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  • Myanmar : Is the photo, widely shared as that of Rohingya Muslims charred to death, authentic?

क्या ये जली हुई लाशों की फोटो म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की है?

इस तस्वीर का सच बहुत खौफनाक है.

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8 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 8 सितंबर 2017, 07:14 AM IST)
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इस तस्वीर में रोहिंग्या मुस्लिम की लाशों को बताया जा रहा है, जबकि ये कॉन्गो में हुए टैंकर हादसे की है.
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म्यांमार के रहाइन (रखाइन) स्टेट में भड़की हिंसा में रोहिंग्या मुस्लिमों के करीब 2600 घर जला दिए गए. यहां कि एक तस्वीर है जो शेयर की जा रही है, वो भी ये बताकर कि 400 लोगों को जिंदा जला दिया गया है. इस तस्वीर में जली हुई लाशें म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की बताई जा रही हैं. लेकिन इस तस्वीर का ये पूरा सच नहीं है. इसमें कोई शक नहीं कि तस्वीर असली है. लेकिन जहां की बताई जा रही है वहां की नहीं है. बल्कि ये किसी और हादसे की है.

इस हादसे में 270 लोग मर गए थे

'द टाइम्स हेडलाइन' वेबसाइट ने रोहिंग्या मुस्लिम पर रिपोर्ट लगाई कि 400 रोहिंग्या मुसलमानों को जिंदा जला दिया गया. उसके साथ जली हुई बॉडी की तस्वीर भी लगाई. जो तस्वीर लगाई वो म्यांमार की नहीं है.
rohingya

ये तस्वीर है अफ्रीकी देश कॉन्गो की. जो भारत से 7 हज़ार किलोमीटर दूर है और म्यांमार से 9 हज़ार किलोमीटर.
साल 2010 में कॉन्गो में पेट्रोल से भरा एक टैंकर पलट गया था, जिसमें धमाका होने से आग लग गई थी.
साल 2010 में कॉन्गो में पेट्रोल से भरा एक टैंकर पलट गया था, जिसमें धमाका होने से आग लग गई थी.

साल 2010 में फुटबॉल वर्ल्ड कप चल रहा था. कॉन्गो में पेट्रोल से भरा एक टैंकर तंजानिया से आ रहा था. जब ये टैंकर कॉन्गो के गांव सांगे पहुंचा तो वहां ये पलट गया. लीक हो रहे पेट्रोल को इकट्ठा करने के लिए लोग वहां जमा हो गए, और टैंकर से पेट्रोल भरकर ले जाने लगे. इसके बाद ट्रक में धमाका हुआ और आग पूरे गांव में फैल गई.
270 लोग जिंदा जल गए थे, इस तस्वीर को रोहिंग्या मुस्लिम की बताकर शेयर किया जा रहा है.
270 लोग जिंदा जल गए थे, इस तस्वीर को रोहिंग्या मुस्लिम की बताकर शेयर किया जा रहा है.

आग इसलिए तेज़ी से फैली क्योंकि इस गांव में घर घास फूंस और मिट्टी से बने हुए थे. इस आग में कई लोग ईंधन चुराते वक़्त मारे गए. लेकिन ज्यादा लोग वो मरे जो घरों में बैठे फुटबॉल का वर्ल्ड कप मैच देख रहे थे. उन्हें मालूम भी नहीं था कि बाहर क्या हादसा हुआ है?
गांव में घर फूंस और मिट्टी से बने थे, इसलिए आग तेज़ी से फैली थी.
गांव में घर फूंस और मिट्टी से बने थे, इसलिए आग तेज़ी से फैली थी.

मैच देख रहे लोगों को जरा भी एहसास नहीं था कि मौत की लपटें उन्हें अपने आगोश में लेने वाली हैं. इस हादसे में 270 लोग मारे गए थे.

रोहिंग्या मुस्लिम का दर्द भी कम नहीं है

भले ये तस्वीर कॉन्गो की हो, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि म्यांमार में सब कुछ सही है. वहां हुई हिंसा की वजह से करीब एक लाख 64 हज़ार रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन कर चुके हैं. रोहिंग्या मुस्लिमों की म्यांमार में जो हालत है, शायद ही दुनिया में किसी कौम की ऐसी हो. ये कौम सबसे ज्यादा सताई हुई नज़र आ रही है. जिसका कोई देश नहीं है.
कई हज़ार रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन कर गए हैं. क्योंकि हिंसा में उनके घर जला दिए गए हैं. (Photo : Reuters)
कई हज़ार रोहिंग्या बांग्लादेश पलायन कर गए हैं, क्योंकि हिंसा में उनके घर जला दिए गए हैं. (Photo : Reuters)

