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सारे हिंदू परिवार चले गए, बस एक बचा, 16 साल बाद दुर्गा पूजा आयोजित करवा रहे मुस्लिम

आयोजन करने वालों ने कहा कि दुर्गा पूजा सबका त्योहार है और अगर वो देश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं, तो मुस्लिम बाहुल्य इलाके में हिंदू परिवार का खयाल रखना उनकी जिम्मेदारी है.

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30 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 30 सितंबर 2022, 10:30 PM IST)
Kolkata Durga pooja
कोलकाता दुर्गा पूजा. (फोटो: आज तक)
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कोलकाता (Kolkata) के एक मुस्लिम बाहुल्य इलाके में 16 साल बाद फिर दुर्गा पूजा का आयोजन होने जा रहा है. इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर हिंदू परिवार सालों पहले यहां से चले गए थे. जिसके बाद यहां पर दुर्गा पूजा का आयोजन बंद हो गया था. दुर्गा पूजा का आयोजन करवाने की जिम्मेदारी एक क्लब ने ली है, जिसके सारे सदस्य मुस्लिम समाज से आते हैं.

16 साल बाद पूजा का आयोजन

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के अलीमुद्दीन गली के 13A शारिफ लेन में 16 साल बाद दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है. इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर हिंदू परिवारों ने अलग-अलग कारणों से 16 साल पहले ये जगह छोड़ दी थी. जिसके बाद साल 2021 में इलाके के कुछ मुस्लिम युवाओं ने शारिफ लेन में होने वाली दशकों पुरानी दुर्गा पूजा का फिर से आयोजन करवाने का जिम्मा लिया था. 

रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने दुर्गा पूजा का आयोजन यहां पर रहने वाले एक हिंदू परिवार के लिए करवाया है. दुर्गा पूजा का आयोजन करवाने वाले तौसुफ रहमान इंडिया टुडे से बात करते हुए बताते हैं कि, यहां पर रहने वाला इकलौता बंगाली हिंदू परिवार दुर्गा पूजा के आयोजन न होने से काफी उदास था. इसलिए हमने फिर से दुर्गा पूजा का आयोजन करवाने का फैसला लिया. तौसुफ ने बताया,
 

‘"सेन परिवार ने दुर्गा पूजा का आयोजन करवाने को लेकर हमसे बात की थी, जिसके बाद हमने सोचा कि हमें इसका आयोजन करवाना चाहिए क्योंकि दुर्गा पूजा हम सबका त्योहार है. सेन परिवार की अगुवाई में हमने पूजा पंडाल से लेकर सारी जरुरी चीजों की व्यवस्था करवाई है. अगर हम अल्पसंख्यकों के हक की बात करते हैं, तो हमें मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रह रहें हिंदुओं के हक का भी ख्याल रखना चाहिए.’ 

हिंदू परिवार क्या बोला? 

इधर इंडिया टुडे से बात करते हुए 20 साल के सयंता सेन बताते हैं कि उनका परिवार यहां पर रहने वाला इकलौता बंगाली हिंदू परिवार है और उनके पिता यहां पर होने वाली दुर्गा पूजा के पुराने आयोजनकर्ताओं में से एक हैं. सयंता आगे बताते हैं कि उन्हें इस बात की बहुत खुशी है कि उनके इलाके में 16 साल बाद फिर से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है. 

पुराने दिनों को याद करते हुए संयता बताते हैं कि जब वो 3-4 साल के थे, तब इसका आयोजन बंद हो गया था. उनके पिता उन्हें यहां पर होने वाली दुर्गा पूजा के बारे में बताते थे. सयंता आगे कहते हैं कि, मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा दुर्गा पूजा का आयोजन करवाना हिंदु-मुस्लिम भाईचारे का एक बहुत खूबसूरत उदाहरण है.

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे आर्यन ने लिखी है.)

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