म्यांमार में सेना ने विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके में सैनेटरी पैड पर लगाया बैन, वजह भी बताई
म्यांमार में साल 2021 में सेना लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सत्ता पर काबिज हो गई. इसके बाद से विद्रोहियों और सेना के बीच गृहयुद्ध चल रहा है. विद्रोही गुटों ने भी देश के कई हिस्सों में कब्जा जमाया हुआ है. म्यांमार की सेना ने इन इलाकों मे सैनेटरी पैड समेत पीरियड में इस्तेमाल होने वाले कई प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया है.

म्यांमार में सत्ता पर सेना का कब्जा है. सेना ने विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में सैनेटरी पैड और महिलाओं के पीरियड से जुड़े कई प्रोडक्ट्स पर बैन लगा दिया है. उनका मानना है कि इन प्रोडक्टस का इस्तेमाल विद्रोही गुट अपने सैनिकों के इलाज के लिए कर रहे हैं. दूसरी ओर महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का दावा है कि ये सेना की ओर से विद्रोही महिला कमांडरों को रोकने का एक तरीका है.
म्यांमार में साल 2021 में सेना लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर सत्ता पर काबिज हो गई. इसके बाद से विद्रोहियों और सेना के बीच गृहयुद्ध चल रहा है. विद्रोहियों से मुकाबले के नाम पर तोपखाने से गोलीबारी, कस्बों को जलाना और किसी की भी मनमानी गिरफ्तारी म्यांमार में आम बात हो गई है.
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन सिस्टर्स-टू-सिस्टर्स की डायरेक्टर थिनजार शुनलेई यी ने बताया, सेना का दावा है कि 'पीपल्स डिफेंस फोर्स' मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल सैनिकों के इलाज और उनके पैरों और बूटों के पसीने और खून को सोखने के लिए करते हैं.
म्यांमार की सैनिक सरकार ने सीधे तौर पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. लेकिन इस ब्लॉकेड को फोर कट्स (four cuts) नाम के एक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य विद्रोहियों की बेसिक सप्लाई को रोकना है.
म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र के कुछ इलाकों में विद्रोहियों का कब्जा है. पिछले साल अगस्त से इस इलाके में सैनेटरी पैड बैन कर दिया गया. मांडले म्यांमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. मांडल से सागाइंग जाने के लिए एक पुल बनाया गया है. इस पुल के पार पैड ले जाना पूरी तरह से बैन है. मेडिकल ऐड चैरिटी स्किल्स फॉर ह्यूमैनिटी (SFH) की फाउंडर मेरेडिथ बन ने बताया,
कॉम्बैट मेडिसिन (युद्ध में) में काम करने वाले किसी भी शख्स को पता होता है कि सैनेटरी पैड का इस्तेमाल गोली के घावों या फिर कटने-फटने के इलाज के लिए नहीं किया जा सकता है. सैनेटरी पैड अपनी जगह पर नहीं टिकता. यह पर्याप्त खून नहीं सोखता और उस जगह को साफ नहीं कर पाता. सेना में काम कर रहे अनपढ़, मूर्ख और महिला विरोधी लोग इस बैन के लिए जिम्मेदार हैं.
म्यांमार में महिलाओं के बीच पीरियड को लेकर जागरूकता फैलाने का काम करने वाले संगठन 'पैन का ले' की फाउंडर हेनरीएट सेराक ने बताया कि महिलाएं यहां पीरियड के दौरान चिथड़े-फटे कपड़े, पत्ते या अखबार जैसे असुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो रही हैं.
सैनेटरी पैड के लिए महिलाएं गुप्त बाजारों का रुख करती हैं. यहां उनको कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है. एक पैकेट की कीमत म्यामांर में 3000 क्यात (110 रुपये) होती है. लेकिन इनको 9000 हजार क्यात (330 रुपये चुकाना पड़ता है. म्यामांर में एक दिन की न्यूनतम मजदूरी 7,800 क्यात ( लगभग 290 रुपये) है. थिनजार शुनलेई यी ने बताया,
म्यांमार में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. यहां इलाज मिलना मुश्किल है. सिस्टर्स2सिस्टर्स से ग्राउंड पर यूरिनल इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एंटीबायोटिक्स की डिमांड की जाती है. महिलाएं असहज और परेशान रहती है. पीरियड के दौरान वो कई बार राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने के बजाय घर में रहना पसंद करती हैं.
हेनरीएट सेराक की मानें तो म्यांमार की सेना यही चाहती है. वह विद्रोही गुट में महिला लड़ाकाओं के शामिल होने पर बैन लगाना चाहती है. यह बेसिकली जेंडर आधारित हिंसा है. मेरेडिथ बन्न का मानना है कि यह महिला लड़ाकों को टारगेट करने, नागरिकों को नियंत्रित करने और विस्थापित शिविरों में रहने वालों को प्रताड़ित करने के लिए बनाई गई एक सैन्य रणनीति है. 2021 से अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग अस्थायी शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर हो चुके हैं.
वीडियो: दुनियादारी: थाईलैंड, म्यांमार में भूकंप के बाद कैसे हैं हालात?

