीटागया. एक दिन उसने किसी तरह मां की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर, भाई की मदद सेघर जाने के लिए आश्रम से परमिशन ले ली. छुट्टी मिली, वो भी सिर्फ 10 दिन के लिए. घरपहुंची तो सही लेकिन उनको कुछ बताने की हिम्मत न जुटा सकी. 10 दिन बाद आश्रम से फोनआने लगे. न लौटने पर उन्हें धमकाया गया. मगर अब वो नहीं गई.कुछ दिन बाद घर के लोगों ने बड़ी बहन को भी बुला लिया. जब दोनों बहनें मिलीं तोबड़ी ने भी अपनी यही आपबीती बताई. हालांकि ये अपने माता-पिता को बताने की हिम्मतनहीं जुटा पाईं. फिर दोनों की शादी हो गई. 2013 में जब आसाराम गिरफ्तार हो गया तोदोनों बहनें इस लड़ाई में कूद गईं और नारायण साईं को सजा दिलाने की ठानी. 6 अक्टूबर2013 को दोनों ने सूरत में केस दर्ज करवाया. बड़ी बहन ने आसाराम पर यौन शोषण काआरोप लगाया तो छोटी ने नारायण साईं पर. दोनों को अपने पतियों का भी पूरा सपोर्टमिला.गिरफ्तारी के लिए बनी थीं 58 टीमेंगिरफ्तारी के वक्त साईं पगड़ी बांधे मिला था.इसके बाद नारायण साईं पर आईपीसी की धारा 376, 377, 365, 120बी में केस दर्ज कर लियागया. फिर गिरफ्तारी की कोशिशें शुरू हुईं. तत्कालीन सूरत पुलिस कमिश्नर राकेशअस्थाना ने नारायण साईं को गिरफ्तार करने के लिए 58 अलग-अलग टीमें बनाई और तलाशीशुरू कर दी थी. दिसंबर 2013 में नारायण साईं को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी सेबचने के लिए वो नकली हुलिया बनाकर छुपा हुआ था. खुद को कृष्ण का रूप बाताने वालेनारायण साईं की गिरफ्तारी के बाद उसके कृष्ण की तरह महिलाओं के बीच बांसुरी बजानेके कई वीडियो भी सामने आए थे.साईं की गिरफ्तारी के बाद केस लड़ने के दौरान दोनों लड़कियों के परिवार को जान सेमारने की धमकियां मिलीं. कई बार हमले हुए. मगर दोनों बहनों ने संघर्ष जारी रखा. इनलड़कियों के पिता बीमार थे, जिसकी वजह से उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया था. इनबहनों ने अपनी मां को भी पूरी बात तब बताई जब केस दर्ज हो गया था. लेकिन परिवार केलिए ये लड़ाई कभी आसान नहीं रही थी. पीड़िता छोटी बहन ने अपने बयान में नारायण साईंके खिलाफ ठोस सबूत देते हुए हर लोकेशन की पहचान की है. नारायण साईं के खिलाफ सेशनकोर्ट में 53 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं. इनमें वो गवाह भी हैं, जिन्होंने यातो रेप होते हुए देखा था या फिर नारायण साईं की मदद की थी और बाद में गवाह बन गएथे. करीब साढे़ पांच साल तक चली इस सुनवाई के बाद आखिरकार कोर्ट ने नारायण साईं कोरेप का दोषी करार दिया. 30 अप्रैल को कोर्ट ने नारायण साईं को उम्रकैद की सजासुनाई और साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया.--------------------------------------------------------------------------------ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल में वोटिंग के दिन हिंसा के पीछे कौन? |दी लल्लनटॉपशो| Episode 203