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जयललिता का वो घर जिसके चलते रहस्यमयी मौतें हो रही हैं

अप्रैल से अब तक 5 लोग मर चुके हैं.

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8 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 8 जुलाई 2017, 06:31 PM IST)
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फोटो - thelallantop
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तमिलनाडु की अम्मा जे जयललिता के देहांत के बाद उनकी मौत पर सवाल उठाए जाने लगे. उनकी विरासत को लेकर हुई खींचतान के चलते जयललिता की मौत को लेकर एक रहस्य पनप गया. ऐसा ही एक रहस्य अब उनके रिट्रीट होम कोडनाड एस्टेट को लेकर भी पनप गया है. पिछले कुछ दिनों में यहां लगातार अनहोनी हुई हैं. डकैती, मर्डर और खुदकुशी.
ये सिलसिला इस साल के अप्रैल में शुरू हुआ. इस महीने 24 तारीख को यहां चोरी की कोशिश हुई. इसमें एक सिक्योरिटी गार्ड ओम बहादुर थापा की जान चली गई. इस वारदात का इल्ज़ाम जिन 11 लोगों पर लगा, उनमें से एक कनाग्रज रोड एक्सिडेंट में मारा गया. फिर एक दूसरे आरोपी स्यान के परिवार की मौत हो गई. अब यहां के एक और कर्मचारी दिनेश ने खुदकुशी कर ली है.
कोडनाड एस्टेट, नीलगिरी
कोडनाड एस्टेट, नीलगिरी

दिनेश पिछले सात साल से एस्टेट में बतौर सिस्टम्स एग्ज़ीक्यूटिव काम कर रहा था. तीन जुलाई की सुबह वो अपने कमरे में लेटा हुआ था. उसने अपनी मां से नाश्ता बनाने को कहा. उसकी मां उपमा बनाने किचन में गई. लेकिन दिनेश ये उपमा नहीं खा पाया. बमुश्किल 2 मिनट बाद दिनेश की छोटी बहन राधिका ने उसे सीलिंग से लटकते देखा गया. दिनेश की जान जा चुकी थी.
दिनेश की मौत आत्महत्या लगती थी. लेकिन चूंकि वो कोडनाड एस्टेट में काम करता था, उसकी मौत को तुरंत एस्टेट में एक के बाद एक हुई घटनाओं से जोड़कर देखा जाने लगा. पुलिस दिनेश की मौत और कोडनाड एस्टेट में हुई मौतों में कोई सबंध होने से इनकार करती है. पुलिस ने केस भी आप्रकृतिक मौत का दर्ज किया है. लेकिन दिनेश के मां-बाप इस बात पर भरोसा करने को तैयार नहीं. राधिका का कहना है कि दिनेश ने जिस लुंगी से फांसी लगाई, वो उसकी थी ही नहीं. उसके पिता का मानना है कि दिनेश उस कमरे में फांसी लगा ही नहीं सकता था जहां उसे फंदे पर लटकते देखा गया.
 
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आत्महत्या करने वाले लोग अमूमन किसी तरह के डिप्रेशन के शिकार होते हैं. लेकिन दिनेश की ज़िंदगी में ऐसा कुछ नहीं था जो इस तरफ इशारा करता हो कि दिनेश डिप्रेशन में थे. कुछ वक्त पहले दिनेश की आंख का ऑपरेशन ज़रूर हुआ था, लेकिन उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि वो अच्छी तरह रिकवर कर रहा था. इसलिए ऐसा नहीं लगता कि वो अपनी आंख की वजह से परेशान रहा होगा. यही वजह है कि दिनेश के मां-बाप के अलावा कोडनाड के बाशिंदे भी दिनेश की खुदकुशी की बात को जज़्ब नहीं कर पा रहे.
कोडनाड एस्टेट 900 एकड़ में फैला है. जयललिता जब अपनी ज़िंदगी से कुछ फुर्सत चाहतीं, तो यहां आतीं. वो अब यहां नहीं आंगी, लेकिन उनका स्टाफ अब भी तैनात है. इन सारी घटनाओं के बाद उन्हें अपनी नौकरी की चिंता है. चिंता उन लोगों को भी है, जो इस एस्टेट सहित जयललिता की बाकी प्रॉपर्टी पर दावा करते हैं जैसे कि चेन्नई का उनका पोज़ गार्डन वाला घर. जयललिता की वसीयत को लेकर भी विवाद हैं.

ये लेख डेली ओ के लिए अक्षय नाथ ने लिखा है. वेबसाइट की इजाज़त से हम इसका अनुवाद आपको पढ़ा रहे हैं .

लल्लनटॉप के लिए इसका अनुवाद निखिल ने किया है.




 
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