ऐलफिंस्टन-परेल पुल पर हादसे की भविष्यवाणी पहले ही हो चुकी थी
मुंबई के ऐलफिंस्टन स्टेशन पर भगदड़ से 22 लोग मर गए हैं. बेतहाशा भीड़ के कारण हादसा हुआ.
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सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर हो रहे हैं. इसमें पुल के ऊपर काफी भीड़ नजर आ रही है. लोग पुल की रेलिंग से बाहर आ गए हैं. एक शख्स नीचे कूदने की तैयारी करता हुआ भी दिखता है (फोटो: ट्विटर)
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29 सितंबर, 2017. मुंबई का ऐलफिंस्टन रेलवे स्टेशन. इस स्टेशन और परेल रेलवे स्टेशन को जोड़ने के लिए एक पैदल पारपथ यानी फुटओवर ब्रिज है. इस पर हुई भगदड़ में 22 लोग बेमौत मारे गए.

मर चुके लोगों के माथे पर ये नंबर अजीब लगते हैं.
उंगलियां सीधे रेल मंत्रालय पर उठ रही हैं. रेलवे को बहुत समय से आगाह किया जा रहा था. लोग कह रहे थे, हादसा हो सकता है. शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने भी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि पुल पर लोगों का बोझ बढ़ता जा रहा है. ये पुल अपनी मौजूदा हालत में इतने लोगों का बोझ नहीं उठा सकता. इसे चौड़ा किया जाना चाहिए. उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु को एक चिट्ठी भी भेजी थी. 20 फरवरी, 2016 को सुरेश प्रभु ने जवाबी चिट्ठी भेजी. लिखा:
ये हादसा औचक नहीं हुआ. ऐसा नहीं कि पूरी सावधानी बरतने के बाद भी अनहोनी हो गई हो. बहुत समय से रेलवे को आगाह किया जा रहा था, लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया.
सावंत ने लिखा था कि ऐलफिंस्टन रोड स्टेशन पर एक नया पुल बनाया जाए. 12 मीट चौड़ा. इसके लिए प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो के उत्तरी हिस्से को 100 मीटर और बढ़ाया जाए. ऐसी चेतावनी और सलाह देने वाले अकेले सांसद नहीं थे सावंत. शिवसेना के एक और सांसद राहुल शेवाले ने भी इससे मिलती-जुलती एक चिट्ठी लिखी थी. 23 अप्रैल, 2015 को. उन्होंने भी पुल को चौड़ा करने का सुझाव दिया था. 2016 में इसके लिए 11.86 करोड़ रुपए दिए गए.

काश, ये लेटर पुल में तब्दील हो गया होता.
अभी तीन दिन पहले भी एक शख्स ने रेलवे को आगाह किया था. संतोष अंधाले एक पत्रकार हैं. उन्होंने रेल मंत्री पीयूष गोयल को टैग कर इसकी आशंका जताई थी. लिखा था:
ये हादसा सुबह 10.30 बजे के करीब हुआ. मुंबई के लिए ये एकदम व्यस्त टाइमिंग होती है. लोगों के दफ्तर जाने का वक्त होता है. इस इलाके में कई सारे दफ्तर भी हैं. आस-पास के इलाकों में लाखों लोग काम करते हैं. घायलों को किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल (KEM) में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने लोगों से रक्तदान करने की अपील की है. वहां ए नेगेटिव, बी नेगेटिव और एबी नेगेटिव ब्लड ग्रुप के खून की ज्यादा जरूरत है.

ये ऐलफिंस्टन पुल काफी व्यस्त रहता है (फोटो: ट्विटर)
चश्मदीदों का कहना है कि बारिश के कारण काफी संख्या में लोग पुल पर ही रुके हुए थे. भीड़ बढ़ती जा रही थी. उधर, ट्रेन्स भी लगातार स्टेशन पर रुक रही थीं. उनसे उतरने वाले यात्रियों के कारण भीड़ और बढ़ती गई. इसी बीच, सेंट्रल लाइन और वेस्टर्न लाइन पर एक साथ दो-दो ट्रेन्स आईं. इसके कारण भीड़ और ज्यादा बढ़ गई. भगदड़ की शुरुआत तब हुई जब दो लोग पुल से नीचे गिरे. उस वक्त काफी तेज बारिश हो रही थी. एकदम से अफरातफरी मच गई. लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर, लोगों को कुचलकर आगे जाने लगे. ये पुल काफी संकरा है. भीड़ आमतौर पर बहुत ज्यादा होती है, लेकिन सीढ़ियां बहुत पतली हैं.

