The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Mumbai cinema hall Alexandra turned into mosque

पहले यह अडल्ट फिल्मों का गढ़ था, अब मस्जिद है

मुंबई सेंट्रल के नागपाड़ा में है एलेक्जेंडर सिनेमा हॉल. कभी अंग्रेजी फिल्मों के धाकड़ हिंदी टाइटल लगाने के लिए मशहूर था. अब यहां आयतें गूंजती हैं.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
लल्लनटॉप
4 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2016, 10:50 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
यह थियेटर 18 प्लस फिल्में दिखाता था. अब इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया है. मुंबई सेंट्रल के नागपाड़ा जंक्शन के पास है, एलेक्जेंडर सिनेमा हॉल. साल 1921 में आर्देशिर ईरानी और अब्दुल अली यूसुफ अली ने इसे शुरू किया था. यह मशहूर था हॉलीवुड फिल्मों के रोमांचक और सनसनीखेज हिंदी टाइटल लगाने के लिए. अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म '39 स्टेप्स' को इसने 'एक कम चालीस लंबे' लिखा. 'डबल इंपैक्ट' को ' राम और श्याम' और 'ब्रूस ली द लिजेंड' को 'बंबैया दादाओं का दादा' लिखा. लेकिन साल 2000 के बाद एलेक्जेंडर सिनेमा हॉल 18 प्लस मूवी दिखाने के लिए फेमस हो गया. 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की खबर के मुताबिक धीरे-धीरे हालत ये हो गई कि स्कूल बसों ने थिएटर के पास से गुजरना बंद कर दिया. ताकि बच्चों पर अश्लील पोस्टर्स का गलत असर न पड़े. साल 2011 में बिल्डर रफीक दूधवाला ने एलेक्जेंडर सिनेमा हॉल को खरीदा और उसे 'दीनियत' नाम के एनजीओ को दे दिया. दीनियत इस्लाम की किताबें छापने का काम करता है. इसके अलावा पूरे राज्य के उर्दू और अरबी स्कूलों में किताबें भी बांटता है. तब से सीन बदल गया है. एलेक्जेंडर सिनेमा हॉल में फिल्में नहीं चलती. बल्कि कुरान की आयतें पढ़ी और सुनी जाती हैं. अब यहां मस्जिद के मौलवी साहब बैठते हैं. थिएटर का बाहरी कंस्ट्रक्शन पहले जैसा ही है. पर इंटीरियर काफी बदल चुका है. इस बदलाव से आस-पास के लोग खुश हैं. हालांकि इमारत अब भी पुराने दौर की याद दिलाती है. ये स्टोरी जागृतिक ने की है, जागृतिक लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं.

Advertisement

Advertisement

()