"30 सालों तक हम साथ-साथ चले. लेकिन मौत के शैतानों की ताकत जीने की इच्छा सेज्यादा शक्तिशाली निकली. तुम चली गईं. तुम्हारी आत्मा को शांति मिले. तुम्हारा,मैनफ्रेड." (नाविकों के एक इंटरनेट फोरम पर)ये उस आदमी के आखिरी शब्द थे जिसके मरे हुए शरीर का ममी दो मछुआरों को फिलिपींस केएक तट पर मिला.मैनफ्रेड की एक पुरानी तस्वीरमैनफ्रेड बहोरात 59 साल का था. और ये शब्द उसने अपनी पत्नी क्लॉडिया के लिए लिखेथे. क्लॉडिया, जो 2008 में मैनफ्रेड की दुनिया से चली गई. और 2010 में कैंसर से मरगई थी.क्लॉडियाजर्मन एडवेंचरर मैनफ्रेड बहोरात का मरा हुआ शरीर जब मछुआरों को मिला, पूरे इलाकेमें सनसनी फैल गई. क्योंकि शरीर न सड़ा, न गला, बल्कि अपने आप ममी बन गया. मैनफ्रेडअपने जहाज के केबिन में टेलीफोन के पास मरा पाया गया. जैसे अपनी जान बचाने के लिएकिसी को फोन करना चाह रहा हो.मैनफ्रेड कब मरा, कोई नहीं जानता. डॉक्टर कह रहे हैं कि समंदर की हवाओं ने उसकेशरीर को नेचुरल ममी में तब्दील कर दिया. शायद समंदरों को उससे प्यार था, जैसे उसेसमंदरों से.जहाज की जांच से पता लगता है कि जहाज पिछले 20 सालों से समुद्र में था. और इस जहाजसे निकलीं उस जिंदगी की झलकियां जो मैनफ्रेड अपनी पत्नी क्लॉडिया और बेटी नीना केसाथ बिता चुका था. वो पत्नी और बेटी की तस्वीरें हमेशा साथ रखता था. ये तस्वीरेंजहाज में बिखरी हुई थीं. जैसे अपने आखिरी वक़्त में वो इन्हें देख रहा हो.जहाज से मिली तस्वीर: पत्नी क्लॉडिया और बेटी नीनाक्लॉडिया, जिसके साथ मीलों तय कर चुका था मैनफ्रेडमैनफ्रेड को हज़ारों मील समुद्र नाप चुका था. और उसके हर सफर में उसकी पत्नी ने उसकासाथ दिया. फिर एक दिन ऐसा आया कि दोनों में तलाक हो गया. क्लॉडिया को कैंसर था.तलाक के दो साल बाद वो मर गई. लेकिन ऐसी यादें छोड़ गई जो मरने के बाद भी मैनफ्रेडके साथ थीं.