म्यांमार इन्हें बांग्लादेशी कहता है. तो बांग्लादेश इनको अपने यहां घुसने नहीं दे रहा. न कोई इस्लामिक देश मदद के लिए आगे आ रहा है.
रोहिंग्या मुस्लिम के सिर पर छत तो बड़ी बात है. खाने के लिए भी कुछ नहीं मिल पा रहा है. (Photo : Reuters)
रोहिंग्या मुस्लिम के सिर पर छत तो बड़ी बात है. खाने के लिए भी कुछ नहीं मिल पा रहा है. (Photo : Reuters)

शांति के नोबेल प्राइज से सम्मानित आंग सांग सू की, म्यांमार की सत्ता में हैं उन्हें भी इन रोहिंग्या का दर्द नजर नहीं आ रहा है. बल्कि वो रहाइन में रोहिंग्या मसले को कश्मीर जैसा मसला बताकर अपना पल्लू झाड़ रही हैं. रोहिंग्या मुस्लिम मर रहे हैं और सेना से बचकर देश छोड़कर भाग रहे हैं.

रोहिंग्या मुस्लिमों का कहना है कि रहाइन स्टेट में पुलिस थानों पर रोहिंग्या कट्टरपंथियों के हमले के बाद सेना और रहाइन बौद्ध समुदाय के लोगों ने उनके गांवों को जला दिया है. जबकि म्यांमार की सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है. सरकार का कहना है कि चरमपंथियों और मुस्लिम लोगों ने ख़ुद ही अपने गांवों को जलाया है.
घरों में आग लगने से देश छोड़ने को मजबू हैं रोहिंग्या मुस्लिम. (Photo : Reuters)
घरों में आग लगने से देश छोड़ने को मजबू हैं रोहिंग्या मुस्लिम. (Photo : Reuters)

बीबीसी के दक्षिण पूर्व एशिया के जर्नलिस्ट हैं जोनाथन हेड. उन्होंने मुस्लिम गांव का दौरा किया. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मुस्लिमों के घरों में आग लगाई गई. और ये आग बौद्ध समुदाय के लोगों ने लगाई. जिसमें सेना ने भी मदद की. सेना ने उन्हें सुरक्षा का खतरा बताते हुए कुछ ही जगहों पर घूमने की इजाज़त दी थी.
रोहिंग्या का दर्द पढ़िए : शांतिप्रिय लोगों की ख़ामोशी मुसलमानों की इस नस्ल को खत्म कर देगी

म्यांमार के अफसरों का कहना है कि रोहिंग्या विद्रोहियों ने सुरक्षाबलों पर 31 अगस्त को सुनियोजित हमले किए, जिसके बाद से सुरक्षाबल और विद्रोहियों के बीच हिंसा जारी है. इसके बाद से ही रोहिंग्या मुस्लिम पलायन को मजबूर हो गए हैं.
कई हज़ार रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन कर गए हैं. कुछ बॉर्डर पर ही रोक दिए गए हैं. (Photo : Reuters)
कई हज़ार रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश पलायन कर गए हैं. कुछ बॉर्डर पर ही रोक दिए गए हैं. (Photo : Reuters)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक म्यांमार में 2,625 घर जलाए गए हैं. ये बात वहां के अफसरों ने भी स्वीकार की है कि हिंसा में 400 रोहिंग्या मुस्लिम मारे गए हैं. भले ही ये अफसर मरने वालों को उग्रवादी बता रहे हैं.
बच्चों और बुजुर्गों को बचाने के संघर्ष रोंगटे खड़े कर देता है. (Photo : Reuters)
बच्चों और बुजुर्गों को बचाने के संघर्ष रोंगटे खड़े कर देता है. (Photo : Reuters)

सेना ने रहाइन स्टेट के गांवों में घटी इस घटना के लिए अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (एआरएसए) को जिम्मेदार ठहराया है, जो कथित तौर पर रोहिंग्या मुसलमानों की रक्षा करती है. अगर म्यांमार के अफसरों की बात को सच मान लें. तो सवाल ये भी है कि अगर सेना सिर्फ उग्रवादी या कट्टरपंथी जो भी हैं, उन्हें मार रही है तो फिर बच्चों की लाशें क्यों मिल रही हैं?
मरने वालों में मर्द ही नहीं औरतें और बच्चे भी हैं, जिनकी लाशें कलेजा काटती हैं. (Photo : Reuters)
मरने वालों में मर्द ही नहीं औरतें और बच्चे भी हैं, जिनकी लाशें कलेजा काटती हैं. (Photo : Reuters)


 
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