सालभर में एक ही गवाह का 5 मामलों में इस्तेमाल, NCB पर उठे सवाल
पंच गवाह किसी केस में क्या मायने रखते हैं?

कॉर्डेलिया क्रूज़ शिप रेड. इसी रेड में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया गया था. NCB ने इस मामले में 10 पंच गवाह बनाए थे. अब इन गवाहों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इन गवाहों में से एक आदिल फजल उस्मानी को NCB साल 2020 से कम से कम 5 मामलों में गवाह बना चुकी है. 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, उस्मानी के अलावा दो अन्य गवाह केपी गोसावी और मनीष भानुशाली भी सवालों के घेरे में हैं. हालांकि गोसावी को गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं मनीष भानुशाली का संबंध BJP से है. इसके अलावा एक और गवाह प्रभाकर सैल ने NCB मुंबई के ज़ोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर आरोप लगाया थे कि उन्होंने ब्लैंक पेपर पर उससे जबरदस्ती साइन करवाए थे.
पंच गवाहों को बारे में क्या पता चला है?
उस्मानी, गोसावी, भानुशाली और सैल के अलावा NCB ने ऑब्रे गोमेज, वी वैगंकर, अपर्णा राणे, प्रकाश बहादुर, शोएब फैज़ और मुज़ाम्मिल इब्राहिम को गवाह बनाया गया था. इनमें से कुछ सिक्योरिटी स्टाफ हैं. 'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक उस्मानी जोगेश्वरी का रहने वाला है. इसे गांजा, ड्रग्स से जुड़े पांच अन्य मामलों में गवाह बनाया गया था.
इन सभी मामलों के पंचनामे में उस्मानी का यही अड्रेस लिखा है. हालांकि जब उस्मानी को उस पते पर ढूंढा गया तो वह नहीं मिला. और तो और सेशन कोर्ट के पास उस्मानी का कोई पुराना आपराधिक रेकॉर्ड भी नहीं है.
किरण गोसावी की ये तस्वीर खूब वायरल हुई थी.मुंबई क्रूज ड्रग्स केस एकमात्र ऐसा मामला नहीं है जहां NCB ने 'आदतन गवाहों' की ओर रुख किया. पिछले दो सालों में NCB ने कम से कम चार पंच गवाहों का गवाही के लिए कई बार इस्तेमाल किया है. इनमें से एक शहबाज मंसूरी चार मामलों में पंच गवाह रहा है.
एक और गवाह फ्लेचर पटेल जिनके नाम का जिक्र महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने किया था, NCB के तीन मामलों में पंच गवाह हैं, जो पिछले एक साल में दर्ज किए गए थे. मलिक के आरोपों के बाद पटेल ने मीडिया को बताया था कि वह सेना में थे. और अब सरकारी एजेंसियों की मदद करते हैं और इसमें उन्हें खुशी मिलती है. उन्होंने कुछ साल पहले एक समारोह में वानखेड़े से मुलाकात की थी.
इसके अलावा, सैयद जुबैर अहमद और अब्दुल रहमान इब्राहिम को NCB द्वारा इस वर्ष दो मामलों में पंच गवाह बनाया गया.
पंच गवाहों को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
पंच गवाह अधिकारियों द्वारा की गई तलाशी और बरामदगी की पुष्टि करते हैं. अदालत में गवाही देते हैं. CRPC की धारा 100 के अनुसार, पंच उस इलाके के "स्वतंत्र और सम्मानित निवासी" होंगे, जहां पंचनामा तैयार किया जा रहा है. नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत आर्यन खान जैसे मामलों में, जहां ड्रग्स की बरामदगी अक्सर आधार बनती है, पंच गवाह की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती है.
'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, NCB के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं बताया, लेकिन उनका कहना है कि एक ही व्यक्ति को बार-बार पंच गवाह बनाना कोई बड़ी बात नहीं है. क्योंकि ज्यादातर लोग इस तरह के मामले में गवाह नहीं बनना चाहते. इसके अलावा, अधिकांश छापे देर रात या वीकेंड पर होते हैं, तो ऐसे में गवाहों को ढूंढना मुश्किल होता है.
हालांकि ऐसा नहीं है कि NCB बार-बार एक ही व्यक्ति को गवाह बनाती है. अन्य एजेंसियां भी ऐसा करती हैं. वहीं पुलिसकर्मियों का तर्क है कि प्रत्येक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र पंच मिलना "व्यावहारिक नहीं" है. वहीं एक अधिकारी ने कहा,
ईमानदारी से बताएं यदि हम कुख्यात ड्रग लॉर्ड्स के खिलाफ छापेमारी कर रहे हैं तो क्या कोई हमारे साथ पंच गवाहों के रूप में जाने को तैयार होगा? हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई पंच भयभीत न हो और मुकदमे के लिए पेश हो क्योंकि हम हर पंच का रिकॉर्ड खोजने के लिए छापेमारी को नहीं रोक सकते.
अधिकारी ने आगे बताया कि स्वतंत्र गवाह से मतलब यह है कि व्यक्ति आर्थिक रूप से या किसी अन्य तरीके से एजेंसियों पर निर्भर न हो. पंच गवाहों के अलावा, हम अदालत के समक्ष अन्य सबूत पेश करते हैं. आप अन्य एजेंसियों के बारे में भी पता लगाएं. आप पाएंगे कि वो भी पंच विटनेस को बार-बार रिपीट करती हैं. फिर NCB पर ही सवाल क्यों उठ रहे हैं?

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