मुंबई में क्यों फैल रहा है खसरा? एक दिन में 13 केस, अब तक 12 लोगों की मौत
खसरे से कैसे बचा जा सकता है?

महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई (Mumbai) में खसरे का प्रकोप जारी है. यहां इस साल खसरे (Measles) के अब तक 200 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. 12 मरीजों की जान जा चुकी है. 22 नवंबर को खसरे से जूझ रहे एक 8 महीने के बच्चे की मौत हो गई. खसरे के प्रकोप को देखते हुए BMC अलर्ट पर है.
एक दिन में 13 नए केसBMC की ओर से जारी प्रेस नोट के मुताबिक, मुंबई में बुधवार, 23 नवंबर को खसरे के 13 नए मामले दर्ज किए गए. वहीं खसरे से भिवंडी के रहने वाले एक 8 महीने के बच्चे की मंगलवार, 22 नवंबर की शाम मौत हो गई. BMC के प्रेस नोट में बताया गया है कि बच्चे को 18 नवंबर को बुखार हुआ था. 20 नवंबर को बच्चे के पूरे शरीर पर रैशेज आए थे. मंगलवार, 22 नवंबर की शाम को उसे BMC के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खसरे के कारण अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.. मरने वाले 12 लोगों में से 3 की मौत मुंबई के बाहर हुई है.
प्रेस नोट के मुताबिक, 23 नवंबर को खसरे के कम से कम 30 नए मरीजों को शहर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जबकि 22 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया. इसके अलावा BMC के सर्वे में खसरे के 156 संदिग्ध मामले भी पाए गए हैं.
टीका लगवाने की अपीलआजतक के पारस दामा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के धारावी, गोवंडी, कुर्ला, माहिम, बांद्रा और माटुंगा जैसे इलाके खसरे के हॉटस्पॉट बन गए हैं. मुंबई में खसरे के प्रकोप को देखते हुए BMC ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वो 9 महीने से 5 साल तक के बच्चों को खसरे का टीका लगवाएं. इसके लिए मुंबई के अलग-अलग इलाकों पर 17 वैक्सीनेशन कैंप लगाए गए हैं. घर-घर जाकर भी बच्चों को टीका लगाया जा रहा है.
खसरे को कैसे रोका जा सकता है?खसरा एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो एक वायरस के कारण होती है. ये वायरस सबसे पहले श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और फिर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है. ये बीमारी बच्चों के लिए गंभीर और घातक हो सकती है. इसमें तेज बुखार और लाल चकत्ते होते हैं. जिन बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगा होता है, उन्हें खसरे से गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा होता है.
खसरे को वैक्सीनेशन के जरिए ही रोका जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सभी बच्चों के लिए खसरे के टीके की 2 डोज के साथ टीकाकरण की बात करता है. भारत में खसरे का टीकाकरण यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत आता है. इसमें पहला डोज 9 से 12 महीने की उम्र में और दूसरा डोज 16 से 24 महीने की उम्र में दिया जाता है.
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