घायलों को लेकर जाते लोग.
3. धमाके की आवाज से लोग डरे! कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि फुटब्रिज के पास जोर के धमाके की आवाज आई थी. शायद कोई शॉर्ट-सर्किट हुआ था. लोग आवाज सुनकर डर गए और बदहवासी में दौड़ने लगे. अच्छी बात ये रही कि रेलवे और प्रशासन ने तत्परता दिखाई. राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.

KEM अस्पताल में स्थिति का मुआयना करने के लिए नेता और अधिकारी पहुंच रहे हैं.
स्थानीय लोग कह रहे हैं: ये तो होना ही था लोकल लोग नाराज हैं. कह रहे हैं, ऐसा तो एक न एक दिन होना ही था. लोगों का कहना है कि परेल और ऐलफिंस्टन स्टेशनों पर भीड़ कंट्रोल करने के लिए बेहतर सिस्टम लागू किए जाने की मांग काफी दिनों से हो रही थी. वैसा ही हुआ, जैसा हमेशा होता है. मांग तो हुई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. कई साल से लोग पुल को चौड़ा करवाने की मांग कर रहे हैं. एक विकल्प ये भी था कि एक और पुल बनवाकर इस पुल का बोझ कम किया जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. क्राउड मैनेजमेंट की अहमियत को नजरंदाज न किया होता, तो इतनी बड़ी भीड़ को पुल पर जमा ही नहीं होने दिया जाता.

दादार, चर्चगेट, विरार, अंधेरी, ठाणे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, बांद्रा, घाटकोपर, कुर्ला और बोरीवली मुंबई के सबसे व्यस्त स्टेशन हैं. चूंकि ऐलफिंस्टन स्टेशन पर सेंट्रल और वेस्टर्न लाइन्स का लिंक है, इसीलिए यहां भी खूब भीड़ होती है.
रेलवे स्टेशनों पर पहले भी हो चुकी है ऐसी भगदड़ 10 फरवरी, 2013 को इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर ऐसी ही एक भगदड़ मची थी. कुंभ मेले का वक्त था. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक ओवरब्रिज की रेलिंग टूटकर नीचे गिरी. फिर भगदड़ मच गई. हालांकि कुछ चश्मदीदों ने अलग बात कही थी. उनके मुताबिक, स्टेशन पर काफी भीड़ थी. पुलिस भीड़ को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. इसी चक्कर में कुछ पुलिसवालों ने लोगों पर डंडे चला दिए. फिर भागदौड़ मची और 42 लोगों की मौत हो गई.

अस्पताल के बाहर जमा लोग.
16 मई, 2010. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ऐसी एक भगदड़ मची थी. इसमें दो लोगों की मौत हुई थी. स्टेशन पर ठसाठस भीड़ थी. बिहार जाने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को प्लेटफॉर्म नंबर 13 से रवाना होना था. एकाएक अनाउंस हुआ कि ट्रेन 12 नंबर प्लेटफॉर्म से जाएगी. ट्रेन को निकलने में कुछ ही मिनट बचे थे. हड़बड़ाए यात्री 12 नंबर प्लेटफॉर्म की ओर भागने लगे. इस चक्कर में भगदड़ मच गई.
देखिए, लल्लनटॉप बुलेटिन
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मर चुके लोगों के माथे पर ये नंबर अजीब लगते हैं.
उंगलियां सीधे रेल मंत्रालय पर उठ रही हैं. रेलवे को बहुत समय से आगाह किया जा रहा था. लोग कह रहे थे, हादसा हो सकता है. शिवसेना के सांसद अरविंद सावंत ने भी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि पुल पर लोगों का बोझ बढ़ता जा रहा है. ये पुल अपनी मौजूदा हालत में इतने लोगों का बोझ नहीं उठा सकता. इसे चौड़ा किया जाना चाहिए. उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु को एक चिट्ठी भी भेजी थी. 20 फरवरी, 2016 को सुरेश प्रभु ने जवाबी चिट्ठी भेजी. लिखा:
हमारे पास जो आग्रह आ रहे हैं, वो बेहद जायज मांगें हैं. हम हमेशा कोशिश करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा मांगों को पूरा किया जाए. कई बार फंड की कमी और कुछ अन्य दिक्कतों के कारण ऐसा नहीं हो पाता.

