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मोहम्मद यूनुस जाते-जाते भी बाज नहीं आए, आखिरी भाषण में 'सेवन सिस्टर्स' पर इरादे जता दिए

Muhammad Yunus की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अपने कार्यकाल को लेकर वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से आलोचना का सामना कर रहे हैं. हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमला, हिंसा की घटनाएं और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाने को लेकर यूनुस सवालों के घेरे में हैं.

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17 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 06:35 PM IST)
Muhammad Yunus mention seven sisters farewell speech
मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में भारत का जिक्र किए बिना सेवन सिस्टर्स का जिक्र किया. (Reuters)
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बांग्लादेश में 17 फरवरी को नई सरकार का गठन हो गया है. इससे पहले अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम विदाई स्पीच दी. अपने आखिरी भाषण में विदेश नीति की उपलब्धियां गिनवाते हुए मोहम्मद यूनुस भारत का नाम लेने से बचे. लेकिन चालाकी दिखाते हुए पूर्वोत्तर राज्यों यानी ‘सेवन सिस्टर्स’ का नाम लेकर जाते-जाते अपनी रणनीतिक मंशा फिर से जता दी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस ने विदाई स्पीच में कहा,

हमारा खुला समुद्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है. यह वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का द्वार है. नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स समेत यह पूरा क्षेत्र आर्थिक समृद्धि की अपार संभावनाएं रखता है. आर्थिक क्षेत्र, व्यापार समझौते और टैरिफ मुक्त बाजार इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बना सकते हैं.

बांग्लादेश के अंतरिम सलाहकार के बयान में सेवन सिस्टर्स का जिक्र करते हुए भारत का नाम नहीं लेना कई विश्लेषकों के मुताबिक सोची समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. यूनुस ने अपने इस तरह के विवादित बयान से क्षेत्र की राजनीतिक और आर्थिक पहचान को अलग ढंग से पेश करने की कोशिश की है. भारत इस तरह की किसी भी कोशिश का विरोध करता रहा है.

यूनुस ने चीन में भी किया था सेवन सिस्टर्स का जिक्र

बांग्लादेश की अंतिरम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने मार्च-अप्रैल 2025 में अपनी चार दिन की चीन यात्रा के दौरान पहली बार सेवन सिस्टर्स का जिक्र किया था. उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर को ‘लैंडलॉक्ड’ बताते हुए कहा था कि चीन बांग्लादेश के रास्ते वहां तक अपने संपर्क और व्यापार का विस्तार कर सकता है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की थी.

मोहम्मद यूनुस की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब अपने कार्यकाल को लेकर वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों से आलोचना का सामना कर रहे हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमला, हिंसा की घटनाएं और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाने को लेकर यूनुस सवालों के घेरे में हैं. नोबेल पुरस्कार विजेता ने अपने कार्यकाल में भारत को नजरअंदाज करते हुए चीन और पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध बनाए, जबकि भारत संकट के समय में हमेशा बांग्लादेश के साथ खड़ा रहा है.

वीडियो: छात्र नेता Osman Hadi के जनाजे में शामिल हुए मोहम्मद यूनुस, अल्पसंख्यंकों पर हुए हमलों पर चुप्पी

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