राजनीति में किस्सों को मौत नहीं आती. कब गढ़े मुर्दे उखाड़ कर सामने रख दिए जाएंनहीं पता. और ये मुर्दे आपका पीछा नहीं छोड़ते. अब मोदी सरकार कुछ खुलासा करने वालीहै. और ये खुलासा वही है जो आपने खुद कई बार सुना होगा. वो ये कि यूपीए के दौरानप्रधानमंत्री मनमोहन नहीं बल्कि सोनिया गांधी सरकार चला रही थीं. मोदी सरकार को कुछफाइलें हाथ लग गई हैं. खबर में दावा किया गया है कि यूपीए सरकार NAC के ही इशारों पर चल रही थी. NAC सेंटरगवर्मेंट के किसी भी अफसर को 2 मोती लाल नेहरू प्लेस में बने ऑफिस में हाजिर होनेका ऑर्डर जारी कर देती थीं. मंत्रियों को लैटर लिखकर उनसे रिपोर्ट मांगी जाती थी.जबकि NAC को गठित करते हुए कहा गया था कि यह सिर्फ सरकार को सलाह देने के लिए बनाईगई है. खबर में ये भी दावा किया गया है कि फाइलों से मिली जानकारी के मुताबिकमनमोहन सरकार के पास NAC के ऑर्डर को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. औरपरिषद की सिफारिशों को लागू कर दिया जाता था. मनमोहन सिंह सोनिया गांधी के दबाव मेंकाम कर रहे थे. इस बात को साबित करते हुए मोदी सरकार 710 फाइलें सामने लाने के लिएसोच विचार कर रही है. ये फाइलें सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रीयसलाहकार परिषद (NAC) की हैं. जानकारी के मुताबिक इन फाइलों से ये क्लियर हो जाएगाकि मनमोहन किस तरह सोनिया गांधी के दबाव में काम कर रहे थे. और सोनिया गांधी का येदबदबा पूरे 10 साल बना रहा. काम सोनिया गांधी करती रहीं और गलतियों का ठीकरा मनमोहनसिंह पर फूटता रहा. 2004 से 2014 तक चली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् की चेयरमैन खुदसोनिया गांधी थीं. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक यूपीए सरकार केदौरान में 'NAC' कोयला, उर्जा, डिसइन्वेस्टमेंट, रियल एस्टेट, गवर्नेंस, सोशल औरइंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए बनने वाली सरकारी पॉलिसी में दखलअंदाजी करती थी. यानीसोनिया गांधी बिना किसी जवाबदेही के ही सरकार को पूरी तरह कंट्रोल किए हुए थीं. एकफाइल के हवाले से छापा गया है कि 29 अक्टूबर 2005 को राष्ट्रीय सलाहकार परिषद कीबैठक हुई, जिसमें फैसला लिया गया, 'समिति की तमाम सिफारिशों को लागू कराने कीज़िम्मेदारी सरकारी एजेंसियों और संस्थाओं की होगी. साथ ही इसकी स्वतंत्रतापूर्वकनिगरानी और मूल्यांकन भी किया जाएगा.' सवाल ये भी है कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष औरNAC की चेयरमैन सोनिया गांधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर यकीन नहीं करती थीं,क्योंकि सिफारिशें लागू करने के ऑर्डर के अलावा परिषद उन पर निगरानी भी रखने की बातकहती थी. फाइलों में स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सलाहाकार परिषद कई एजेडों पर अपनीसिफारिशें सरकार को भेजती थी. जैसे 21 फरवरी 2014 में सरकार को एक चिट्ठी लिखी गई,'जिसमें लिखा था, 'NAC चेयरमैन की ओर से नॉर्थ-ईस्ट में खेलों को बढ़ावा देने सेसंबंधित सिफारिश सरकार को भेज दी गई है.' रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि देश मेंसहकारिता के विकास पर भी सिफारिशें सरकार को भेजी जाती रही हैं. जिसे सोनिया गांधीने इजाज़त दी थी. ये खुलासे कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं, क्योंकि पांचराज्यों में विधानसभा चुनाव सिर पर आ गए हैं. ऐसे में गढ़े मुर्दे बाहर आते हैं तोघबराहट बढ़नी तो तय है. https://www.youtube.com/watch?v=gAf2PZ7xm1Yhttps://www.youtube.com/watch?v=YKtdmjzRHVs-------------------------------------------------------------------------------- पहली बार सोनिया गांधी ने शेयर किए अपने पर्सनल किस्सेइमरजेंसी के ऐलान के दिन क्या-क्या हुआ था, अंदर की कहानी अंदर की कहानी: जब गांधीपरिवार की सास-बहू में हुई गाली-गलौज क्या सच में इंदिरा गांधी को ‘दुर्गा’ कहा थाअटल बिहारी वाजपेयी ने? खुद को ‘बदसूरत’ समझती थीं इंदिरा गांधी