ये हादसा औचक नहीं हुआ. ऐसा नहीं कि पूरी सावधानी बरतने के बाद भी अनहोनी हो गई हो. बहुत समय से रेलवे को आगाह किया जा रहा था, लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया.
सावंत ने लिखा था कि ऐलफिंस्टन रोड स्टेशन पर एक नया पुल बनाया जाए. 12 मीट चौड़ा. इसके लिए प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो के उत्तरी हिस्से को 100 मीटर और बढ़ाया जाए. ऐसी चेतावनी और सलाह देने वाले अकेले सांसद नहीं थे सावंत. शिवसेना के एक और सांसद राहुल शेवाले ने भी इससे मिलती-जुलती एक चिट्ठी लिखी थी. 23 अप्रैल, 2015 को. उन्होंने भी पुल को चौड़ा करने का सुझाव दिया था. 2016 में इसके लिए 11.86 करोड़ रुपए दिए गए.

काश, ये लेटर पुल में तब्दील हो गया होता.
अभी तीन दिन पहले भी एक शख्स ने रेलवे को आगाह किया था. संतोष अंधाले एक पत्रकार हैं. उन्होंने रेल मंत्री पीयूष गोयल को टैग कर इसकी आशंका जताई थी. लिखा था:
पीयूष गोयल सर, इस परेल ब्रिज का कुछ कीजिए.इस ट्वीट के साथ संतोष ने एक तस्वीर भी पोस्ट की थी. इसमें पुल पर काफी भीड़ नजर आ रही है. उनके ट्वीट के जवाब में वेस्टर्न रेलवे ने जवाब भी दिया था. रेलवे ने उनसे पुल की लोकेशन बताने को कहा. इसके बाद वेस्टर्न रेलवे ने ट्वीट कर बताया कि ये मामला सेंट्रल रेलवे के पास भेज दिया गया है.
Three day ago post it on FB and Twitter .. My fear turned true @calamur
— Santosh Andhale (@Santosh_Andhale) September 29, 2017
@waglenikhil
@rajtoday
@iyerkavi
@rajivkhandekar
@sardesairajdeep
pic.twitter.com/vKCznJqKOT
बहुत व्यस्त इलाका है परेल, कई सारे दफ्तर हैं यहां
ये हादसा सुबह 10.30 बजे के करीब हुआ. मुंबई के लिए ये एकदम व्यस्त टाइमिंग होती है. लोगों के दफ्तर जाने का वक्त होता है. इस इलाके में कई सारे दफ्तर भी हैं. आस-पास के इलाकों में लाखों लोग काम करते हैं. घायलों को किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल (KEM) में भर्ती कराया गया है. पुलिस ने लोगों से रक्तदान करने की अपील की है. वहां ए नेगेटिव, बी नेगेटिव और एबी नेगेटिव ब्लड ग्रुप के खून की ज्यादा जरूरत है.

ये ऐलफिंस्टन पुल काफी व्यस्त रहता है (फोटो: ट्विटर)
पुल पर रुके रहे लोग, बढ़ती गई भीड़
चश्मदीदों का कहना है कि बारिश के कारण काफी संख्या में लोग पुल पर ही रुके हुए थे. भीड़ बढ़ती जा रही थी. उधर, ट्रेन्स भी लगातार स्टेशन पर रुक रही थीं. उनसे उतरने वाले यात्रियों के कारण भीड़ और बढ़ती गई. इसी बीच, सेंट्रल लाइन और वेस्टर्न लाइन पर एक साथ दो-दो ट्रेन्स आईं. इसके कारण भीड़ और ज्यादा बढ़ गई. भगदड़ की शुरुआत तब हुई जब दो लोग पुल से नीचे गिरे. उस वक्त काफी तेज बारिश हो रही थी. एकदम से अफरातफरी मच गई. लोग एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर, लोगों को कुचलकर आगे जाने लगे. ये पुल काफी संकरा है. भीड़ आमतौर पर बहुत ज्यादा होती है, लेकिन सीढ़ियां बहुत पतली हैं.

