यूं तो संगठित धर्मों में तमाम तरह की बुराइयां हैं लेकिन महिलाओं पर उसकी विशेषकृपा का मुक़ाबला नहीं किया जा सकता. लगभग सभी धर्मों में महिलाओं को हमेशा दोयमस्थान मिलता आया है और तमाम धार्मिक कायदे-क़ानून पुरुषों की सुविधा को निगाह में रखकर बनाए गए हैं. फ़र्क सिर्फ इतना है कि किसी धर्म में इसका कहर कम है, किसी मेंज़्यादा तो किसी में बहुत ज़्यादा. तलाक़ का मकड़जाल मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐसा हीफंदा है जिसमे अटकी औरत बेबसी की इंतेहा को छू लेती है. ऐसी ही एक घटना में दिल्लीकी एक औरत को धर्म-परिवर्तन की धमकी देनी पड़ी है. दूसरा पति ना तो तलाक़ दे रहा हैऔर ना ही साथ रख रहा है. महिला दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके की रहने वाली है. कल एकप्रेस-कांफ्रेंस में उसने बताया कि उसकी शादी 13 साल की उम्र में एक 26 साल के शख्ससे हुई थी. अब वो 32 साल की है. उसके पहले पति से उसे तीन संताने हुई. उसके बादउसने उसे तलाक़ दे दिया. तलाक़ के बाद महिला ने मुसलमानी क़ानून के मुताबिक इद्दत पूरीकी. जिसका वक्फा तीन महीने का था. फिर उसने दूसरी शादी कर ली. लेकिन इससे उसकीज़िंदगी बेहतर हुई हो ऐसा कुछ नहीं हुआ. दूसरी शादी और भी डिजास्टर साबित हुई. उम्रमें चार साल छोटे दूसरे पति ने उसे छोड़ दिया. सवा साल पहले एक बेटी के जन्म के बादसे ही वो फरार है. उसने दूसरी शादी भी कर ली है. तब से लेकर आजतक पीड़ित महिला न्यायके लिए दर-दर भटक रही है.live india imageमहिला के मायके वाले भी उसका साथ नहीं दे रहे. क्योंकि उसने गैर-बिरादरी में शादीकी थी. ना ही उसके मज़हब के लोग उसे कोई मदद मुहैया करा रहे हैं. यहां तक कि पुलिसभी उसकी हेल्प नहीं कर रही. नवंबर में रिपोर्ट लिखाने के बावजूद आज तक इस मसले परपुलिस ने कोई हाथ-पांव नहीं हिलाए हैं. चारों तरफ से हताश होकर उसे ये घोषणा करनीपड़ रही है कि अगर उसे इंसाफ नहीं मिला तो इस्लाम त्याग कर हिंदू बन जाएगी. ज़ाहिर सीबात है इस घोषणा से कम से कम कुछ लोगों के कान तो खड़े होंगे ही. भारत में महिलाओंकी इस तरह की पुकार को अनसुना कर देने की परंपरा है. अगर धर्म-परिवर्तन का तड़कानहीं लगता तो ये आपबीती मीडिया में आनी तो दूर कोई इसे सुनने तक को राज़ी न होता. अबजब 'हिंदू', 'मुस्लिम', 'धर्म-परिवर्तन' जैसे शब्द इस कहानी का हिस्सा बन गए हैं,तो इसकी तरफ तवज्जो दी जा रही है. ये बात इस तथ्य से भी साबित होती है कि महिला कोइंसाफ दिलाने जो संगठन सामने आया है उसका नाम जय-शिव-सेना संस्था है. ये चीज़ अक्सरदेखने मिलती है. पीड़ित की आपबीती में अपनी संभावनाएं तलाशने का कारोबार बहुत पुरानाहै इस देश में. इस्लाम के पीड़ितों की मदद करने को हिंदूवादी संगठन तत्पर मिलेंगेजबकि दलितों के साथ हो रही ढेरों नाइंसाफियां नज़रअंदाज़ की जाएंगी. वहीं हिन्दुओं केसताए गरीब-गुरबा दलितों को मदद का हाथ पेश करते मियां भाइयों की कोई कमी नहीं नज़रआएगी. इस्लाम उन्हें कबूलने को बेकरार दिखाई देगा. चाहे अपने यहां चार-दीवारी मेंघुट-घुट कर मरती महिलाओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा इंसाफ़ की उम्मीद में दम तोड़ रहा हो.इससे पहले भी कई बार ऐसी ख़बरें सुर्ख़ियों में जगह बनाने में कामयाब हुई हैं जहांइंसाफ की तलाश में हलकान-परेशान लोगों को धर्म बदलने की धमकी देनी पड़ी हो. पिछलेसाल वाल्मीकि समाज के कई परिवारों ने एक साथ इस्लाम कबूलने की धमकी देकर सनसनी फैलादी थी. इस केस में मामला उल्टा है. मुसलमान से हिंदू बनने की धमकी दी जा रही है.विडंबना ही है कि दयालुता का, करुणा का, समानता का इश्तेहार बने फिरते तमाम धार्मिकसंगठन अवसरवादियों के गिरोह के अलावा कुछ नहीं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएतीन तलाक़ को ख़त्म करने के लिए इस बार जबर तैयारी कर रही है सरकारमंदिर में एंट्री नहीं मिली, 250 दलित परिवार बनेंगे मुसलमानबंदूक का लाइसेंस लेने के लिए मुसलमान बना हिंदू, मुसीबतें शुरूजेब गर्म करके लोगों को मुसलमान बनाता था जाकिर नाइक?--------------------------------------------------------------------------------