घायलों को लेकर जाते लोग.
Our heartfelt condolence to the families of the deceased in the Elphinstone Station stampede. We hope the injured recover at the earliest. — Mumbai Police (@MumbaiPolice) September 29, 2017
हादसे के कुछ और ऐंगल भी सामने आ रहे हैं
1. लोगों को लगा कि पुल टूट गया शुरुआत में ये बात आई कि ये सारा मामला अफवाह से शुरू हुआ. पुल पर सीमेंट के कुछ टुकड़े गिरे. कुछ लोगों को लगा कि ओवरपास पुल गिर गया है. लोग बदहवास हो गए. जान बचाने की कोशिश में भागने लगे. ताकि जल्द से जल्द पुल से नीचे उतर जाएं. इसी चक्कर में भगदड़ मच गई और लोग कुचल गए.A -ve, B -ve and AB -ve blood is required in KEM hospital for those injured in #Elphinstone2. बारिश से बचने के चक्कर में हुई दुर्घटना! कुछ लोगों ने कहा कि बारिश के कारण हादसा हुआ. उनके मुताबिक, एकाएक बारिश होने लगी. स्टेशन पर लोग बारिश खत्म होने का इंतजार कर रहे थे. फिर जैसे ही पानी बरसना बंद हुआ, लोग बाहर निकलने की जल्दबाजी दिखाने लगे. इसी चक्कर में भगदड़ मची और हादसा हुआ.
stampede . Please contact the blood bank at KEM — Mumbai Police (@MumbaiPolice) September 29, 2017
Changing British era names from #Elphinstone
Station to #Prabhadevi
Station gets votes but doesn't save lives. Building better bridges does. pic.twitter.com/1S5ihOFHoq
— Uday Tharar (@udaytharar) September 29, 2017
3. धमाके की आवाज से लोग डरे! कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि फुटब्रिज के पास जोर के धमाके की आवाज आई थी. शायद कोई शॉर्ट-सर्किट हुआ था. लोग आवाज सुनकर डर गए और बदहवासी में दौड़ने लगे. अच्छी बात ये रही कि रेलवे और प्रशासन ने तत्परता दिखाई. राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किया गया. घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.
#MumbaiStampedeइस हादसे की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं. उनमें भी दिख रहा है कि पुल एकदम ठसाठस भरा है. लोग रेलिंग के बाहर लटके हुए हैं. कुछ लोग नीचे खड़े होकर वीडियो बना रहे हैं.
Helpline numbers: Churchgate station- 22039840, Mumbai Central station- 23051665 and Elphinstone Road station- 24301614 — ANI (@ANI) September 29, 2017
Human life pays for politicians income.. #Elphinstone
pic.twitter.com/pxfi4gM46u
— Shradha Agrawal (@iamShradha_11) September 29, 2017

KEM अस्पताल में स्थिति का मुआयना करने के लिए नेता और अधिकारी पहुंच रहे हैं.
स्थानीय लोग कह रहे हैं: ये तो होना ही था लोकल लोग नाराज हैं. कह रहे हैं, ऐसा तो एक न एक दिन होना ही था. लोगों का कहना है कि परेल और ऐलफिंस्टन स्टेशनों पर भीड़ कंट्रोल करने के लिए बेहतर सिस्टम लागू किए जाने की मांग काफी दिनों से हो रही थी. वैसा ही हुआ, जैसा हमेशा होता है. मांग तो हुई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. कई साल से लोग पुल को चौड़ा करवाने की मांग कर रहे हैं. एक विकल्प ये भी था कि एक और पुल बनवाकर इस पुल का बोझ कम किया जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. क्राउड मैनेजमेंट की अहमियत को नजरंदाज न किया होता, तो इतनी बड़ी भीड़ को पुल पर जमा ही नहीं होने दिया जाता.

दादार, चर्चगेट, विरार, अंधेरी, ठाणे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, बांद्रा, घाटकोपर, कुर्ला और बोरीवली मुंबई के सबसे व्यस्त स्टेशन हैं. चूंकि ऐलफिंस्टन स्टेशन पर सेंट्रल और वेस्टर्न लाइन्स का लिंक है, इसीलिए यहां भी खूब भीड़ होती है.
रेलवे स्टेशनों पर पहले भी हो चुकी है ऐसी भगदड़ 10 फरवरी, 2013 को इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर ऐसी ही एक भगदड़ मची थी. कुंभ मेले का वक्त था. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक ओवरब्रिज की रेलिंग टूटकर नीचे गिरी. फिर भगदड़ मच गई. हालांकि कुछ चश्मदीदों ने अलग बात कही थी. उनके मुताबिक, स्टेशन पर काफी भीड़ थी. पुलिस भीड़ को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी. इसी चक्कर में कुछ पुलिसवालों ने लोगों पर डंडे चला दिए. फिर भागदौड़ मची और 42 लोगों की मौत हो गई.

अस्पताल के बाहर जमा लोग.
16 मई, 2010. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ऐसी एक भगदड़ मची थी. इसमें दो लोगों की मौत हुई थी. स्टेशन पर ठसाठस भीड़ थी. बिहार जाने वाली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को प्लेटफॉर्म नंबर 13 से रवाना होना था. एकाएक अनाउंस हुआ कि ट्रेन 12 नंबर प्लेटफॉर्म से जाएगी. ट्रेन को निकलने में कुछ ही मिनट बचे थे. हड़बड़ाए यात्री 12 नंबर प्लेटफॉर्म की ओर भागने लगे. इस चक्कर में भगदड़ मच गई.
देखिए, लल्लनटॉप बुलेटिन
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भारत का सबसे बड़ा रेल हादसा, जब सैकड़ों लाशों का पता ही नहीं चला

